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#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - कबीर कबीर रेख सिंदूर की, काजल दिया न जाय | नैनू रमैया रमि रहा, दूजा कहाँ समाय Il अर्थः कबीर कहते हैं कि आँखों में जब प्रियतम (ईश्वर) बस गए हैं, तो वहाँ किसी और के लिए जगह नहीं बची। जैसे सिंदूर की रेखा वाली जगह पर काजल नहीं लगाया जा सकता , वैसे ही सच्चे प्रेम में कोई दूसरा विचार नहीं आता।  कबीर कबीर रेख सिंदूर की, काजल दिया न जाय | नैनू रमैया रमि रहा, दूजा कहाँ समाय Il अर्थः कबीर कहते हैं कि आँखों में जब प्रियतम (ईश्वर) बस गए हैं, तो वहाँ किसी और के लिए जगह नहीं बची। जैसे सिंदूर की रेखा वाली जगह पर काजल नहीं लगाया जा सकता , वैसे ही सच्चे प्रेम में कोई दूसरा विचार नहीं आता। - ShareChat