Ravinder Bishnoi
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#राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵
राम - ऊँ श्री মন্তুসন रामदूताय नमः यह रहस्य काहूँ नहिं जाना। दिनमनि चले करत गुनगाना। | देखि महोत्सव सुर मुनि नागा चले भवन बरनत निज भागा। | १९५/१ , बालकाण्डश्रीरामचरितमानस यह रहस्य किसी ने नहीं जाना।(ऐसा भावार्थ कि) सूर्यदेव भी श्रीराम जी का गुणगान लगता था करते चले जाते थे।यह महोत्सव देखकर देवता, मुनि और नाग भी अपने भाग्य की सराहना करते अपने -अपने घर को चले। ऊँ श्री মন্তুসন रामदूताय नमः यह रहस्य काहूँ नहिं जाना। दिनमनि चले करत गुनगाना। | देखि महोत्सव सुर मुनि नागा चले भवन बरनत निज भागा। | १९५/१ , बालकाण्डश्रीरामचरितमानस यह रहस्य किसी ने नहीं जाना।(ऐसा भावार्थ कि) सूर्यदेव भी श्रीराम जी का गुणगान लगता था करते चले जाते थे।यह महोत्सव देखकर देवता, मुनि और नाग भी अपने भाग्य की सराहना करते अपने -अपने घर को चले। - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #राम
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः मास दिवस कथ कर दिवस मरम न जानइ कोई। रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होई। । १९५, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ - महीने भर का दिन हो गया। (लोग दिन रात का अंतर भूल गए) इस रहस्य को कोई नहीं सूर्य अपने रथ सहित वही रुक गये, फिर जानता। रात किस तरह होती। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः मास दिवस कथ कर दिवस मरम न जानइ कोई। रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होई। । १९५, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ - महीने भर का दिन हो गया। (लोग दिन रात का अंतर भूल गए) इस रहस्य को कोई नहीं सूर्य अपने रथ सहित वही रुक गये, फिर जानता। रात किस तरह होती। - ShareChat
#🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान #राम #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵
🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः भवन बेदधुनि अति मृदुबानी। जनु खग मुखर समयँ जनु सानी। | कौतुक देखि पतंग भुलाना। एक मास तेइँ जात न जाना। | १९४/४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ राजभवन में जो अति कोमल वाणी से वेद ध्वनि हो रही है , वह मानो समय( समयानुकूल) कौतुक से सनी हुई पक्षियों की चहचहाहट है।यह देखकर सूर्य भी अपनी चाल भूल गए।एक महीना उन्होंने जाता हुआ न जाना। (उन्होंने अपने तेज का माह वहीं लगा दिया। ) ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः भवन बेदधुनि अति मृदुबानी। जनु खग मुखर समयँ जनु सानी। | कौतुक देखि पतंग भुलाना। एक मास तेइँ जात न जाना। | १९४/४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ राजभवन में जो अति कोमल वाणी से वेद ध्वनि हो रही है , वह मानो समय( समयानुकूल) कौतुक से सनी हुई पक्षियों की चहचहाहट है।यह देखकर सूर्य भी अपनी चाल भूल गए।एक महीना उन्होंने जाता हुआ न जाना। (उन्होंने अपने तेज का माह वहीं लगा दिया। ) - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🙏 जय हनुमान #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः अगर धूप बहु जनु अँधिआरी| उड़इ अबीर मनहुँ अरुनारी। | मंदिर मनि समूह जनु तारा। नृप गृह कलस सो इंदु उदारा। | १९४/३, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ अगर की धूप का बहुत सा মানী g3் संध्या का अंधकार है और जो अबीर उड़ रहा है वह उसकी ललाई है ম তী মতিয়ী ক महलों समूह हैं ,वे मानो तारागण हैं। राजमहल का जो कलश है ,वही मानो श्रेष्ठ चंद्रमा है। ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः अगर धूप बहु जनु अँधिआरी| उड़इ अबीर मनहुँ अरुनारी। | मंदिर मनि समूह जनु तारा। नृप गृह कलस सो इंदु उदारा। | १९४/३, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ अगर की धूप का बहुत सा মানী g3் संध्या का अंधकार है और जो अबीर उड़ रहा है वह उसकी ललाई है ম তী মতিয়ী ক महलों समूह हैं ,वे मानो तारागण हैं। राजमहल का जो कलश है ,वही मानो श्रेष्ठ चंद्रमा है। - ShareChat
#🔥हनुमान जयंती Status 🚩 #🙏श्री राम भक्त हनुमान🚩 #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏हनुमान चालीसा🏵
🔥हनुमान जयंती Status 🚩 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि। । हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि। । हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं - ShareChat
#राम #रामचरितमानस चौपाई #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि। । हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि। । हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं - ShareChat
#श्री रामचरि#रामचरितमानस चौपाई #राम
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अवधपुरी सोहा एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती।  देखि भानु जनु मन सकुचानी। तदपि बनी संध्या अनुमानी। | १९४/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -अवधपुरी इस प्रकार सुशोभित हो रही है, मिलने आई हो और सूर्य को मानो रात्रि प्रभु से fg फिर भी देखकर मानो मन में सकुचा गई हो , मन में विचार कर वह संध्या बनकर रह गई हो। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अवधपुरी सोहा एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती।  देखि भानु जनु मन सकुचानी। तदपि बनी संध्या अनुमानी। | १९४/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -अवधपुरी इस प्रकार सुशोभित हो रही है, मिलने आई हो और सूर्य को मानो रात्रि प्रभु से fg फिर भी देखकर मानो मन में सकुचा गई हो , मन में विचार कर वह संध्या बनकर रह गई हो। - ShareChat
#राम #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #रामचरितमानस चौपाई #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
राम - ತ 9 रामदूताय नमः हनुमते कैकेयसुता दोऊ। सुमित्रा सुंदर सुत जनमत भैं ओऊ। | वह सुख संपति समय समाजा। कहि न सकई सारद अहिराजा। | १९४/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ - कैकेयी और -इन दोनों ने भी सुमित्रा को जन्म दिया।उस समय समाज के सुंदर पुत्रों सुख का वर्णन सरस्वती जी और सर्पों के राजा शेषनाग भी नहीं कर सकते। ತ 9 रामदूताय नमः हनुमते कैकेयसुता दोऊ। सुमित्रा सुंदर सुत जनमत भैं ओऊ। | वह सुख संपति समय समाजा। कहि न सकई सारद अहिराजा। | १९४/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ - कैकेयी और -इन दोनों ने भी सुमित्रा को जन्म दिया।उस समय समाज के सुंदर पुत्रों सुख का वर्णन सरस्वती जी और सर्पों के राजा शेषनाग भी नहीं कर सकते। - ShareChat
#रामचरितमानस चौपाई #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #राम
रामचरितमानस चौपाई - ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद। हरषवंत सब जहँ तहॅँ नगर नारि नर बृंद। | १९४, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -घर घर मंगलमय बधावा बजने लगा, क्योंकि शोभा के मूल भगवान प्रकट हुए हैं। नगर के स्त्री -पुरुषों के झुंड के झुंड जहाँ -तहाँ आनंद में मग्न हो रहे हैं। ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद। हरषवंत सब जहँ तहॅँ नगर नारि नर बृंद। | १९४, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -घर घर मंगलमय बधावा बजने लगा, क्योंकि शोभा के मूल भगवान प्रकट हुए हैं। नगर के स्त्री -पुरुषों के झुंड के झुंड जहाँ -तहाँ आनंद में मग्न हो रहे हैं। - ShareChat
#राम #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #रामचरितमानस चौपाई
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।| मृगमद चंदन कुंकुम कीचा| मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा। | १९३/४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -राजा ने सबको भरपूर दान दिया। जिसने पाया वह भी न रख सका (न संभला) | नगर की सभी गलियों में केसर, कस्तूरी और चंदन की कीच मच गई। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।| मृगमद चंदन कुंकुम कीचा| मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा। | १९३/४, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -राजा ने सबको भरपूर दान दिया। जिसने पाया वह भी न रख सका (न संभला) | नगर की सभी गलियों में केसर, कस्तूरी और चंदन की कीच मच गई। - ShareChat