Ravinder Bishnoi
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#राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अरुन नयन उर बाहु बिसाला। नील जलज तनु स्याम तमाला। | कटि पट पीत कसें भर भाथा| दुँहुँ हाथा। | रुचिर चाप सायक २०८/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ भगवान (श्रीराम जी) के लाल नेत्र हैं , चौड़ी छाती और विशाल भुजाएं हैं ,नील कमल और तमाल के वृक्ष की तरह श्याम शरीर है,कमर में पीतांबर पहने और सुंदर तरकस कसे हुए हैं। में क्रमशः सुंदर धनुष और बाण हैं । दोनों কাথী ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अरुन नयन उर बाहु बिसाला। नील जलज तनु स्याम तमाला। | कटि पट पीत कसें भर भाथा| दुँहुँ हाथा। | रुचिर चाप सायक २०८/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ भगवान (श्रीराम जी) के लाल नेत्र हैं , चौड़ी छाती और विशाल भुजाएं हैं ,नील कमल और तमाल के वृक्ष की तरह श्याम शरीर है,कमर में पीतांबर पहने और सुंदर तरकस कसे हुए हैं। में क्रमशः सुंदर धनुष और बाण हैं । दोनों কাথী - ShareChat
#🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #राम
🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री रामदूताय नमः हनुमते पुरुष सिंह दोउ बीर चले मुनि भय हरन। हरषि कृपासिंधु मतिधीर अखिल बिस्व कारन करन। | २०८ख, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस Ris भावार्थ -पुरुषों में रूप दोनों भाई (राम लिए लक्ष्मण) मुनि का भय हरने के प्रसन्न होकर चले।वे कृपा के समुद्र धीर बुद्धि और संपूर्ण विश्व के कारण के भी कारण हैं। ऊँ श्री रामदूताय नमः हनुमते पुरुष सिंह दोउ बीर चले मुनि भय हरन। हरषि कृपासिंधु मतिधीर अखिल बिस्व कारन करन। | २०८ख, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस Ris भावार्थ -पुरुषों में रूप दोनों भाई (राम लिए लक्ष्मण) मुनि का भय हरने के प्रसन्न होकर चले।वे कृपा के समुद्र धीर बुद्धि और संपूर्ण विश्व के कारण के भी कारण हैं। - ShareChat
#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः सौंपे भूप रिषिहि सुत देइ असीस। बहुबिधि जननी भवन गए प्रभु चले नाइ पद सीस।| २०८ क, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ राजा ( दशरथ) ने बहुत प्रकार से आ- शीर्वाद देकर अपने (राम -लक्ष्मण) को ऋषि पुत्रों विश्वामित्र के हवाले कर दिया। फिर प्रभु श्रीराम माता के महल गए और उनके चरणों में सिर नवा कर चले। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः सौंपे भूप रिषिहि सुत देइ असीस। बहुबिधि जननी भवन गए प्रभु चले नाइ पद सीस।| २०८ क, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ राजा ( दशरथ) ने बहुत प्रकार से आ- शीर्वाद देकर अपने (राम -लक्ष्मण) को ऋषि पुत्रों विश्वामित्र के हवाले कर दिया। फिर प्रभु श्रीराम माता के महल गए और उनके चरणों में सिर नवा कर चले। - ShareChat
#🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #राम #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अति आदर दोउ तनय बुलाए। हृदयँ लाई बहु भाँति सिखाए।। मेरे प्रान नाथ सुत दोऊ। तुम्ह मुनि पिता आन नहिं कोऊ। | २०७/5, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस (दशरथ)ने बड़े ही आदर से दोनों भावार्थ 7/ (राम ्लक्ष्मण)को बुलाया और हृदय से लगा पुत्रों कर बहुत प्रकार से उन्हें सीख दी। (फिर कहा- ) हे नाथ!ये दोनों पुत्र मेरे प्राण हैं।हे मुनि (विश्वा- मित्र जी!) अब आप ही इनके पिता हैं, दूसरा कोई नहीं | ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अति आदर दोउ तनय बुलाए। हृदयँ लाई बहु भाँति सिखाए।। मेरे प्रान नाथ सुत दोऊ। तुम्ह मुनि पिता आन नहिं कोऊ। | २०७/5, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस (दशरथ)ने बड़े ही आदर से दोनों भावार्थ 7/ (राम ्लक्ष्मण)को बुलाया और हृदय से लगा पुत्रों कर बहुत प्रकार से उन्हें सीख दी। (फिर कहा- ) हे नाथ!ये दोनों पुत्र मेरे प्राण हैं।हे मुनि (विश्वा- मित्र जी!) अब आप ही इनके पिता हैं, दूसरा कोई नहीं | - ShareChat
#राम #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः { a सुनि नृप गिरा प्रेम रस सानी। हरष माना मुनि ग्यानी। | हृदयँ तब बसिष्ट समुझावा| बहुबिधि नृप संदेह नास कहॅँ पावा।| २०७/४, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस प्रेम रस में सनी हुई राजा की वाणी सुन- भावार्थ कर ज्ञानी मुनि विश्वामित्र जी ने हृदय में बडा हर्ष माना।तब वशिष्ठ जी ने राजा को बहुत प्रकार से जिससे राजा का संदेह नाश को प्राप्त HSIII हुआ| ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः { a सुनि नृप गिरा प्रेम रस सानी। हरष माना मुनि ग्यानी। | हृदयँ तब बसिष्ट समुझावा| बहुबिधि नृप संदेह नास कहॅँ पावा।| २०७/४, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस प्रेम रस में सनी हुई राजा की वाणी सुन- भावार्थ कर ज्ञानी मुनि विश्वामित्र जी ने हृदय में बडा हर्ष माना।तब वशिष्ठ जी ने राजा को बहुत प्रकार से जिससे राजा का संदेह नाश को प्राप्त HSIII हुआ| - ShareChat
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श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः सब सुत प्रिय मोहि प्रान की नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाईं। | कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा। | २०७/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -( राजा दशरथ जी कहते हैं) सभी पुत्र मुझे प्राणों के समान प्यारे हैं , उनमें भी हे प्रभो! राम को तो किसी भी प्रकार से देते नहीं बनता कहां अत्यंत डरावने और क्रूर राक्षस और कहां परम किशोर अवस्था के सुकुमार मेरे सुंदर पुत्र! ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः सब सुत प्रिय मोहि प्रान की नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाईं। | कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा। | २०७/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -( राजा दशरथ जी कहते हैं) सभी पुत्र मुझे प्राणों के समान प्यारे हैं , उनमें भी हे प्रभो! राम को तो किसी भी प्रकार से देते नहीं बनता कहां अत्यंत डरावने और क्रूर राक्षस और कहां परम किशोर अवस्था के सुकुमार मेरे सुंदर पुत्र! - ShareChat
#राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः धेनु धन कोसा| মুমি मागहु सर्बस देउँ आजु सहरोसा। | 1 प्रान तें प्रिय कछु नाहीं| सोउ मुनि देउँ निमिष एक माहीं। | २०७/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -हे मुनि!आप पृथ्वी, गो,धन और खजाना लीजिए , मैं आज बड़े हर्ष के साथ अपना मांग सर्वस्व दे दूंगा।देह और प्राण से प्यारा और कुछ नहीं होता , मैं उसे भी एक पल में दे दूंगा | ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः धेनु धन कोसा| মুমি मागहु सर्बस देउँ आजु सहरोसा। | 1 प्रान तें प्रिय कछु नाहीं| सोउ मुनि देउँ निमिष एक माहीं। | २०७/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -हे मुनि!आप पृथ्वी, गो,धन और खजाना लीजिए , मैं आज बड़े हर्ष के साथ अपना मांग सर्वस्व दे दूंगा।देह और प्राण से प्यारा और कुछ नहीं होता , मैं उसे भी एक पल में दे दूंगा | - ShareChat
#🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #राम
🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः राजा अति अप्रिय बानी। सुनि हृदय कंप मुख दुति कुमलानी। | चौथेंपन पायउँ सुत चारी। बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी। | २०७/१ , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस इस अत्यंत अप्रिय वाणी को सुनकर भावार्थ राजा दशरथ का हृदय कांप उठा। उनके मुख की हे विद्वजन! कांति फीकी पड़ गई। उन्होंने कहा मैंने चौथेपन में चार पुत्र पाए हैं , आपने विचारकर बात नहीं कही। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः राजा अति अप्रिय बानी। सुनि हृदय कंप मुख दुति कुमलानी। | चौथेंपन पायउँ सुत चारी। बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी। | २०७/१ , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस इस अत्यंत अप्रिय वाणी को सुनकर भावार्थ राजा दशरथ का हृदय कांप उठा। उनके मुख की हे विद्वजन! कांति फीकी पड़ गई। उन्होंने कहा मैंने चौथेपन में चार पुत्र पाए हैं , आपने विचारकर बात नहीं कही। - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ತೆ 9 रामदूताय नमः মন্তুমন देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान। धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान। | २०७, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस प्रसन्न मन से इनको (श्री राम भावार्थ हे राजन् लक्ष्मण)को मुझे दो।मोह और अज्ञान को छोड़ दो धर्म और यश की प्राप्ति हे स्वामी! इससे নুসব্ধী होगी।इनका भी परम कल्याण होगा। ತೆ 9 रामदूताय नमः মন্তুমন देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान। धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान। | २०७, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस प्रसन्न मन से इनको (श्री राम भावार्थ हे राजन् लक्ष्मण)को मुझे दो।मोह और अज्ञान को छोड़ दो धर्म और यश की प्राप्ति हे स्वामी! इससे নুসব্ধী होगी।इनका भी परम कल्याण होगा। - ShareChat
#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #राम #🙏हनुमान चालीसा🏵
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री যামনুনায নম: ೯೯ತ असुर समूह सतावहिं मोही। मैं जाचन आयऊँ नृप तोही। | 27 अनुज समेत रघुनाथा| निसिचर बध मैं होब सनाथा। | २०६/5, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ - (मुनि विश्वामित्र जी ने कहा) हे राजन्! राक्षसों के समूह मुझे बहुत सताते हैं, इसलिए मैं कुछ माँगने आया हूँ। छोटे भाई सहित रघु- 3# नाथ जी मुझे दो। राक्षसों के मारे जाने से मैं सनाथ (सुरक्षित) हो जाऊंगा | ऊँ श्री যামনুনায নম: ೯೯ತ असुर समूह सतावहिं मोही। मैं जाचन आयऊँ नृप तोही। | 27 अनुज समेत रघुनाथा| निसिचर बध मैं होब सनाथा। | २०६/5, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ - (मुनि विश्वामित्र जी ने कहा) हे राजन्! राक्षसों के समूह मुझे बहुत सताते हैं, इसलिए मैं कुछ माँगने आया हूँ। छोटे भाई सहित रघु- 3# नाथ जी मुझे दो। राक्षसों के मारे जाने से मैं सनाथ (सुरक्षित) हो जाऊंगा | - ShareChat