Ravinder Bishnoi
ShareChat
click to see wallet page
@148844375
148844375
Ravinder Bishnoi
@148844375
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏 जय हनुमान #राम #🙏🏻हनुमान जी के भजन
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ऊँ श्री रामदूताय नमः हनुमते जो बसिष्ठ कछु WTTI ೯೯ೆ सिद्ध सकल काजु भा तुम्हारा। | यह हबि बाँटि देहु नृप जाई। जथा जोग जेहि भाग बनाई। | १८८/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(और दशरथ से बोले) वशिष्ठ ने हृदय में सिद्ध जो विचार किया था वह कार्य हो गया है ।से राजन! अब तुम जाकर हविष्यान्न पायस को जिस को जैसा उचित हो ,वैसा भाग बनाकर बांट दो। ऊँ श्री रामदूताय नमः हनुमते जो बसिष्ठ कछु WTTI ೯೯ೆ सिद्ध सकल काजु भा तुम्हारा। | यह हबि बाँटि देहु नृप जाई। जथा जोग जेहि भाग बनाई। | १८८/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(और दशरथ से बोले) वशिष्ठ ने हृदय में सिद्ध जो विचार किया था वह कार्य हो गया है ।से राजन! अब तुम जाकर हविष्यान्न पायस को जिस को जैसा उचित हो ,वैसा भाग बनाकर बांट दो। - ShareChat
#🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #राम #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵
🙏🏻हनुमान जी के भजन - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः [ सृंगी रिषिहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्र काम सुभ जग्य करावा। | भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें। | १८८/३, बालकाण्ड- श्रीरामचरितमानस भावार्थ -वशिष्ठ जी ने श्रंगी ऋषि को बुलवाया और उनसे पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया मुनि के भक्ति आहुतियां देने पर अग्निदेव हाथ में चरु सहित ( हविष्यान्न खीर) लिए प्रकट हुए। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः [ सृंगी रिषिहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्र काम सुभ जग्य करावा। | भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें। | १८८/३, बालकाण्ड- श्रीरामचरितमानस भावार्थ -वशिष्ठ जी ने श्रंगी ऋषि को बुलवाया और उनसे पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया मुनि के भक्ति आहुतियां देने पर अग्निदेव हाथ में चरु सहित ( हविष्यान्न खीर) लिए प्रकट हुए। - ShareChat
#🙏 जय हनुमान #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🙏🏻हनुमान जी के भजन
🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः निज दुख सुख सब TIగ सुनायउ। %f fs बहुबिधि समुदायउ। | धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी।। १८८/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -राजा दशरथ ने अपना सारा सुख दुख गुरु को सुनाया। गुरु वशिष्ठ ने उन्हें बहुत प्रकार से समझाया और कहा -धीरज धरो, 35R R पुत्र होंगे ,जो तीनों लोकों में प्रसिद्ध और भगतों 477 77/ के भय हरने ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः निज दुख सुख सब TIగ सुनायउ। %f fs बहुबिधि समुदायउ। | धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी।। १८८/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -राजा दशरथ ने अपना सारा सुख दुख गुरु को सुनाया। गुरु वशिष्ठ ने उन्हें बहुत प्रकार से समझाया और कहा -धीरज धरो, 35R R पुत्र होंगे ,जो तीनों लोकों में प्रसिद्ध और भगतों 477 77/ के भय हरने - ShareChat
#राम #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान
राम - ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः एक बार भूपति मन माहीं | भै गलानि मोरें सुत नाहीं। | गुर गृह गयउ तुरत महीपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला। | १८८/१ , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -एक बार राजा दशरथ के मन में बड़ी ग्लानि हुई कि मेरे कोई पुत्र नहीं है।राजा तुरंत ही अपने गुरु के घर गये और उनके चरणों में प्रणाम कर बहुत विनय की। ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः एक बार भूपति मन माहीं | भै गलानि मोरें सुत नाहीं। | गुर गृह गयउ तुरत महीपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला। | १८८/१ , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -एक बार राजा दशरथ के मन में बड़ी ग्लानि हुई कि मेरे कोई पुत्र नहीं है।राजा तुरंत ही अपने गुरु के घर गये और उनके चरणों में प्रणाम कर बहुत विनय की। - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏 जय हनुमान #🙏🏻हनुमान जी के भजन #राम
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः 0 कौशल्यादि नारि प्रिय पुनीत। सब आचरन पति अनुकूल प्रेम दृढ हरिपद कमल बिनीत। | १८८, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -उनकी ( दशरथ जी की) कौशल्या आदि प्रिय रानियां सभी पवित्र आचरण वाली थीं।वे बड़ी वीनीत और पति के अनुकूल आचरण करने वालीं थी श्री हरि के चरणों में उनका दृढ़ प्रेम था। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः 0 कौशल्यादि नारि प्रिय पुनीत। सब आचरन पति अनुकूल प्रेम दृढ हरिपद कमल बिनीत। | १८८, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -उनकी ( दशरथ जी की) कौशल्या आदि प्रिय रानियां सभी पवित्र आचरण वाली थीं।वे बड़ी वीनीत और पति के अनुकूल आचरण करने वालीं थी श्री हरि के चरणों में उनका दृढ़ प्रेम था। - ShareChat
#🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #राम #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵
🙏🏻हनुमान जी के भजन - জঁ 9 हनुमते रामदूताय नमः अवधपुरी न रघुकुलमनि राऊँ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ। | गुननिधि ग्यानी [ धरम धुरंधर 1 भगति भति सारंगपानी। | हृदयं १८७/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -अवधपुरी में रघुकुल शिरोमणि दशरथ नाम के राजा हुए ,जिनका नाम वेदों में विख्यात है। के भंडार और ज्ञानी थे ತಗಾ वे धर्मधुरंधर गुणों I हृदय में शांर्गधनुष धारण करने वाले भगवान की बुद्धि उसी में लगी भक्ति थी। उनकी থী | रहती জঁ 9 हनुमते रामदूताय नमः अवधपुरी न रघुकुलमनि राऊँ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ। | गुननिधि ग्यानी [ धरम धुरंधर 1 भगति भति सारंगपानी। | हृदयं १८७/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -अवधपुरी में रघुकुल शिरोमणि दशरथ नाम के राजा हुए ,जिनका नाम वेदों में विख्यात है। के भंडार और ज्ञानी थे ತಗಾ वे धर्मधुरंधर गुणों I हृदय में शांर्गधनुष धारण करने वाले भगवान की बुद्धि उसी में लगी भक्ति थी। उनकी থী | रहती - ShareChat
#🙏 जय हनुमान #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🙏🏻हनुमान जी के भजन
🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः गिरि कानन जहँ तहॅँ भरि पूरी। निज निज अनीक रुचि रूरी।| यह सब रुचिर चरित मैं भाषा| अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा। | १८७/3,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थन्वे वानर जंगलों और पर्वतों में जहाँ ्तहां अपनी सेना बनाकर भरपूर छा गये।यह सब जिसे सुन्दर चरित्र मैंने कहा। अब वह चरित्र सुनो मैंने बीच में छोड़ दिया था। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः गिरि कानन जहँ तहॅँ भरि पूरी। निज निज अनीक रुचि रूरी।| यह सब रुचिर चरित मैं भाषा| अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा। | १८७/3,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थन्वे वानर जंगलों और पर्वतों में जहाँ ्तहां अपनी सेना बनाकर भरपूर छा गये।यह सब जिसे सुन्दर चरित्र मैंने कहा। अब वह चरित्र सुनो मैंने बीच में छोड़ दिया था। - ShareChat
#राम #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बनचर देह धरी छिति माहीं| तिन्ह TE | | अतुलित बल प्रताप गिरि नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा। | १८७/२,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ पर वे देवता वनचर (वानर ) -पृथ्वी देह धारण करके आये।उनमें अपार बल और प्रताप था।वे सभी शूरवीर थे,पर्वत, वृक्ष और नख ही उनके शस्त्र थे।वे धीर बुद्धि वाले (वानर रूप में देवता ) भगवान के आने की राह देखने लगे। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बनचर देह धरी छिति माहीं| तिन्ह TE | | अतुलित बल प्रताप गिरि नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा। | १८७/२,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ पर वे देवता वनचर (वानर ) -पृथ्वी देह धारण करके आये।उनमें अपार बल और प्रताप था।वे सभी शूरवीर थे,पर्वत, वृक्ष और नख ही उनके शस्त्र थे।वे धीर बुद्धि वाले (वानर रूप में देवता ) भगवान के आने की राह देखने लगे। - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏 जय हनुमान #🙏🏻हनुमान जी के भजन #राम
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः 8 गए देव सब निज निज धामा | भूमि सहित मन कहुँ विश्रामा। | जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा। देव विलंब न कीन्हा। | हरषे १८७/1 , बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ- सब देवता अपने अपने लोक को गये। सहित सबके मन को शांति मिली।ब्रह्मा जी पृथ्वी ने जो कुछ आज्ञा दी, उनसे देवता प्रसन्न हुए। उन्होंने वैसा करने में देर नहीं की। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः 8 गए देव सब निज निज धामा | भूमि सहित मन कहुँ विश्रामा। | जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा। देव विलंब न कीन्हा। | हरषे १८७/1 , बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ- सब देवता अपने अपने लोक को गये। सहित सबके मन को शांति मिली।ब्रह्मा जी पृथ्वी ने जो कुछ आज्ञा दी, उनसे देवता प्रसन्न हुए। उन्होंने वैसा करने में देर नहीं की। - ShareChat
#🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #राम #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵
🙏🏻हनुमान जी के भजन - ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः निज लोक बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ। बानर तनु धरि धरि सेवहु महि हरि पद JISI1 १८७ बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -देवताओं को यही सिखाकर कि वानरों का शरीर धर धरकर तुम लोग पृथ्वी पर जाकर भगवान के चरणों की सेवा करो, ब्रह्मा जी अपने लोक को चले गये गये। ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः निज लोक बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ। बानर तनु धरि धरि सेवहु महि हरि पद JISI1 १८७ बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -देवताओं को यही सिखाकर कि वानरों का शरीर धर धरकर तुम लोग पृथ्वी पर जाकर भगवान के चरणों की सेवा करो, ब्रह्मा जी अपने लोक को चले गये गये। - ShareChat