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#बलिदान दिवस #शहीद दिवस #🙏🏻माँ तुझे सलाम #🇮🇳 देशभक्ति #आज जिनकी पुण्यतिथि है
बलिदान दिवस - बॅलिदान तिथि #चदेभारत घे नामअज्ञात इतिहास के पन्नों मे कहा हे के महान  सेठ रामदास जी गुड़वाले - १८५७ कातिकारी टानवीर  जिन्हे फांसी पर चढ़ाने से पहले अंग्रेजों ने उनपर शिकारी कुत्ते  छोडे जिन्होने जीवित ही उनके शरीरको नोच खाया। सेठ रामदास जी गडवाला दिल्ली के अरबपति सेठ ओर बेकर थे॰ इनका जन्म दिल्ली र्मे एक अग्रवाल परिवार रमे हुआ था पहली कपड़ की मिल की स्थापना की इनके परिवारने टिल्ली थी। उनकी अमीरी की एक कहावत थी * रामदास जी गुड़वाले के  पास इतना सोना चाँदी जवाहरात हे॰की उनकी दीवारो सेवो गँगा जी का पानी भी रोक सकते हे १८५७ मे मेरठसे आरम्भ होकर काति की चिंगारी जव V दिल्ली पहुची तो दिल्ली से अंग्रेजों की हार के बाद अनेक रियासर्तों की भारतीय * सेनाओं ने दिल्ली मे डेरा डाल दिया। उनके भोजन और वेतन की रामजीदास गुड़वाले बादशाह के गहरे मित्र समस्या पेदा हो गड रामदास जी को बादशाह की यह अवस्था देखी नहीं गई। उन्होने हवाले कर दी ओर कह " अपनी करोड़ों की सम्पत्ति बादशाह दिया मातृभूमि की रक्षा होगी तो धन फिर कमा लिया जापेगा  रामजीदास ने केवल धन ही नहीं दिया सेनिरको को सत्तू आटा  अनाज यर्लों ऊँर्टों वघोडों केलिए चारे की य्यवस्था तक की। सेठ जी जिन्होने  तक केवल व्यापारही किया थाः सेना व अभी खफिया विभाग के संघठन का कार्यःभी प्रारंभ कर दिया उनकी अंगेज  संपठन की शक्ति को सेनापति भी हेरान हो गए सारे उत्तर भारत रमे उन्होने जासूर्सों काजाल बिछा दिया अनेक सेनिक छावनियों से गुप्त संपर्क किया।  उन्होने भीतरही भीतर एक शक्तिशाली सेना व गृप्तचर संघठन का निर्माण किया। देश के कोने कोने गुप्तचर भेजे व छोटे से छोटे मनसबदार ओर राजाओं से प्रार्थना की इस संकट काल मे सभी सॅगठित हो ओर देश को स्वतंत्र करवाए। जी की इस प्रकार की क्रांतिकारी गतिविधयिओं से रामदास अधिकारी बहुत परेशान होने लगे  अग्रेज़ शासन कुछ कारणों से दिल्ली पर अंग्रेजों का पुनः कब्जा होने लगा = एक दिन उन्होने चौँदनी चौक की दुकार्नों के आगे जगह जगह  जहर मिश्रित शराबकी बोतर्लों की पेटियों रखवा रदी, अंग्रेज सेना  उनसे प्यास बुझाती ओर वही लेट जाती अंग्रजों को समझ आ गया की भारत तो रामदास जी का अंत बहुत  शासन करना जरूरी  सेठ रामदास जी गुड़वाले को धोखे से  गया ओरजिस గారాకౌ  क्रूरता की मिसाल हे। तरह से मारा गया वो पहले उन्हे रस्सिर्यों से खम्बे रमे बौधा गया फिर उन पर शिकारी  कृत्ते छुड़वाए गए उसके बाद उन्हें उसी अधमरी अवस्था ्मे दिल्ली के चांदनी चौक की कोतवाली के सामने फांसी पर लटका दिया गया। सुप्रसिद्ध इतिहासकार ताराचंद ने अपनी पुस्तक हिस्ट्री ऑफ  फ्रीडम मूवर्मेंट मे लिखा हे  सेठ रामदास गुड़वाला उत्तर भारत कै सबसे धनी सेठ थे।अग्रेजों  के विचारसे उनके पास असंख्य मोती हीरे जवाहरात व अकूत संपत्ति थी।  सेठ रामदास जेसे अनेको कांतिकारी इतिहास के पर्नों से गुम हो गए वया सेठ रामदास जेसे कातिकारियों के बलिदान का ऋण चुका पाय?२२ नॅ समझो देश को आज़ादी यू ही मिली हे।  की कुछ खूनपी करही खिली हे। हरकली डस बाग मिट गये वतन के वासते दीवार्रो मेजो गडे ह की छातियों परही खड़े ह।।  সণনী আাতামী  क शहीदा  "Collecled  बॅलिदान तिथि #चदेभारत घे नामअज्ञात इतिहास के पन्नों मे कहा हे के महान  सेठ रामदास जी गुड़वाले - १८५७ कातिकारी टानवीर  जिन्हे फांसी पर चढ़ाने से पहले अंग्रेजों ने उनपर शिकारी कुत्ते  छोडे जिन्होने जीवित ही उनके शरीरको नोच खाया। सेठ रामदास जी गडवाला दिल्ली के अरबपति सेठ ओर बेकर थे॰ इनका जन्म दिल्ली र्मे एक अग्रवाल परिवार रमे हुआ था पहली कपड़ की मिल की स्थापना की इनके परिवारने टिल्ली थी। उनकी अमीरी की एक कहावत थी * रामदास जी गुड़वाले के  पास इतना सोना चाँदी जवाहरात हे॰की उनकी दीवारो सेवो गँगा जी का पानी भी रोक सकते हे १८५७ मे मेरठसे आरम्भ होकर काति की चिंगारी जव V दिल्ली पहुची तो दिल्ली से अंग्रेजों की हार के बाद अनेक रियासर्तों की भारतीय * सेनाओं ने दिल्ली मे डेरा डाल दिया। उनके भोजन और वेतन की रामजीदास गुड़वाले बादशाह के गहरे मित्र समस्या पेदा हो गड रामदास जी को बादशाह की यह अवस्था देखी नहीं गई। उन्होने हवाले कर दी ओर कह " अपनी करोड़ों की सम्पत्ति बादशाह दिया मातृभूमि की रक्षा होगी तो धन फिर कमा लिया जापेगा  रामजीदास ने केवल धन ही नहीं दिया सेनिरको को सत्तू आटा  अनाज यर्लों ऊँर्टों वघोडों केलिए चारे की य्यवस्था तक की। सेठ जी जिन्होने  तक केवल व्यापारही किया थाः सेना व अभी खफिया विभाग के संघठन का कार्यःभी प्रारंभ कर दिया उनकी अंगेज  संपठन की शक्ति को सेनापति भी हेरान हो गए सारे उत्तर भारत रमे उन्होने जासूर्सों काजाल बिछा दिया अनेक सेनिक छावनियों से गुप्त संपर्क किया।  उन्होने भीतरही भीतर एक शक्तिशाली सेना व गृप्तचर संघठन का निर्माण किया। देश के कोने कोने गुप्तचर भेजे व छोटे से छोटे मनसबदार ओर राजाओं से प्रार्थना की इस संकट काल मे सभी सॅगठित हो ओर देश को स्वतंत्र करवाए। जी की इस प्रकार की क्रांतिकारी गतिविधयिओं से रामदास अधिकारी बहुत परेशान होने लगे  अग्रेज़ शासन कुछ कारणों से दिल्ली पर अंग्रेजों का पुनः कब्जा होने लगा = एक दिन उन्होने चौँदनी चौक की दुकार्नों के आगे जगह जगह  जहर मिश्रित शराबकी बोतर्लों की पेटियों रखवा रदी, अंग्रेज सेना  उनसे प्यास बुझाती ओर वही लेट जाती अंग्रजों को समझ आ गया की भारत तो रामदास जी का अंत बहुत  शासन करना जरूरी  सेठ रामदास जी गुड़वाले को धोखे से  गया ओरजिस గారాకౌ  क्रूरता की मिसाल हे। तरह से मारा गया वो पहले उन्हे रस्सिर्यों से खम्बे रमे बौधा गया फिर उन पर शिकारी  कृत्ते छुड़वाए गए उसके बाद उन्हें उसी अधमरी अवस्था ्मे दिल्ली के चांदनी चौक की कोतवाली के सामने फांसी पर लटका दिया गया। सुप्रसिद्ध इतिहासकार ताराचंद ने अपनी पुस्तक हिस्ट्री ऑफ  फ्रीडम मूवर्मेंट मे लिखा हे  सेठ रामदास गुड़वाला उत्तर भारत कै सबसे धनी सेठ थे।अग्रेजों  के विचारसे उनके पास असंख्य मोती हीरे जवाहरात व अकूत संपत्ति थी।  सेठ रामदास जेसे अनेको कांतिकारी इतिहास के पर्नों से गुम हो गए वया सेठ रामदास जेसे कातिकारियों के बलिदान का ऋण चुका पाय?२२ नॅ समझो देश को आज़ादी यू ही मिली हे।  की कुछ खूनपी करही खिली हे। हरकली डस बाग मिट गये वतन के वासते दीवार्रो मेजो गडे ह की छातियों परही खड़े ह।।  সণনী আাতামী  क शहीदा  "Collecled - 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