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"2 फीट की दूरी पर खड़े होकर अपने देश के प्रधानमंत्री पर उंगली उठाकर सवाल पूछने के लिए पत्रकार के अंदर जितना साहस चाहिए, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है प्रधानमंत्री का लोकतंत्र में भरोसा होना चाहिए। कोई पत्रकार ऐसा करने की हिम्मत तभी दिखा पाएगा जब उसे पता हो कि सामने बैठा व्यक्तित्व आलोचनाओं को सुनने का धैर्य और लोकतंत्र पर अटूट भरोसा रखता है।" डॉ. मनमोहन सिंह का पूरा जीवन ही धैर्य और लोकतांत्रिक मर्यादा की एक मिसाल है। डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल का सबसे यादगार प्रेस कॉन्फ्रेंस का किस्सा सितंबर 2010 का है,उस समय उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लग रहे थे। पत्रकारों ने उनसे बेहद तीखे और सीधे सवाल पूछे थे। यहाँ तक कि कुछ पत्रकारों ने यह तक कह दिया था कि क्या आप एक "कमजोर प्रधानमंत्री" हैं? आमतौर पर नेता कठिन सवालों पर नाराज हो जाते हैं या प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ देते हैं। लेकिन डॉ. सिंह ने करीब 70 मिनट तक पत्रकारों के हर सवाल का जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था, "मैं अपनी जिम्मेदारियों से भागने वाला इंसान नहीं हूँ।" उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि लोकतंत्र में मीडिया का काम सवाल पूछना है और मेरा काम जवाब देना। उन्होंने कभी किसी पत्रकार को सवाल पूछने से नहीं रोका, चाहे वह सवाल कितना भी व्यक्तिगत क्यों न हो। जब उनसे पूछा गया कि लोग उन्हें 'मौन मोहन' कहते हैं, तो उन्होंने बहुत ही शांत भाव से जवाब दिया था, "मैं चाहता हूँ कि मेरा काम बोले, मेरी जुबान नहीं।" उन्होंने कभी किसी पत्रकार को सवाल पूछने से नहीं रोका, क्योंकि उनका मानना था कि लोकतंत्र में जनता के प्रति जवाबदेही ही प्रधानमंत्री का सबसे बड़ा धर्म है। 5 साल वित्त मंत्री और 10 साल प्रधानमंत्री रहते हुए देश की सेवा करने वाले स्वर्गीय मनमोहन सिंह जी को विनम्र श्रद्धांजलि! #TejashwiYadav #india #ManmohanSingh #Democracy #FreedomOfSpeech #Inspiration #IndianHistory #RJD #Socialmedia #✍️ जीवन में बदलाव #☝ मेरे विचार #✋कांग्रेस 🔵
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