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🌹 🌷 ।। श्री ।। 🌷 🌹
*जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम । राम राम जी।*
*श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ पोस्ट ११०६, बालकाण्ड दोहा ३१६/१-४, देवताओं द्वारा श्रीराम जी को निहारना।*
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*जेहिं बर बाजी रामु असवारा।*
*तेहि सारदउ न बरनै पारा।।*
*संकर राम रूप अनुरागे।*
*नयन पंचदस अति प्रिय लागे।।*
*हरि हित सहित रामु जब जोहे।*
*रमा समेत रमापति मोहे।।*
*निरखि राम छबि बिधि हरषाने।*
*आठ नयन जानि पछिताने।।*
*भावार्थ:- जिस श्रेष्ठ घोड़ें पर श्रीरामचन्द्र जी सवार है, उसका वर्णन सरस्वती जी भी नहीं कर सकती है। शंकर जी श्रीरामचन्द्र जी के रूप ऐसे अनुरक्त हुए कि उन्हें अपने पंद्रह नेत्र इस समय बहुत ही प्यारे लगने लगे। भगवान विष्णु ने जब प्रेम सहित श्रीराम को देखा, तब वे रमणीयता की मूर्ति श्रीलक्ष्मी जी के पति श्री लक्ष्मी जी सहित मोहित हो गये। श्रीरामचन्द्र जी की शोभा देखकर ब्रह्माजी प्रसन्न हुए, पर अपने आठ ही नयन जानकर पछताने लगे।*
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