#✋भगवान भैरव🌸
🏹 कर्ण और अर्जुन की दुश्मनी महाभारत काल की नहीं, बल्कि उससे भी युगों पुरानी थी! पद्मपुराण का यह रहस्य आपको चौंका देगा... 👇✨
महाभारत के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी— कर्ण और अर्जुन! हम सब द्वापर युग में इनके महासंग्राम से तो भली-भांति परिचित हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों की प्रतिस्पर्धा सीधे त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) से जुड़ी हुई है? पद्मपुराण में वर्णित इन दोनों के पूर्वजन्म की यह कथा वास्तव में अत्यंत आश्चर्यजनक है!
🔱 ब्रह्मा जी के पसीने से 'स्वेदजा' (कर्ण) का जन्म
कथा उस समय की है जब परमपिता ब्रह्मा जी पंचमुखी थे। उनके चार मुख वेदों का पाठ करते, किन्तु पांचवां मुख सदैव महादेव की निंदा करता था। रुष्ट होकर भगवान शिव ने उनका वह मुख काट दिया। इस युद्ध के श्रम और क्रोध के कारण ब्रह्मा जी के पसीने (स्वेद) से एक भयानक दैत्य उत्पन्न हुआ, जिसे जन्मजात 1000 दिव्य कवच प्राप्त थे। ब्रह्मा जी ने उसका नाम "स्वेदजा" रखा और उसे महादेव से युद्ध करने कैलाश भेज दिया।
🪷 श्रीहरि विष्णु के रक्त से 'रक्तजा' (अर्जुन) की उत्पत्ति
जब महादेव को स्वेदजा के आने का भान हुआ, तो उन्होंने भगवान विष्णु से इसका उपाय निकालने को कहा और स्वयं समाधि में चले गए। तब श्रीहरि ने अपने रक्त (खून) से एक शक्तिशाली असुर की उत्पत्ति की— "रक्तजा"। नारायण के आशीर्वाद से उसके 1000 हाथ थे और वह 500 दिव्य धनुषों का स्वामी था। श्रीहरि की आज्ञा पाकर रक्तजा ने स्वेदजा को कैलाश जाने से रोक दिया।
⚔️ स्वेदजा और रक्तजा का भयंकर महासंग्राम
ब्रह्मा और विष्णु के अंश से जन्मे दोनों अतुल बलशाली योद्धाओं के बीच कई वर्षों तक भीषण युद्ध चला। इस युद्ध में:
रक्तजा ने स्वेदजा के 999 कवच तोड़ डाले!
वहीं स्वेदजा ने रक्तजा के 998 हाथ काट दिए और उसके सभी 500 धनुष नष्ट कर दिए।
जब स्वेदजा के पास मात्र 1 कवच शेष बचा और रक्तजा निहत्था हो गया, तब श्रीहरि समझ गए कि रक्तजा अब पराजित हो जाएगा। उन्होंने बीच-बचाव कर युद्ध रुकवा दिया।
🌅 कर्ण और अर्जुन के रूप में पुनर्जन्म
रक्तजा को स्वेदजा को पराजित ना कर पाने का अत्यंत क्षोभ था। उसने अगले जन्म में स्वेदजा को हराने की प्रतिज्ञा की। तब श्रीहरि ने उसे वचन दिया कि अगले जन्म में वे स्वयं उसकी सहायता के लिए अवतार लेंगे। बाद में, भगवान शिव ने सूर्यदेव को स्वेदजा और देवराज इंद्र को रक्तजा के संरक्षण का दायित्व सौंपा।
द्वापर युग में:
🌞 सूर्यदेव के तेज से स्वेदजा ने 'कर्ण' के रूप में (अपने बचे हुए उसी 1 कवच के साथ) जन्म लिया।
⛈️ देवराज इंद्र के तेज से रक्तजा ने 'अर्जुन' के रूप में जन्म लिया।
🦚 और श्रीहरि विष्णु ने 'श्रीकृष्ण' के रूप में अवतार लिया।
अंततः भगवान श्रीकृष्ण की नीति और देवराज इंद्र के छल से कर्ण का वह अंतिम कवच दान में मांग लिया गया। और अर्जुन ने अपने पूर्वजन्म की प्रतिज्ञा पूरी करते हुए श्रीकृष्ण की सहायता से कर्ण पर विजय प्राप्त की!
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. 🪷।। राधे राधे ।।🪷
. !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
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