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#शुभ गुरुवार `🔱 बृहस्पतिवार विशेष – श्रीबदरीनारायणोद्धार एवं जगद्गुरु शङ्कराचार्य 🔱` `समस्त धर्मप्रेमियों को बृहस्पतिवार की मङ्गल कामनाएँ🙏🏻🪷` `आज देवगुरु बृहस्पति का दिन है तथा साथ में ही ज्ञान , धर्म तथा गुरु-तत्त्व के स्मरण का दिन भी है ।` `भगवान् शिव की भविष्यवाणी 🔱🚩` `ततोऽहं यतिरूपेण तीर्थान्नारदसंज्ञकात् ।` ` `उद्धृत्य स्थापयिष्यामि हरिं लोकहितेच्छया ॥` [ `श्रीस्कन्दमहापुराण , वैष्णवखण्ड-२ , बद्रिकाश्रममहात्म्य , ५.२४` ] `अर्थात 👉🏻 कलियुग में मैं यति रूप धारण करके नारदकुण्ड नामक तीर्थ से श्रीहरि की मूर्ति का उद्धार करके लोकहित के लिए पुनः स्थापित करूँगा ।` `इतिहास – बौद्ध प्रभाव एवं आक्रमणों के कारण श्रीबदरीनारायण की मूर्ति अलकनन्दा के नारदकुण्ड में छिपा दी गई थी । कलियुग में भगवान् शंकर ने जगद्गुरु शङ्कराचार्य रूप में अवतार लेकर, नारदकुण्ड से मूर्ति निकाली औऱ तप्तकुण्ड के समक्ष वर्तमान मंदिर में पुनः प्रतिष्ठित की थी । साथ ही वहाँ रावल परंपरा एवं पूजा-पद्धति भी स्थापित की थी ।` `छवि में दिव्य दर्शन –` `१. मध्य में – काषाय वस्त्र , त्रिपुण्ड्र , रुद्राक्ष माला से सुशोभित , अभय मुद्रा में जगद्गुरु श्रीशङ्कराचार्य जी की शालिग्राम पाषाण की दिव्य प्रतिमा । पुष्पमाला एवं गद्दी से अलंकृत ।` `२. पीछे शिला पर`– `पंचदेव – गणेश , सूर्य , विष्णु , शिव , देवी – उत्कीर्ण हैं । यह पंचायतन पूजा पद्धति का प्रतीक है जो आचार्य ने ही स्थापित की थी ।` `३. दाहिनी ओर`– `रजत सिंहासन पर देवी की प्रतिमा है जो पुष्पमाला से सज्जित है । नीचे नंदी तथा पूजन सामग्री है ।` `🔱 जगद्गुरु के अवतार का उद्देश्य 🔱` `१. वैदिक धर्म का पुनरुद्धार – नास्तिक मतों के खंडन के साथ षड्दर्शन का समन्वय करना ।` `२. चार आम्नाय पीठों की स्थापना – धर्म की रक्षा हेतु जिनमें से एक ज्योतिर्मठ बद्रीनाथ में स्थित है ।` `३. पंचायतन पूजा –गणेश , सूर्य , विष्णु , शिव , देवी – इन पांचों की एक साथ पूजा प्रचलित की ताकि संप्रदाय-भेद मिटे । यह छवि में पीछे शिला पर स्पष्ठतः दृष्टिगोचर हो ही रहा है ।` `४. तीर्थों का उद्धार – ☆बद्रीनाथ , ☆केदारनाथ , ☆द्वारका , ☆पुरी जगन्नाथ , ☆रामेश्वरम् आदि ।` `देव गुरु बृहस्पति ज्ञान के देवता हैं , औऱ जगद्गुरु शङ्कराचार्य ज्ञान के साक्षात् अवतार । बृहस्पतिवार को इनका स्मरण विशेष फलदायी है ।` `अतः जगद्गुरु शङ्कराचार्य केवल अद्वैत वेदांत के प्रचारक ही नहीं हैं ,अपितु वैदिक सनातन धर्म के मूर्तिमान रक्षक भी हैं ।` `शिव का यह वचन उनके माध्यम से चरितार्थ हुआ ।` `बृहस्पतिवार को गुरु-चरणों में प्रणाम करके धर्म-मार्ग पर चलें – यही गुरु के प्रति सच्ची गुरु-दक्षिणा है ।` `हर हर महादेव शंभो , काशि विश्वनाथ गङ्गे🔱🚩` `जय बदरीविशाल की , जय केदारनाथ महादेव की🙏🏻🚩` `जय जय जगद्गुरु श्री आदि शंकराचार्य जी की🙌🏻🪷` 🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄©®
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