सुशील मेहता
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विश्व अस्थमा दिवस प्रतिवर्ष मई माह के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस के रूप में मनाया जाता है। लोगों तक अस्थमा से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाने एवं बीमारी के प्रति उन्हें जागरूक करने के लिए संपूर्ण विश्व में इस दिन का आयोजन होता है। अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जो कि फेफड़ों पर आक्रमण कर श्वसन प्रणाली को प्रभावित करती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों की सहायता करना भी इस दिन का मकसद है। अस्थमा के लक्षणों में मुख्य रूप से सांस लेने में कठिनाई होने लगती है क्योंकि श्वास नलियों में सूजन आने के कारण श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। इसके अलावा खांसी, घबघराहट तथा सीने में जकड़न व भारीपन होना, फेफड़ों में लंबे समय तक कफ जमे रहना, नाड़ी गति का बढ़ जाना, सांस लेते समय सीटी की आवाज का आना आदि भी अस्थमा के लक्षण हैं। विश्व अस्थमा दिवस की शुरुआत 1993 में ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से की गई थी। 1998 में इस दिन का आयोजन 35 से अधिक देशों में किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिन को महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य दिवसों में से एक माना जाता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया था कि वैश्विक स्तर पर 339 मिलियन से अधिक लोगों को अस्थमा था और 2016 में वैश्विक स्तर पर अस्थमा के कारण 417,918 मौतें हुई थीं। #जागरूकता दिवस
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