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#आज जिनकी पुण्यतिथि है
आज जिनकी पुण्यतिथि है - आज जिनकी पुण्यतिथि है श्रद्धासुमन गोविंद शास्त्री (निधनः २६ जृून) १९६१  दुगवेकर  गोविंद शास्त्री  हिन्दी भाषा ओर साहित्य के अनन्य  दुगवेकर  प्रतिभा सम्पन्न कृतिकार थे। भारतेंदु  सेवक तथा  बहुमुखी नाटक मण्डली के रूप में शास्त्र शुद्ध हिन्दी रंगमच की सर्वप्रथम स्थापना में गोविंद शास्त्री जी का प्रमुख हाथ था। गोविंद सन १९०१ ई॰ के आसःपास काशी चले आयेथे ओर जीवन के शेष ६० वर्षो में अधिकांशतः काशी में ही रहकर  साहित्य साधना की।ये ब्रजभाषा तथा खड़ीबोली में बड़ी ही २६ जून २०२५ उत्कृष्ट कविता करते थे। बाल साहित्य के अभाव की पूर्ति এবংঝ जाने मानें हस्यकवि के लिए गोविंद शास्त्री ने चित्र कथा के रूप मे बहुत सी॰ पदाश्री डॉ. सुरेन्द दुबे का कल हुआ निधन कहानियाँ भी लिखी हे।  उनका ACI में इलाज के दारान हृदय घात   से मृत्यु अमरगीरवामी साहित्यकार 726 एकनाथ सोलकर २६ जून २००५ यश जोहर फिल्म निर्माता २६ जून २००४ Adoor Pankajam [925- June 20,2010)Actress आज जिनकी पुण्यतिथि है श्रद्धासुमन गोविंद शास्त्री (निधनः २६ जृून) १९६१  दुगवेकर  गोविंद शास्त्री  हिन्दी भाषा ओर साहित्य के अनन्य  दुगवेकर  प्रतिभा सम्पन्न कृतिकार थे। भारतेंदु  सेवक तथा  बहुमुखी नाटक मण्डली के रूप में शास्त्र शुद्ध हिन्दी रंगमच की सर्वप्रथम स्थापना में गोविंद शास्त्री जी का प्रमुख हाथ था। गोविंद सन १९०१ ई॰ के आसःपास काशी चले आयेथे ओर जीवन के शेष ६० वर्षो में अधिकांशतः काशी में ही रहकर  साहित्य साधना की।ये ब्रजभाषा तथा खड़ीबोली में बड़ी ही २६ जून २०२५ उत्कृष्ट कविता करते थे। बाल साहित्य के अभाव की पूर्ति এবংঝ जाने मानें हस्यकवि के लिए गोविंद शास्त्री ने चित्र कथा के रूप मे बहुत सी॰ पदाश्री डॉ. सुरेन्द दुबे का कल हुआ निधन कहानियाँ भी लिखी हे।  उनका ACI में इलाज के दारान हृदय घात   से मृत्यु अमरगीरवामी साहित्यकार 726 एकनाथ सोलकर २६ जून २००५ यश जोहर फिल्म निर्माता २६ जून २००४ Adoor Pankajam [925- June 20,2010)Actress - ShareChat
#आज जिनकी पुण्यतिथि है
आज जिनकी पुण्यतिथि है - आज जिनकी पुण्यतिथि है श्रद्धासुमन मुखोपाध्याय किसान आंदोलन के d1 संगीतकार मसीहा 25 ভূন 2009 वामपंथी राष्ट्रवाद के सिद्धांतकार स्वामी सहजानंद २५ जून १९५० सरस्वती स्वामी सत्यमित्रानंदगिरि भारत माता मंदिर के संस्थापक शिवचरण माथुर २५ जून २०१9 मु मंत्री राजस्थान २५ जूत २००९ आज जिनकी पुण्यतिथि है श्रद्धासुमन मुखोपाध्याय किसान आंदोलन के d1 संगीतकार मसीहा 25 ভূন 2009 वामपंथी राष्ट्रवाद के सिद्धांतकार स्वामी सहजानंद २५ जून १९५० सरस्वती स्वामी सत्यमित्रानंदगिरि भारत माता मंदिर के संस्थापक शिवचरण माथुर २५ जून २०१9 मु मंत्री राजस्थान २५ जूत २००९ - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #बलिदान दिवस #शहीद दिवस #🙏🏻माँ तुझे सलाम #आज जिनकी पुण्यतिथि है
🇮🇳 देशभक्ति - २५ जून, १९८९ को मोगा में राष्ट्रीय स्वयं मोगा नरसंहार सेवक संघ शाखा में आतंकी हमला हुआ था जिसमें २५ 3k & स्वयंसेवकों का हुआ था बलिदान, माँ भार. সীঠাা নহসম্ভায কর 3াসয বলিনানী बलिदानी २५ जून, १९८९ को मोगा में समनचाररकरत mu eಬi राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  की शाखा में हुआ था आतंकी हमला जिसमें २५ स्वयंसेवकों का बलिदान हुआ था २५ जून, १९८९ को मोगा में राष्ट्रीय स्वयं मोगा नरसंहार सेवक संघ शाखा में आतंकी हमला हुआ था जिसमें २५ 3k & स्वयंसेवकों का हुआ था बलिदान, माँ भार. সীঠাা নহসম্ভায কর 3াসয বলিনানী बलिदानी २५ जून, १९८९ को मोगा में समनचाररकरत mu eಬi राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  की शाखा में हुआ था आतंकी हमला जिसमें २५ स्वयंसेवकों का बलिदान हुआ था - ShareChat
#बलिदान दिवस #शहीद दिवस #🙏🏻माँ तुझे सलाम #🇮🇳 देशभक्ति #आज जिनकी पुण्यतिथि है
बलिदान दिवस - बॅलिदान तिथि #चदेभारत घे नामअज्ञात इतिहास के पन्नों मे कहा हे के महान  सेठ रामदास जी गुड़वाले - १८५७ कातिकारी टानवीर  जिन्हे फांसी पर चढ़ाने से पहले अंग्रेजों ने उनपर शिकारी कुत्ते  छोडे जिन्होने जीवित ही उनके शरीरको नोच खाया। सेठ रामदास जी गडवाला दिल्ली के अरबपति सेठ ओर बेकर थे॰ इनका जन्म दिल्ली र्मे एक अग्रवाल परिवार रमे हुआ था पहली कपड़ की मिल की स्थापना की इनके परिवारने टिल्ली थी। उनकी अमीरी की एक कहावत थी * रामदास जी गुड़वाले के  पास इतना सोना चाँदी जवाहरात हे॰की उनकी दीवारो सेवो गँगा जी का पानी भी रोक सकते हे १८५७ मे मेरठसे आरम्भ होकर काति की चिंगारी जव V दिल्ली पहुची तो दिल्ली से अंग्रेजों की हार के बाद अनेक रियासर्तों की भारतीय * सेनाओं ने दिल्ली मे डेरा डाल दिया। उनके भोजन और वेतन की रामजीदास गुड़वाले बादशाह के गहरे मित्र समस्या पेदा हो गड रामदास जी को बादशाह की यह अवस्था देखी नहीं गई। उन्होने हवाले कर दी ओर कह " अपनी करोड़ों की सम्पत्ति बादशाह दिया मातृभूमि की रक्षा होगी तो धन फिर कमा लिया जापेगा  रामजीदास ने केवल धन ही नहीं दिया सेनिरको को सत्तू आटा  अनाज यर्लों ऊँर्टों वघोडों केलिए चारे की य्यवस्था तक की। सेठ जी जिन्होने  तक केवल व्यापारही किया थाः सेना व अभी खफिया विभाग के संघठन का कार्यःभी प्रारंभ कर दिया उनकी अंगेज  संपठन की शक्ति को सेनापति भी हेरान हो गए सारे उत्तर भारत रमे उन्होने जासूर्सों काजाल बिछा दिया अनेक सेनिक छावनियों से गुप्त संपर्क किया।  उन्होने भीतरही भीतर एक शक्तिशाली सेना व गृप्तचर संघठन का निर्माण किया। देश के कोने कोने गुप्तचर भेजे व छोटे से छोटे मनसबदार ओर राजाओं से प्रार्थना की इस संकट काल मे सभी सॅगठित हो ओर देश को स्वतंत्र करवाए। जी की इस प्रकार की क्रांतिकारी गतिविधयिओं से रामदास अधिकारी बहुत परेशान होने लगे  अग्रेज़ शासन कुछ कारणों से दिल्ली पर अंग्रेजों का पुनः कब्जा होने लगा = एक दिन उन्होने चौँदनी चौक की दुकार्नों के आगे जगह जगह  जहर मिश्रित शराबकी बोतर्लों की पेटियों रखवा रदी, अंग्रेज सेना  उनसे प्यास बुझाती ओर वही लेट जाती अंग्रजों को समझ आ गया की भारत तो रामदास जी का अंत बहुत  शासन करना जरूरी  सेठ रामदास जी गुड़वाले को धोखे से  गया ओरजिस గారాకౌ  क्रूरता की मिसाल हे। तरह से मारा गया वो पहले उन्हे रस्सिर्यों से खम्बे रमे बौधा गया फिर उन पर शिकारी  कृत्ते छुड़वाए गए उसके बाद उन्हें उसी अधमरी अवस्था ्मे दिल्ली के चांदनी चौक की कोतवाली के सामने फांसी पर लटका दिया गया। सुप्रसिद्ध इतिहासकार ताराचंद ने अपनी पुस्तक हिस्ट्री ऑफ  फ्रीडम मूवर्मेंट मे लिखा हे  सेठ रामदास गुड़वाला उत्तर भारत कै सबसे धनी सेठ थे।अग्रेजों  के विचारसे उनके पास असंख्य मोती हीरे जवाहरात व अकूत संपत्ति थी।  सेठ रामदास जेसे अनेको कांतिकारी इतिहास के पर्नों से गुम हो गए वया सेठ रामदास जेसे कातिकारियों के बलिदान का ऋण चुका पाय?२२ नॅ समझो देश को आज़ादी यू ही मिली हे।  की कुछ खूनपी करही खिली हे। हरकली डस बाग मिट गये वतन के वासते दीवार्रो मेजो गडे ह की छातियों परही खड़े ह।।  সণনী আাতামী  क शहीदा  "Collecled  बॅलिदान तिथि #चदेभारत घे नामअज्ञात इतिहास के पन्नों मे कहा हे के महान  सेठ रामदास जी गुड़वाले - १८५७ कातिकारी टानवीर  जिन्हे फांसी पर चढ़ाने से पहले अंग्रेजों ने उनपर शिकारी कुत्ते  छोडे जिन्होने जीवित ही उनके शरीरको नोच खाया। सेठ रामदास जी गडवाला दिल्ली के अरबपति सेठ ओर बेकर थे॰ इनका जन्म दिल्ली र्मे एक अग्रवाल परिवार रमे हुआ था पहली कपड़ की मिल की स्थापना की इनके परिवारने टिल्ली थी। उनकी अमीरी की एक कहावत थी * रामदास जी गुड़वाले के  पास इतना सोना चाँदी जवाहरात हे॰की उनकी दीवारो सेवो गँगा जी का पानी भी रोक सकते हे १८५७ मे मेरठसे आरम्भ होकर काति की चिंगारी जव V दिल्ली पहुची तो दिल्ली से अंग्रेजों की हार के बाद अनेक रियासर्तों की भारतीय * सेनाओं ने दिल्ली मे डेरा डाल दिया। उनके भोजन और वेतन की रामजीदास गुड़वाले बादशाह के गहरे मित्र समस्या पेदा हो गड रामदास जी को बादशाह की यह अवस्था देखी नहीं गई। उन्होने हवाले कर दी ओर कह " अपनी करोड़ों की सम्पत्ति बादशाह दिया मातृभूमि की रक्षा होगी तो धन फिर कमा लिया जापेगा  रामजीदास ने केवल धन ही नहीं दिया सेनिरको को सत्तू आटा  अनाज यर्लों ऊँर्टों वघोडों केलिए चारे की य्यवस्था तक की। सेठ जी जिन्होने  तक केवल व्यापारही किया थाः सेना व अभी खफिया विभाग के संघठन का कार्यःभी प्रारंभ कर दिया उनकी अंगेज  संपठन की शक्ति को सेनापति भी हेरान हो गए सारे उत्तर भारत रमे उन्होने जासूर्सों काजाल बिछा दिया अनेक सेनिक छावनियों से गुप्त संपर्क किया।  उन्होने भीतरही भीतर एक शक्तिशाली सेना व गृप्तचर संघठन का निर्माण किया। देश के कोने कोने गुप्तचर भेजे व छोटे से छोटे मनसबदार ओर राजाओं से प्रार्थना की इस संकट काल मे सभी सॅगठित हो ओर देश को स्वतंत्र करवाए। जी की इस प्रकार की क्रांतिकारी गतिविधयिओं से रामदास अधिकारी बहुत परेशान होने लगे  अग्रेज़ शासन कुछ कारणों से दिल्ली पर अंग्रेजों का पुनः कब्जा होने लगा = एक दिन उन्होने चौँदनी चौक की दुकार्नों के आगे जगह जगह  जहर मिश्रित शराबकी बोतर्लों की पेटियों रखवा रदी, अंग्रेज सेना  उनसे प्यास बुझाती ओर वही लेट जाती अंग्रजों को समझ आ गया की भारत तो रामदास जी का अंत बहुत  शासन करना जरूरी  सेठ रामदास जी गुड़वाले को धोखे से  गया ओरजिस గారాకౌ  क्रूरता की मिसाल हे। तरह से मारा गया वो पहले उन्हे रस्सिर्यों से खम्बे रमे बौधा गया फिर उन पर शिकारी  कृत्ते छुड़वाए गए उसके बाद उन्हें उसी अधमरी अवस्था ्मे दिल्ली के चांदनी चौक की कोतवाली के सामने फांसी पर लटका दिया गया। सुप्रसिद्ध इतिहासकार ताराचंद ने अपनी पुस्तक हिस्ट्री ऑफ  फ्रीडम मूवर्मेंट मे लिखा हे  सेठ रामदास गुड़वाला उत्तर भारत कै सबसे धनी सेठ थे।अग्रेजों  के विचारसे उनके पास असंख्य मोती हीरे जवाहरात व अकूत संपत्ति थी।  सेठ रामदास जेसे अनेको कांतिकारी इतिहास के पर्नों से गुम हो गए वया सेठ रामदास जेसे कातिकारियों के बलिदान का ऋण चुका पाय?२२ नॅ समझो देश को आज़ादी यू ही मिली हे।  की कुछ खूनपी करही खिली हे। हरकली डस बाग मिट गये वतन के वासते दीवार्रो मेजो गडे ह की छातियों परही खड़े ह।।  সণনী আাতামী  क शहीदा  "Collecled - 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#बलिदान दिवस #शहीद दिवस #🙏🏻माँ तुझे सलाम #🇮🇳 देशभक्ति #आज जिनकी पुण्यतिथि है
बलिदान दिवस - ShareChat
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बलिदान दिवस - को अपने हरम में लाना चाहता था अकबर। रानी दुर्गावती ऐसे थे अकबर महान!लानत है इतिहासकारों पर। आज जिनका बलिदान दिवस है शतन्शत नमन वीरगति २४ जून 1 ५६४ रानी दुम ।विती तथाकथित महान् मुग़ल शासक अकबर भी राज्य को जीतकर रानी को अपने हरम में डालना 24 న1564 चाहता था। उसने विवाद प्रारम्भ करने हेतु रानी के प्रिय सफेद हाथी (सरमन) और उनके विश्वस्त वजीर आधारसिंह को भेंट के रूप में अपने पास भेजने को कहा। रानी ने यह मांग ठुकरा दी। डस्  पर अकबर ने अपने एक रिश्तेदार आसफ़ ख़ाँ के नेतृत्व " में गोंडवाना पर हमला कर दिया। एक बार तो आसफ़ ख़ाँ पराजित हुआ, पर अगली बार उसने दोगुनी सेना और तैयारी के साथ हमला  दूर्गवन्ही दरअसल, इस देश की आन॰ बान और शान बोला। के पास उस समय बहुत कम उन्होंने जबलपुर के पास 'नरई नाले' के सैनिक की रक्षा का इतिहास अनेक वीर के सपूतों में युद्ध किनारे मोर्चा लगाया तथा स्वयं पुरुष वेश " खून से लिखा गया है। बलिदानों की লনী इसी ননূল किया। का फेहरिस्त में एक नाम आता है रानी दुर्गावती इस युद्ध में ३,००० मुग़ल सैनिक मारे गये का (Rani Durgavati)l जिनका जन्म 5 लेकिन रानी की भी अपार क्षति हुई थी। अगले अक्टूबर, १५२४ को चंदेल राजा कीर्तिसिंह दिन २४ जून, १५६४ को मुग़ल सेना ने फिर हमला शालिवाहन के घर हुआ। वो कीर्तिसिंह की बोला। आज रानी का पक्ष दर्बल था, अतः रानी ने एकलौती पुत्री थीं। उनके पिता उन्हें प्यार से अपने पुत्र नारायण को सुरक्षित स्थान पर भेज  जब बहुत छोटी थीं दिया। तभी एक तीर उनकी भुजा में लगा, रानी ने दुर्गावती  थे। ர बुलाते उसे निकाल फेंका।  तीर ने उनकी आंख को तभी   इनकी स्वर्गवास होगया। !=# माता @ कीर्तिसिंह  बेध दिया, रानी  भी निकाला पर उसकी जिसके कारण इनके पिता राजा ন नोक आंख में ही रह गयी। तभी तीसरातीर रानी की ही किया। ললন-এালন इनका गर्दन में आकर धंस गया। को अपने हरम में लाना चाहता था अकबर। रानी दुर्गावती ऐसे थे अकबर महान!लानत है इतिहासकारों पर। आज जिनका बलिदान दिवस है शतन्शत नमन वीरगति २४ जून 1 ५६४ रानी दुम ।विती तथाकथित महान् मुग़ल शासक अकबर भी राज्य को जीतकर रानी को अपने हरम में डालना 24 న1564 चाहता था। उसने विवाद प्रारम्भ करने हेतु रानी के प्रिय सफेद हाथी (सरमन) और उनके विश्वस्त वजीर आधारसिंह को भेंट के रूप में अपने पास भेजने को कहा। रानी ने यह मांग ठुकरा दी। डस्  पर अकबर ने अपने एक रिश्तेदार आसफ़ ख़ाँ के नेतृत्व " में गोंडवाना पर हमला कर दिया। एक बार तो आसफ़ ख़ाँ पराजित हुआ, पर अगली बार उसने दोगुनी सेना और तैयारी के साथ हमला  दूर्गवन्ही दरअसल, इस देश की आन॰ बान और शान बोला। के पास उस समय बहुत कम उन्होंने जबलपुर के पास 'नरई नाले' के सैनिक की रक्षा का इतिहास अनेक वीर के सपूतों में युद्ध किनारे मोर्चा लगाया तथा स्वयं पुरुष वेश " खून से लिखा गया है। बलिदानों की লনী इसी ননূল किया। का फेहरिस्त में एक नाम आता है रानी दुर्गावती इस युद्ध में ३,००० मुग़ल सैनिक मारे गये का (Rani Durgavati)l जिनका जन्म 5 लेकिन रानी की भी अपार क्षति हुई थी। अगले अक्टूबर, १५२४ को चंदेल राजा कीर्तिसिंह दिन २४ जून, १५६४ को मुग़ल सेना ने फिर हमला शालिवाहन के घर हुआ। वो कीर्तिसिंह की बोला। आज रानी का पक्ष दर्बल था, अतः रानी ने एकलौती पुत्री थीं। उनके पिता उन्हें प्यार से अपने पुत्र नारायण को सुरक्षित स्थान पर भेज  जब बहुत छोटी थीं दिया। तभी एक तीर उनकी भुजा में लगा, रानी ने दुर्गावती  थे। ர बुलाते उसे निकाल फेंका।  तीर ने उनकी आंख को तभी   इनकी स्वर्गवास होगया। !=# माता @ कीर्तिसिंह  बेध दिया, रानी  भी निकाला पर उसकी जिसके कारण इनके पिता राजा ন नोक आंख में ही रह गयी। तभी तीसरातीर रानी की ही किया। ললন-এালন इनका गर्दन में आकर धंस गया। - ShareChat
#आज जिनकी पुण्यतिथि है
आज जिनकी पुण्यतिथि है - आज जिनकी पुण्यतिथि है श्रद्धासुमन मल्लिका अर्जुन राव H अभिनेता 2008 २४ जूत 5 c श्रद्धा राम फिल्लौरी 24 তুন 1881 आपुनिक राजस्यान क प्रणता, एक कृशल शासक महाराजा स्व॰श्रीसवाई मानसिंह जीदवितीय  मदनलाल सेनी  राजस्थान की प्रुण्प तिथी पर  २४ जून २०१९ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष शतशतनमन 24 71970 आज जिनकी पुण्यतिथि है श्रद्धासुमन मल्लिका अर्जुन राव H अभिनेता 2008 २४ जूत 5 c श्रद्धा राम फिल्लौरी 24 তুন 1881 आपुनिक राजस्यान क प्रणता, एक कृशल शासक महाराजा स्व॰श्रीसवाई मानसिंह जीदवितीय  मदनलाल सेनी  राजस्थान की प्रुण्प तिथी पर  २४ जून २०१९ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष शतशतनमन 24 71970 - ShareChat
#आज जिनकी पुण्यतिथि है
आज जिनकी पुण्यतिथि है - आज जिनकी पुण्य तिथि है श्रद्धासुमन Y3m3 :uwvnh 23 N4 0 24 पर्वीरनारापण शिल्ल 010 2336197 अक्ति विनोद ठाकुर २३ जून १९१४ n Chae - n 00000 आज जिनकी पुण्य तिथि है श्रद्धासुमन Y3m3 :uwvnh 23 N4 0 24 पर्वीरनारापण शिल्ल 010 2336197 अक्ति विनोद ठाकुर २३ जून १९१४ n Chae - n 00000 - ShareChat
#आज जिनकी पुण्यतिथि है
आज जिनकी पुण्यतिथि है - आज जिनकी पुण्य तिथि है श्रद्धासुमन गंगाप्रसाद वर्मा (जन्म॰ १३ अगस्त १८६३  मृत्युः २३ जून १९१४) सन १८८५ मे काग्रेस  ७० चर्ष बाद मुखनी प्रथम स्थापना अधिवेशन मुम्बईरमे उत्तर प्रदेश  के सपने को साकार किया मोदी र भाग लेने वाले मुख्य प्रतिनिधि थे। उनके पर  राष्टीय एकता के परातल पर४ स्वामी रामतीर्थ का बहुत प्रभाव था। उन्होने  Rolo) भविष्य की गीव रखीना सकती 01 १८८३ मे एडवोकेट नामक द्वि साप्ताहिक पः शिआाचिद एय चिन्नप    का सम्पादन करके अपना सार्वजनिक जीवन जी मुखजी श्यामा प्रसाद यलिदान दिवस २३ जून १९५३ किया m77 M aaMR राष्ट्रपति जून १९८० 23 ಞpa _3_17_ M0 MSmo 2396 1939 आज जिनकी पुण्य तिथि है श्रद्धासुमन गंगाप्रसाद वर्मा (जन्म॰ १३ अगस्त १८६३  मृत्युः २३ जून १९१४) सन १८८५ मे काग्रेस  ७० चर्ष बाद मुखनी प्रथम स्थापना अधिवेशन मुम्बईरमे उत्तर प्रदेश  के सपने को साकार किया मोदी र भाग लेने वाले मुख्य प्रतिनिधि थे। उनके पर  राष्टीय एकता के परातल पर४ स्वामी रामतीर्थ का बहुत प्रभाव था। उन्होने  Rolo) भविष्य की गीव रखीना सकती 01 १८८३ मे एडवोकेट नामक द्वि साप्ताहिक पः शिआाचिद एय चिन्नप    का सम्पादन करके अपना सार्वजनिक जीवन जी मुखजी श्यामा प्रसाद यलिदान दिवस २३ जून १९५३ किया m77 M aaMR राष्ट्रपति जून १९८० 23 ಞpa _3_17_ M0 MSmo 2396 1939 - ShareChat
#इतिहास स्मृति
इतिहास स्मृति - हम इतिहास से कुछ सीखू लें| २३ 7 स्मृति दुखद 1757 २) १८२७ : रॉबट कैँलाइव कै नेतृत्व में अंग्रेज सेना एवं बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के मध्य प्रारम्भ व शीघ्र ही ४० मिनट में समाप्त | सलैद् ज़रुद्दीला व की १८,००० की सेना, अंग्रेजों की मात्र ३०० की सेना के सम्मुख देशद्रोही मीर जाफर के जानबूझकर आत्मसमर्पण कारण हार गई | भारत पर अंग्रेजों का शासन प्रारम्भ हो गया रॉबर्ट क्लाईव ने अपनी डायरी में लिखा है की "जब हम लोग गद्दारी से जीतकर मुर्शिदाबाद की ओर स्थानीय निवासी २ किलोमीटर तक बढ रहे थे [ೆ सड़क के दोनों किनारे खड़े होकर हमारे स्वागत में जय जयकार कर रहे थे | उन लोगों ने यदि एक एक पत्थर भी उठाकर हमें मारा होता तो हम सब वहीं पर तुरंत मारे गए होते एवं फिर भारत को गुलाम बनाना अत्यंत कठिन हो जाता | हम इतिहास से कुछ सीखू लें| २३ 7 स्मृति दुखद 1757 २) १८२७ : रॉबट कैँलाइव कै नेतृत्व में अंग्रेज सेना एवं बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के मध्य प्रारम्भ व शीघ्र ही ४० मिनट में समाप्त | सलैद् ज़रुद्दीला व की १८,००० की सेना, अंग्रेजों की मात्र ३०० की सेना के सम्मुख देशद्रोही मीर जाफर के जानबूझकर आत्मसमर्पण कारण हार गई | भारत पर अंग्रेजों का शासन प्रारम्भ हो गया रॉबर्ट क्लाईव ने अपनी डायरी में लिखा है की "जब हम लोग गद्दारी से जीतकर मुर्शिदाबाद की ओर स्थानीय निवासी २ किलोमीटर तक बढ रहे थे [ೆ सड़क के दोनों किनारे खड़े होकर हमारे स्वागत में जय जयकार कर रहे थे | उन लोगों ने यदि एक एक पत्थर भी उठाकर हमें मारा होता तो हम सब वहीं पर तुरंत मारे गए होते एवं फिर भारत को गुलाम बनाना अत्यंत कठिन हो जाता | - ShareChat