Ravinder Bishnoi
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#🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏 जय हनुमान #राम #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏हनुमान चालीसा🏵
🙏🏻हनुमान जी के भजन - ತ 9 63#4 रामदूताय नमः उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै। मातु बुझाई ಫ೯ ಹ೫T सुहाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।| १९१/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -जब माता को ज्ञान हुआ तो प्रभु मुस्कुराए वे बहुत प्रकार के चरित्र करना चाहते हैं। अतः उन्होंने अपने अवतरण की कथा कहकर माता को जिससे उन्हें पुत्र का वात्सल्य प्रेम प्राप्त समझाया हो ।(भगवान के प्रति पुत्र भाव हो जाए।) ತ 9 63#4 रामदूताय नमः उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै। मातु बुझाई ಫ೯ ಹ೫T सुहाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।| १९१/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -जब माता को ज्ञान हुआ तो प्रभु मुस्कुराए वे बहुत प्रकार के चरित्र करना चाहते हैं। अतः उन्होंने अपने अवतरण की कथा कहकर माता को जिससे उन्हें पुत्र का वात्सल्य प्रेम प्राप्त समझाया हो ।(भगवान के प्रति पुत्र भाव हो जाए।) - ShareChat
#🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🙏🏻हनुमान जी के भजन
🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै | मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै। | १९१/३ क, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस वेद कहते हैं कि प्रत्येक रोम में भावार्थ तुम्हारे माया के रचे हुए अनेकों ब्रह्मांडों के समूह भरे हैं। ऐसे भगवान कौशल्या जी के गर्भ में रहे - इस हंसी पर धीर (विवेकी) ব্ী ব্রুপ্ভি dt &al पुरुषों सुनने अर्थात विचलित हो जाती है। भी स्थिर नहीं रहती ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै | मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै। | १९१/३ क, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस वेद कहते हैं कि प्रत्येक रोम में भावार्थ तुम्हारे माया के रचे हुए अनेकों ब्रह्मांडों के समूह भरे हैं। ऐसे भगवान कौशल्या जी के गर्भ में रहे - इस हंसी पर धीर (विवेकी) ব্ী ব্রুপ্ভি dt &al पुरुषों सुनने अर्थात विचलित हो जाती है। भी स्थिर नहीं रहती - ShareChat
#राम #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता। सो मम हित लागी जन अनुरागी भयऊ प्रगट श्रीकंता । | बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस १९१,२ख भावार्थ - श्रुतियां और संतजन दया और सुख का का धाम कहकर जिनका गुणों का समुद्र ,सब गान करते हैं ,वही भक्तों पर प्रेम करने वाले लक्ष्मी लिए केपति (विष्णु) भगवान मेरे कल्याण के క6 గే/ प्रकट ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता। सो मम हित लागी जन अनुरागी भयऊ प्रगट श्रीकंता । | बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस १९१,२ख भावार्थ - श्रुतियां और संतजन दया और सुख का का धाम कहकर जिनका गुणों का समुद्र ,सब गान करते हैं ,वही भक्तों पर प्रेम करने वाले लक्ष्मी लिए केपति (विष्णु) भगवान मेरे कल्याण के క6 గే/ प्रकट - ShareChat
#🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम
🙏🏻हनुमान जी के भजन - ತೆ 9 रामदूताय नमः हनुमते कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता | माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता। 1 १९१/२क, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -दोनों हाथ जोड़कर माता 7٠٨ कहने # ক্রিস সব্ধাৎ ম নুদ্কাঠী हे अनंत ಫ೯್ | स्तुति माया, गुण, परिमाण रहित और वेद ,पुराण तुमको ज्ञान से परे बतलाते हैं। ತೆ 9 रामदूताय नमः हनुमते कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता | माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता। 1 १९१/२क, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -दोनों हाथ जोड़कर माता 7٠٨ कहने # ক্রিস সব্ধাৎ ম নুদ্কাঠী हे अनंत ಫ೯್ | स्तुति माया, गुण, परिमाण रहित और वेद ,पुराण तुमको ज्ञान से परे बतलाते हैं। - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #राम #🙏 जय हनुमान #🙏🏻हनुमान जी के भजन
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुजचारी| भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी | | १९१ख, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -भगवान का नेत्रों को आनंद देने वाला मेघ के समान श्याम शरीर था , चारों भुजाओं में अपने खास आयुध धारण किये हुए थे,दिव्य आभूषण और वनमाला पहने हुए थे ,बड़े बड़े नेत्र थे।इस प्रकार शोभा के समुद्र और खर राक्षस को मारने वाले भगवान प्रकट हुए। ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुजचारी| भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी | | १९१ख, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -भगवान का नेत्रों को आनंद देने वाला मेघ के समान श्याम शरीर था , चारों भुजाओं में अपने खास आयुध धारण किये हुए थे,दिव्य आभूषण और वनमाला पहने हुए थे ,बड़े बड़े नेत्र थे।इस प्रकार शोभा के समुद्र और खर राक्षस को मारने वाले भगवान प्रकट हुए। - ShareChat
#राम #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी| हरषित महतारी मुनि मन কাহী अद्भृत रूप बिचारी। | १९१/१क, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ - दीनों पर दया करने वाले , कौशल्या जी के हितकारी के भी मन को মুনিয়ী प्रभु प्रकट हुए। वाले उनके अद्रुत रूप को विचार करके माता हरने भी हर्ष से भर गयी। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी| हरषित महतारी मुनि मन কাহী अद्भृत रूप बिचारी। | १९१/१क, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ - दीनों पर दया करने वाले , कौशल्या जी के हितकारी के भी मन को মুনিয়ী प्रभु प्रकट हुए। वाले उनके अद्रुत रूप को विचार करके माता हरने भी हर्ष से भर गयी। - ShareChat
#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏 जय हनुमान #🙏🏻हनुमान जी के भजन #राम
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ऊँ श्री মন্তুসন रामदूताय नमः सुर समूह बिनती करि पहुंचे निज निज धाम| जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम। | १९१, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -देवताओं के समूह विनती करके अपने अपने लोक में जा पहुंचे। समस्त लोकों को सुख शांति देने वाले, जगदाधार प्रभु प्रकट हुए। ऊँ श्री মন্তুসন रामदूताय नमः सुर समूह बिनती करि पहुंचे निज निज धाम| जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम। | १९१, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ -देवताओं के समूह विनती करके अपने अपने लोक में जा पहुंचे। समस्त लोकों को सुख शांति देने वाले, जगदाधार प्रभु प्रकट हुए। - ShareChat
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🙏🏻हनुमान जी के भजन - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बरषहिं सुमन सुअंजुलि साजी। दुंदुभी बाजी। | गहगहि गगन [ अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। लावहिं निज निज सेवा। | बहुबिधि १९०/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस सब सुंदर अंजलियों में सजा सजाकर भावार्थ पुष्प बरसाने लगे। आकाश में घमाघम नगाड़े बजने लगे।नाग, मुनि और देवता स्तुति करने लगे वे सब बहुत प्रकार से अपनी सेवा (उपहार) भेंट करने लगे। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बरषहिं सुमन सुअंजुलि साजी। दुंदुभी बाजी। | गहगहि गगन [ अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। लावहिं निज निज सेवा। | बहुबिधि १९०/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस सब सुंदर अंजलियों में सजा सजाकर भावार्थ पुष्प बरसाने लगे। आकाश में घमाघम नगाड़े बजने लगे।नाग, मुनि और देवता स्तुति करने लगे वे सब बहुत प्रकार से अपनी सेवा (उपहार) भेंट करने लगे। - ShareChat
#🙏 जय हनुमान #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🙏🏻हनुमान जी के भजन
🙏 जय हनुमान - ತ 9 रामदूताय नमः हनुमते H 34& f:f Jq JIII चले सकल सुर साजि बिमाना। | गगन बिमल संकुल सुर जूथा| गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा| 4 १९०/३, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ ब्रह्माजी ने वह अवसर ( भगवान) जब के प्रकट होने का, जाना तब उनके समेत सारे देव विमान सजाकर चले ।निर्मल आकाश देवताओं के गंधर्वों के दल गुणगान करने ೯೯ # 9೯ TTT लगे ತ 9 रामदूताय नमः हनुमते H 34& f:f Jq JIII चले सकल सुर साजि बिमाना। | गगन बिमल संकुल सुर जूथा| गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा| 4 १९०/३, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस भावार्थ ब्रह्माजी ने वह अवसर ( भगवान) जब के प्रकट होने का, जाना तब उनके समेत सारे देव विमान सजाकर चले ।निर्मल आकाश देवताओं के गंधर्वों के दल गुणगान करने ೯೯ # 9೯ TTT लगे - ShareChat
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राम - ತೆ 9 63#7 रामदूताय नमः सीतल मंद सुरभी बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ। | गिरिगन मनिआरा। कुसुमित बन स्त्रवहिं सकल सरिताअ्मृतधारा। बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस 190/2 भावार्थ - शीतल,मंद और सुगंधित पवन बह थी। देवता हर्षित थे और संतों के मन में बड़ा फूले हुए थे पर्वतों के समूह मणियों चाव था।वन जगमगा रहे थे।सारी नदियां अमृत की धारा बहा रहीं थीं। ತೆ 9 63#7 रामदूताय नमः सीतल मंद सुरभी बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ। | गिरिगन मनिआरा। कुसुमित बन स्त्रवहिं सकल सरिताअ्मृतधारा। बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस 190/2 भावार्थ - शीतल,मंद और सुगंधित पवन बह थी। देवता हर्षित थे और संतों के मन में बड़ा फूले हुए थे पर्वतों के समूह मणियों चाव था।वन जगमगा रहे थे।सारी नदियां अमृत की धारा बहा रहीं थीं। - ShareChat