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------वैदेही ----- प्रेम में अनुराग की तुम अनुगामिनी हो, स्त्री में वैराग्य की तुम ही स्वामिनी हो। तुम ही धरा, कर रही क्षितिज का विस्तार हो, मेरे हृदय में बस रही श्रद्धा का हर सार हो। तुमने बताया कैसे स्वयं का स्वयं में सम्मान हो, गरिमा चरित्र में बताती तुम सबसे महान हो। जनक की लाडली, मिथिला का गौरव तुम्हीं हो, त्याग के शिखर की तुम ही प्रथम किरण हो। अग्नि की शुचता में तुम धैर्य का पर्याय हो, तुम ही मर्यादा राम की, तुम ही विजय व न्याय हो। #❣️Love you ज़िंदगी ❣️ #जय श्रीकृष्ण #राधे-राधे #💓 मोहब्बत दिल से #🌙 गुड नाईट
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