sn vyas
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग_१३
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🥰 प्रारब्ध कहाँ अजमाना, पुरुषार्थ कहाँ करना। 🥰
आदमी को जीवनकाल दौरान अनेक चीजें प्राप्त करने की कामना होती है , और धन, स्त्री ,पुत्र ,मकान ,मोटर, कीर्ति, दान , ध्यान , मोक्ष ,धर्म आदि बहुत सी चीजें प्राप्त करने की उसकी इच्छाएं और कामनाएं होती है। यह तमाम इच्छाओं का शास्त्रों में मुख्य चार विभाग किया है।
*(1) धर्म*
*(2) अर्थ*
*(3) काम*
*(4)मोक्ष*
*उपरोक्त चार पदार्थ आदमी को प्राप्त करने चाहिए । धर्म से अर्थ की प्राप्ति करनी चाहिए । अधर्म से प्राप्त किया हुआ अर्थ अनर्थ बन जाता है।*
*धर्म और अर्थ से प्राप्त किए हुए काम से तृप्त होकर जीव को आखरी ध्येय मोक्ष प्राप्त करना चाहिए। इन चार पदार्थ में से धर्म और मोक्ष के लिए आदमी को सतत पुरुषार्थ करना चाहिए । उसको कभी प्रारब्ध के ऊपर छोड़ना ही नहीं ।*
*जब कि अर्थ और काम प्राप्त करने का आदमी को प्रारब्ध पर छोड़ देना चाहिए। उसके लिए पुरुषार्थ करने की आवश्यकता नहीं है। किंतु हम लोग उसको उल्टी दिशा में घूमते रहते हैं ।*
*अर्थ और काम प्रारब्ध के ऊपर छोड़ देने के बदले,, उसके लिए आदमी सतत रात-दिन पुरुषार्थ करता है और आखिर प्रारब्ध के आगे मंद हो जाता है । जबकि धर्म और मोक्ष के लिए आदमी को हमेशा सतर्क रहकर पुरुषार्थ करना चाहिए । किंतु उसको केवल प्रारब्ध पर छोड़ देते हैं। और इसलिए वह दोनों तरफ से उलझन में पड़ जाता है।*
*महाभारत में महर्षि व्यास ने कहा है कि----*
*दोनों हाथ ऊंचा करके मैं सारे जगत को चेतावनी दे रहा हूं,,, किन्तु कोई मेरी सुनता ही नहीं,,,, धर्म से ही अर्थ और काम की प्राप्ति होती है । तो उस धर्म का क्यों सेवन नहीं करते हो ? ,,,,*
*इतना एक सनातन सत्य मानव को कहने के लिए इतिहास का दृष्टांत के रूप में उपयोग करके महर्षि व्यास ने संपूर्ण महाभारत की रचना की है । तुम भाग्यवान हो तो उसको पढ़ लेना।*
क्रमशः ✍🏽
#कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ