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#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - हनुमते रामदूताय नमः ತ 9 तन पुलकित मुख बचन न आवा। मूदि चरननि सिरु नावा।। नयन बिसमयवंत देखि महतारी| भए बहुरि सिसुरूप खरारी। २०१/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी का दिव्य रूप देखकर) माताजी पुलकित हो गया।तब आंखें मूंदकर उसने का तन श्रीरामचन्द्र जी के चरणों में सिर नवाया। माताजी को आश्चर्यचकित देखकर खर के शत्रु श्रीराम जी फिर बाल रूप में आ गए। हनुमते रामदूताय नमः ತ 9 तन पुलकित मुख बचन न आवा। मूदि चरननि सिरु नावा।। नयन बिसमयवंत देखि महतारी| भए बहुरि सिसुरूप खरारी। २०१/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी का दिव्य रूप देखकर) माताजी पुलकित हो गया।तब आंखें मूंदकर उसने का तन श्रीरामचन्द्र जी के चरणों में सिर नवाया। माताजी को आश्चर्यचकित देखकर खर के शत्रु श्रीराम जी फिर बाल रूप में आ गए। - ShareChat