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##bhakti #शांति #मन_की_शांति
#bhakti - जब हम अपने गुरुजनों या भगवान के प्रति अपमान की भावना रखने लगते हैं, तो धीरेन्धीरे हमारा मन और विचार उसी दिशा में बहने लगते हैं। ऐसी स्थिति में हमारी बुद्धि और विवेक  कमजोर होने लगता है और हम सहीन्गलत के बीच का अंतर भी स्पष्ट रूप से नहीं समझ पाते। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति आसक्ति, नकारत्मक सोच और गलत आचरण की ओर बढ़ सकता है। उसके विचार और कर्म उसी दिशा में केंद्रित होने लगते हैं, जिससे जीवन की संत्ुलित दिशा प्रभावित होती है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपने गुरुजनों का सम्मान करें और ईश्वर के प्रति श्रद्धा बनाए खखें, ताकि हमारा मन स्थिर रहे और हम सही मार्ग पर चलते रहें। जब हम अपने गुरुजनों या भगवान के प्रति अपमान की भावना रखने लगते हैं, तो धीरेन्धीरे हमारा मन और विचार उसी दिशा में बहने लगते हैं। ऐसी स्थिति में हमारी बुद्धि और विवेक  कमजोर होने लगता है और हम सहीन्गलत के बीच का अंतर भी स्पष्ट रूप से नहीं समझ पाते। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति आसक्ति, नकारत्मक सोच और गलत आचरण की ओर बढ़ सकता है। उसके विचार और कर्म उसी दिशा में केंद्रित होने लगते हैं, जिससे जीवन की संत्ुलित दिशा प्रभावित होती है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपने गुरुजनों का सम्मान करें और ईश्वर के प्रति श्रद्धा बनाए खखें, ताकि हमारा मन स्थिर रहे और हम सही मार्ग पर चलते रहें। - ShareChat