Ravinder Bishnoi
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#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏 जय हनुमान #राम
🙏हनुमान चालीसा🏵 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा| मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुरजूथा। | १८५/3,बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस जो भगवान संसार के (जन्म -मरण ) भावार्थ मुनियों के भय का नाश करने वाले हैं, के मन को आनंद देने वाले हैं और विपत्तियों के समूह को नष्ट करने वाले हैं। हम सब देवताओं के समूह मन, वचन और कर्म से चतुराई की बान छोड़कर उन परमात्मा की शरण में आये हैं। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा| मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुरजूथा। | १८५/3,बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस जो भगवान संसार के (जन्म -मरण ) भावार्थ मुनियों के भय का नाश करने वाले हैं, के मन को आनंद देने वाले हैं और विपत्तियों के समूह को नष्ट करने वाले हैं। हम सब देवताओं के समूह मन, वचन और कर्म से चतुराई की बान छोड़कर उन परमात्मा की शरण में आये हैं। - ShareChat
#राम #🙏 जय हनुमान #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏हनुमान चालीसा🏵
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जेहिं उपाई त्रिबिध बनाई zfe संग सहाय न दूजा| सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा। | १८५/३क, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ- जिन्होंने (ईश्वर ने)बिना किसी   दूसरे संगी त्रिगुण या सहायक के अकेले ही (स्वयं को q विष्णु बनाकर बिना किसी और शिवरूप ब्रह्मा, उपादान -कारण के स्वयं ही सृष्टि का अभिन्ननिमि- त्तोपादान कारण बनकर) तीन प्रकार की सृष्टि उत्पन्न की, वे पापों का नाश करनेवाले भगवान हमारी सुधि लें। हम  न तो पूजा जानते और न 97 ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जेहिं उपाई त्रिबिध बनाई zfe संग सहाय न दूजा| सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा। | १८५/३क, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ- जिन्होंने (ईश्वर ने)बिना किसी   दूसरे संगी त्रिगुण या सहायक के अकेले ही (स्वयं को q विष्णु बनाकर बिना किसी और शिवरूप ब्रह्मा, उपादान -कारण के स्वयं ही सृष्टि का अभिन्ननिमि- त्तोपादान कारण बनकर) तीन प्रकार की सृष्टि उत्पन्न की, वे पापों का नाश करनेवाले भगवान हमारी सुधि लें। हम  न तो पूजा जानते और न 97 - ShareChat
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🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगत मोह मुनिबृंदा। निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं जयति सच्चिदानंदा। 1 18५/२(ख), बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस। भावार्थ-(इस लोक और परलोक के सब भोगों से) विरक्त,मोह से सर्वथा रहित ज्ञानी और मुनिवृंद भी अत्यंत अनुरागी (प्रेमी) बनकर जिनका दिन- रात ध्यान करते हैं और जिनके गुण का गान करते समूहों हैं, उन सच्चिदानंद ( भगवान)  की जय हो। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगत मोह मुनिबृंदा। निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं जयति सच्चिदानंदा। 1 18५/२(ख), बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस। भावार्थ-(इस लोक और परलोक के सब भोगों से) विरक्त,मोह से सर्वथा रहित ज्ञानी और मुनिवृंद भी अत्यंत अनुरागी (प्रेमी) बनकर जिनका दिन- रात ध्यान करते हैं और जिनके गुण का गान करते समूहों हैं, उन सच्चिदानंद ( भगवान)  की जय हो। - ShareChat
#🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #राम #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान
🙏🏻हनुमान जी के भजन - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः ೧ जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा | अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा। | १८५/२( क),बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस हे अविनाशी ( परमात्मा ) सबके हृदय भावार्थ में निवास करने वाले (अंतर्यामी) सर्वव्यापक, परम आनंद स्वरूप, अज्ञेय , इंद्रियों से परे,माया, से रहित मुकुंद (मोक्षदाता) , आपकी जय हो! जय हो! ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः ೧ जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा | अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा। | १८५/२( क),बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस हे अविनाशी ( परमात्मा ) सबके हृदय भावार्थ में निवास करने वाले (अंतर्यामी) सर्वव्यापक, परम आनंद स्वरूप, अज्ञेय , इंद्रियों से परे,माया, से रहित मुकुंद (मोक्षदाता) , आपकी जय हो! जय हो! - ShareChat
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🙏हनुमान चालीसा🏵 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई। सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई। । १८५/1 ,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस हे देवता और भावार्थ का पालन करने वाले! বৃথ্বী भेद आपकी लीला अद्भृत है, उसका कोई नहीं जानता।ऐसे जो स्वभाव से ही कृपालु और दीनदयालु हैं, वे हम पर कृपा करें। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई। सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई। । १८५/1 ,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस हे देवता और भावार्थ का पालन करने वाले! বৃথ্বী भेद आपकी लीला अद्भृत है, उसका कोई नहीं जानता।ऐसे जो स्वभाव से ही कृपालु और दीनदयालु हैं, वे हम पर कृपा करें। - ShareChat
#राम #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता| गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिंधुसुता प्रियकंता | U 18५(1/2)-बालकाण्ड, श्रीरामचरितमानस (सब देव स्तुति करते हैं ) हे देवताओं भावार्थ के स्वामी, सेवकों को सुख देने वाले शरणागत रक्षा करने वाले भगवान!आपकी जय हो! जय हो!! गो, विद्वानों का हित करने वाले, दुष्ट असुरों का विनाश करने वाले समुद्र की पुत्री श्रीलक्ष्मी जी)के प्रिय स्वामी! आपकी जय हो! ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता| गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिंधुसुता प्रियकंता | U 18५(1/2)-बालकाण्ड, श्रीरामचरितमानस (सब देव स्तुति करते हैं ) हे देवताओं भावार्थ के स्वामी, सेवकों को सुख देने वाले शरणागत रक्षा करने वाले भगवान!आपकी जय हो! जय हो!! गो, विद्वानों का हित करने वाले, दुष्ट असुरों का विनाश करने वाले समुद्र की पुत्री श्रीलक्ष्मी जी)के प्रिय स्वामी! आपकी जय हो! - ShareChat
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🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बिरंचि मन हरष तन সুনি नयन बह नीर। पुलकि अस्तुति करत जोरि कर सावधान मतिधीर। १८५,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस मेरी (शिवजी ) की बात सुनकर ब्रह्माजी के भावार्थ में बड़ा हर्ष हुआ, उनका तन पुलकित हो गया मन और नेत्रो से प्रेम के अश्रु लगे। तब वे बहने धीरबुद्धि ब्रह्माजी सावधान होकर हाथ जोड़कर स्तुति करने लगे। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बिरंचि मन हरष तन সুনি नयन बह नीर। पुलकि अस्तुति करत जोरि कर सावधान मतिधीर। १८५,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस मेरी (शिवजी ) की बात सुनकर ब्रह्माजी के भावार्थ में बड़ा हर्ष हुआ, उनका तन पुलकित हो गया मन और नेत्रो से प्रेम के अश्रु लगे। तब वे बहने धीरबुद्धि ब्रह्माजी सावधान होकर हाथ जोड़कर स्तुति करने लगे। - ShareChat
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🙏🏻हनुमान जी के भजन - ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः 3 अग जगमय सब रहित बिरागी | प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी। | मोर बचन सब के मन माना। साधु साधु करि ब्रह्म बखाना। | १८४/4,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस व्याप्त )होते भावार्थ -परमात्मा चराचरमय (सर्व हुए भी सबसे रहित है और विरक्त हैं, (उनकी कहीं आसक्ति नहीं है),प्रभु प्रेम से प्रकट होते हैं जैसे (अग्नि अव्यक्त रूप से सर्वत्र व्याप्त है, परंतु अग्नि fg किए  जहाँ उसके अरणिमंथनादि साधन जाते हैं वहां वह प्रकट हो जाती है। प्रकार सर्वत्र इसी व्याप्त भगवान भी प्रेम के साधन से प्रकट होते हैं ) मेरे (शिवजी )के ये वचन सबको प्रिय लगे।ब्रह्माजी ने साधु साधु कहकर सराहना की ತ 9 हनुमते रामदूताय नमः 3 अग जगमय सब रहित बिरागी | प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी। | मोर बचन सब के मन माना। साधु साधु करि ब्रह्म बखाना। | १८४/4,बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस व्याप्त )होते भावार्थ -परमात्मा चराचरमय (सर्व हुए भी सबसे रहित है और विरक्त हैं, (उनकी कहीं आसक्ति नहीं है),प्रभु प्रेम से प्रकट होते हैं जैसे (अग्नि अव्यक्त रूप से सर्वत्र व्याप्त है, परंतु अग्नि fg किए  जहाँ उसके अरणिमंथनादि साधन जाते हैं वहां वह प्रकट हो जाती है। प्रकार सर्वत्र इसी व्याप्त भगवान भी प्रेम के साधन से प्रकट होते हैं ) मेरे (शिवजी )के ये वचन सबको प्रिय लगे।ब्रह्माजी ने साधु साधु कहकर सराहना की - ShareChat
#राम #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏🏻हनुमान जी के भजन
राम - ತ 9 63#4 যামনুনাম নম: हरि ब्यापक सर्वत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहि मैं जाना। | RRRs देस काल दिसि माहीं| कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं। | श्रीरामचरितमानस १8४/3,बालकाण्ड भावार्थ - मैं तो यह जानता हूँ कि भगवान सब जगह समान रूप से व्यापक हैं, प्रेम से वे प्रकट हो जाते हैं।देश, काल, दिशा, विदिशा में बताओ ऐसी कौनसी जगह है जहाँ प्रभु न हो। ತ 9 63#4 যামনুনাম নম: हरि ब्यापक सर्वत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहि मैं जाना। | RRRs देस काल दिसि माहीं| कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं। | श्रीरामचरितमानस १8४/3,बालकाण्ड भावार्थ - मैं तो यह जानता हूँ कि भगवान सब जगह समान रूप से व्यापक हैं, प्रेम से वे प्रकट हो जाते हैं।देश, काल, दिशा, विदिशा में बताओ ऐसी कौनसी जगह है जहाँ प्रभु न हो। - ShareChat
#🙏🏻हनुमान जी के भजन #🙏शक्ति की महिमा- हनुमान🪔 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #राम
🙏🏻हनुमान जी के भजन - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जाके भगति जसि प्रीती| हृदयँ प्रभु तहँ प्रगट सदा तेहिं रीती। | तेहिं समाज गिरिजा मैं रहेऊँ । अवसर पाइ बचन एक कहेऊँ। | १८४/२, बालकाण्ड- श्रीरामचरितमानस भावार्थ- जिसके हृदय में जैसी भक्ति और प्रीति होती g है, भगवान उसके सदा उसी रीति से प्रकट होते हैं। (शिवजी ने कहा) हे पार्वती! उस समाज में मैं भी था। अवसर पाकर फिर मैने एक बात कही| ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः जाके भगति जसि प्रीती| हृदयँ प्रभु तहँ प्रगट सदा तेहिं रीती। | तेहिं समाज गिरिजा मैं रहेऊँ । अवसर पाइ बचन एक कहेऊँ। | १८४/२, बालकाण्ड- श्रीरामचरितमानस भावार्थ- जिसके हृदय में जैसी भक्ति और प्रीति होती g है, भगवान उसके सदा उसी रीति से प्रकट होते हैं। (शिवजी ने कहा) हे पार्वती! उस समाज में मैं भी था। अवसर पाकर फिर मैने एक बात कही| - ShareChat