Ravinder Bishnoi
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#🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🙏 जय हनुमान #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 - ऊँ श्री हनुमते হামনুনাম নম: जहँ जप जग्य जोग मुनि करहीं | अति मारीच सुबाहुहि डरहीं। | देखत जग्य निसाचर धावहिं | करहिं उपद्रव मुनि दुख पावहिं। | २०५/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस जहाँ पर वे मुनि जप,यज्ञ और योग करते भावार्थ थे, परंतु मारीच और सुबाहु से डरते थे।यज्ञ देखते ही राक्षस दौड़े आते थे और उपद्रव मचाते थे,जिस से मुनि बहुत दुख पाते थे। ऊँ श्री हनुमते হামনুনাম নম: जहँ जप जग्य जोग मुनि करहीं | अति मारीच सुबाहुहि डरहीं। | देखत जग्य निसाचर धावहिं | करहिं उपद्रव मुनि दुख पावहिं। | २०५/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस जहाँ पर वे मुनि जप,यज्ञ और योग करते भावार्थ थे, परंतु मारीच और सुबाहु से डरते थे।यज्ञ देखते ही राक्षस दौड़े आते थे और उपद्रव मचाते थे,जिस से मुनि बहुत दुख पाते थे। - ShareChat
#🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺
🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री हनुमते হামনুনায নম: यह सब चरित कहा मैं गाई। आगिलि कथा सुनहु मन लाई।। महामुनि ग्यानी। নিষ্পোমিন बसहिं बिपिन सुभ आश्रम जानी।| २०५/1 , बालकाण्डश्रीरामचरितमानस यह सब चरित्र मैंने गाकर (बखानकर) भावार्थ कहा।अब आगे की कथा मन लगाकर ज्ञानी सुनो। विश्वामित्र जी वन में शुभ आश्रम में (पवित्र महामुनि स्थान) जानकर बसते थे। ऊँ श्री हनुमते হামনুনায নম: यह सब चरित कहा मैं गाई। आगिलि कथा सुनहु मन लाई।। महामुनि ग्यानी। নিষ্পোমিন बसहिं बिपिन सुभ आश्रम जानी।| २०५/1 , बालकाण्डश्रीरामचरितमानस यह सब चरित्र मैंने गाकर (बखानकर) भावार्थ कहा।अब आगे की कथा मन लगाकर ज्ञानी सुनो। विश्वामित्र जी वन में शुभ आश्रम में (पवित्र महामुनि स्थान) जानकर बसते थे। - ShareChat
#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #राम #🙏 जय हनुमान
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अनीह ब्यापक अकल अज निर्गुन नाम न रूप। भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप। | २०५, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ परमात्मा जोकि व्यापक, अजन्मा अकल (निरावयव ) , इच्छा रहित और निर्गुण है तथा जिनका न तो कोई नाम न कोई रूप है,वही fg नाना प्रकार के अनुपम भगवान भक्तों के अलौकिक चरित्र करते हैं। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अनीह ब्यापक अकल अज निर्गुन नाम न रूप। भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप। | २०५, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ परमात्मा जोकि व्यापक, अजन्मा अकल (निरावयव ) , इच्छा रहित और निर्गुण है तथा जिनका न तो कोई नाम न कोई रूप है,वही fg नाना प्रकार के अनुपम भगवान भक्तों के अलौकिक चरित्र करते हैं। - ShareChat
#🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #राम #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 - ऊँ श्री हनुमते হামনুনায নম: प्रातकाल उठि कै रघुनाथा| मातु पिता गुरु नावहिं माथा। | आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा। | २०४/४, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ - श्रीरघुनाथ जी प्रातःकाल उठकर माता, पिता और गुरु को मस्तक नवाते हैं उनसे आज्ञा लेकर नगर के कार्य करते हैं। उनके चरित्र देख- कर राजा दशरथ मन बड़े हर्षित होते हैं। ऊँ श्री हनुमते হামনুনায নম: प्रातकाल उठि कै रघुनाथा| मातु पिता गुरु नावहिं माथा। | आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा। | २०४/४, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ - श्रीरघुनाथ जी प्रातःकाल उठकर माता, पिता और गुरु को मस्तक नवाते हैं उनसे आज्ञा लेकर नगर के कार्य करते हैं। उनके चरित्र देख- कर राजा दशरथ मन बड़े हर्षित होते हैं। - ShareChat
#राम #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺
राम - ತೆ 9 हनुमते रामदूताय नमः l बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। 6 कृपानिधि सोई संजोगा। | करहिं पुरान सुनहिं मन लाई। ঊষ आप कहहिं अनुन्ह समुझाई। | २०४/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ जिस प्रकार से नगर के लोग ೯; सुखी कृपानिधान श्री रामचन्द्र जी वहीं संयोग (लीला) करते हैं।वे मन लगाकर वेद -पुराण सुनते हैं और फिर स्वयं छोटे भाइयों को समझाकर बताते हैं। ತೆ 9 हनुमते रामदूताय नमः l बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। 6 कृपानिधि सोई संजोगा। | करहिं पुरान सुनहिं मन लाई। ঊষ आप कहहिं अनुन्ह समुझाई। | २०४/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ जिस प्रकार से नगर के लोग ೯; सुखी कृपानिधान श्री रामचन्द्र जी वहीं संयोग (लीला) करते हैं।वे मन लगाकर वेद -पुराण सुनते हैं और फिर स्वयं छोटे भाइयों को समझाकर बताते हैं। - ShareChat
#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जे मृग राम बान के मारे। ते तनु तजि सिधारे। | सुरलोक अनुज सखा संग भोजन करहीं | मातु पिता अग्या अनुसरहीं। | २०४/२, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस जो पशु (दुष्ट , राक्षस) श्रीराम जी के बाण से भावार्थ  मारे जाते वे अपना नश्वर शरीर छोड़कर देवलोक को जाते। रामचन्द्र जी अपने सखा और भाइयों के साथ भोजन करते हैं और माता पिता की आज्ञा का पालन करते हैं। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जे मृग राम बान के मारे। ते तनु तजि सिधारे। | सुरलोक अनुज सखा संग भोजन करहीं | मातु पिता अग्या अनुसरहीं। | २०४/२, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस जो पशु (दुष्ट , राक्षस) श्रीराम जी के बाण से भावार्थ  मारे जाते वे अपना नश्वर शरीर छोड़कर देवलोक को जाते। रामचन्द्र जी अपने सखा और भाइयों के साथ भोजन करते हैं और माता पिता की आज्ञा का पालन करते हैं। - ShareChat
#राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बंधु सखा सँग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।। पावन मृग मारहिं जिय जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी। | २०४/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -श्री रामचन्द्र जी भाइयों और इष्ट मित्रों को बुलाकर साथ लेते हैं और नित्य वन में जाकर शि- कार खेलते हैं। हृदय में वे पवित्र कार्यो के लिए को मारते हैं और प्रतिदिन दुष्ट, राक्षसी) पशुओं लाकर राजा को दिखलाते हैं। विशेष - श्रीराम जी स्वयंभू प्रभु का अवतार निर्दोष जीवों का शिकार नहीं करते थे।इसकी पुष्टि अरण्य काण्ड चौपाई १८/५ से होती है। जिसमें वे खर दूषण के राक्षस दूतों से कहते हैं क्षत्रिय हैं और वन में शिकार करने ক্রি কম के लिए तुम्हारे जैसे दुष्ट पशुओं को ही तो खोजते फिरते हैं हम बलवान शत्रु से नहीं डरते,काल से भी लड़ सकते हैं। करहीं ।तुम्ह स खल मृग खोजत फिरहीं । | हम छत्री मृगया बन रिपु बलवंत देखि नहिं डरहीं।एक बार कालहु सन लरहीं। | ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बंधु सखा सँग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।। पावन मृग मारहिं जिय जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी। | २०४/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -श्री रामचन्द्र जी भाइयों और इष्ट मित्रों को बुलाकर साथ लेते हैं और नित्य वन में जाकर शि- कार खेलते हैं। हृदय में वे पवित्र कार्यो के लिए को मारते हैं और प्रतिदिन दुष्ट, राक्षसी) पशुओं लाकर राजा को दिखलाते हैं। विशेष - श्रीराम जी स्वयंभू प्रभु का अवतार निर्दोष जीवों का शिकार नहीं करते थे।इसकी पुष्टि अरण्य काण्ड चौपाई १८/५ से होती है। जिसमें वे खर दूषण के राक्षस दूतों से कहते हैं क्षत्रिय हैं और वन में शिकार करने ক্রি কম के लिए तुम्हारे जैसे दुष्ट पशुओं को ही तो खोजते फिरते हैं हम बलवान शत्रु से नहीं डरते,काल से भी लड़ सकते हैं। करहीं ।तुम्ह स खल मृग खोजत फिरहीं । | हम छत्री मृगया बन रिपु बलवंत देखि नहिं डरहीं।एक बार कालहु सन लरहीं। | - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #राम
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ತ 9 रामदूताय नमः हनुमते कोसलपुर बासी नर नारी बृद्ध अरु बाल। प्रानहु ते प्रिय लागत कहुँ राम कृपाल।| q २०४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ - कौशलपुर के रहने वाले स्त्री पुरुष, बूढ़े और बालक सभी को कृपालु श्रीरामचन्द्र जी प्राणों से भी ज्यादा प्रिय लगते हैं। ತ 9 रामदूताय नमः हनुमते कोसलपुर बासी नर नारी बृद्ध अरु बाल। प्रानहु ते प्रिय लागत कहुँ राम कृपाल।| q २०४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ - कौशलपुर के रहने वाले स्त्री पुरुष, बूढ़े और बालक सभी को कृपालु श्रीरामचन्द्र जी प्राणों से भी ज्यादा प्रिय लगते हैं। - ShareChat
#राम #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा। | जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई। थकित होहिं सब लोग लुगाई। | २०३/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी के) में बाण और धनुष কাথী बहुत ही शोभा देते हैं। रूप देखते ही चराचर (जड़ और चेतन ) मोहित हो जाते हैं।वे सब भाई जिन गलियों में खेलते हुए निकलते हैं ,उन गलियों के सभी स्त्री और पुरुष उनको देखकर स्नेह में स्थिल हो जाते हैं अथवा ठिठककर रह जाते हैं | ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा। | जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई। थकित होहिं सब लोग लुगाई। | २०३/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी के) में बाण और धनुष কাথী बहुत ही शोभा देते हैं। रूप देखते ही चराचर (जड़ और चेतन ) मोहित हो जाते हैं।वे सब भाई जिन गलियों में खेलते हुए निकलते हैं ,उन गलियों के सभी स्त्री और पुरुष उनको देखकर स्नेह में स्थिल हो जाते हैं अथवा ठिठककर रह जाते हैं | - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #राम
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ತ 9 মন্তুসন रामदूताय नमः L0 जाकी सहज स्वास श्रुति चारी। सो हरि पढ यह कौतुक भारी। | निपुन নিম্া নিনয गुन सीला। खेलहिंखेल सकल नृपलीला। | २०३/३, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस चारों वेद जिनके स्वाभाविक श्वास हैं ,वे भावार्थ कौतुक ( अचरज) है। चारों भगवान पढ़ें ,यह बड़ा भाई विद्या,विनय, गुण और शील में बड़े निपुण हैं । वे सब राजाओं की लीलाओं के ही खेल खेलते हैं। ತ 9 মন্তুসন रामदूताय नमः L0 जाकी सहज स्वास श्रुति चारी। सो हरि पढ यह कौतुक भारी। | निपुन নিম্া নিনয गुन सीला। खेलहिंखेल सकल नृपलीला। | २०३/३, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस चारों वेद जिनके स्वाभाविक श्वास हैं ,वे भावार्थ कौतुक ( अचरज) है। चारों भगवान पढ़ें ,यह बड़ा भाई विद्या,विनय, गुण और शील में बड़े निपुण हैं । वे सब राजाओं की लीलाओं के ही खेल खेलते हैं। - ShareChat