ShareChat
click to see wallet page
search
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - जयपुर, राजस्थान  खान मुजीब पिता की सीख... रुतबा  रखो नहीं, व्यवहार अच्छा पापा उच्च सरकारी पद पर थे। उनके ड्राइवर नेमीचंद जी की बेटी की शादी थी। हम तैयार हो रहे थे कि तभी पापा ने कहा, ' कोई ज्यादा संजधज नहीं करेगा और न ही किसी तरह का दिखावा होगा। ' हमें उनकी बात अजीब लगी।  आखिर शादी में बिना सजधज के कैसे जाया जाए? शादी  में पहुंचते ही नेमीचंद जी भावूक हो गए। उन्होंने तुरंत लोगों साहब आए हैं कुर्सी, मेज और प्लेट लेकर से कहा, बैठकर  বনলী वहां बाकी सभी मेहमान जमीन पर आओ। में भोजन कर रहे थे। पापा मुस्कराकर बोले, ' अरे नेमीचंद कोई जरूरत नहीं है। इतने दिनों बाद पत्तल में खाने इसकी  का मौका मिला है। ' यह कहकर वे जमीन पर बैठ गए। अपने अधिकारी को अपने बीच बैठा देखकर नेमीचंद जी की आंखें भर आईं। वापसी में पापा ने हमें समझाया, ' किसी की खुशियों में जाओ तो अपना पद, पैसा या हैसियत मत  दिखाओ। पहनावा और व्यवहार ऐसा हो कि सामने वाला को छोटा महसूस न करे। जिसके घर जाओ, उसके  खुसे बन जाओ। लोग हमारे कपड़, पद या रुतबा याद नहीं  रखते , लेकिन हमारा व्यवहार जिंदगी भर याद रखते हैं। पापा की यह सीख मेरे जीवन की सबसे कीमती विरासत बन गई। इस सीख ने न केवल जीवन के प्रति मेरी सोच " और नजरिये को बदला, बल्कि ये मेरे आचरण और * व्यवहार के आधार स्तम्भ बन गए। जयपुर, राजस्थान  खान मुजीब पिता की सीख... रुतबा  रखो नहीं, व्यवहार अच्छा पापा उच्च सरकारी पद पर थे। उनके ड्राइवर नेमीचंद जी की बेटी की शादी थी। हम तैयार हो रहे थे कि तभी पापा ने कहा, ' कोई ज्यादा संजधज नहीं करेगा और न ही किसी तरह का दिखावा होगा। ' हमें उनकी बात अजीब लगी।  आखिर शादी में बिना सजधज के कैसे जाया जाए? शादी  में पहुंचते ही नेमीचंद जी भावूक हो गए। उन्होंने तुरंत लोगों साहब आए हैं कुर्सी, मेज और प्लेट लेकर से कहा, बैठकर  বনলী वहां बाकी सभी मेहमान जमीन पर आओ। में भोजन कर रहे थे। पापा मुस्कराकर बोले, ' अरे नेमीचंद कोई जरूरत नहीं है। इतने दिनों बाद पत्तल में खाने इसकी  का मौका मिला है। ' यह कहकर वे जमीन पर बैठ गए। अपने अधिकारी को अपने बीच बैठा देखकर नेमीचंद जी की आंखें भर आईं। वापसी में पापा ने हमें समझाया, ' किसी की खुशियों में जाओ तो अपना पद, पैसा या हैसियत मत  दिखाओ। पहनावा और व्यवहार ऐसा हो कि सामने वाला को छोटा महसूस न करे। जिसके घर जाओ, उसके  खुसे बन जाओ। लोग हमारे कपड़, पद या रुतबा याद नहीं  रखते , लेकिन हमारा व्यवहार जिंदगी भर याद रखते हैं। पापा की यह सीख मेरे जीवन की सबसे कीमती विरासत बन गई। इस सीख ने न केवल जीवन के प्रति मेरी सोच " और नजरिये को बदला, बल्कि ये मेरे आचरण और * व्यवहार के आधार स्तम्भ बन गए। - ShareChat