सुदामा_कृष्णजीके_भक्त_नहींथे
दुनिया जिसे 'मित्रता और भक्ति' का उदाहरण कहती है, वह केवल एक दंतकथा है।
सुदामा जी तो कृष्ण जी के चरित्र से ही असंतुष्ट थे, इसलिए वे जीवन भर द्वारका जाने से बचते रहे।
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