Ravinder Bishnoi
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#🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #राम
🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगतपिता मैं सुत करि जाना। | समुझाई। তননী बहुबिधि ह जनि कतहुँ कहसि सुनु माई।। यह २०१/४, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस (माता कौशल्या से) स्तुति भी नहीं की भावार्थ जाती।वह डर गई कि मैंने जगत्पिता परमात्मा को पुत्र करके जाना। श्रीहरि ने माता को बहुत प्रकार से समझाया (और कहा)- हे माता! सुनो,यह बात कहीं पर कहना नहीं| ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगतपिता मैं सुत करि जाना। | समुझाई। তননী बहुबिधि ह जनि कतहुँ कहसि सुनु माई।। यह २०१/४, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस (माता कौशल्या से) स्तुति भी नहीं की भावार्थ जाती।वह डर गई कि मैंने जगत्पिता परमात्मा को पुत्र करके जाना। श्रीहरि ने माता को बहुत प्रकार से समझाया (और कहा)- हे माता! सुनो,यह बात कहीं पर कहना नहीं| - ShareChat
#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - हनुमते रामदूताय नमः ತ 9 तन पुलकित मुख बचन न आवा। मूदि चरननि सिरु नावा।। नयन बिसमयवंत देखि महतारी| भए बहुरि सिसुरूप खरारी। २०१/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी का दिव्य रूप देखकर) माताजी पुलकित हो गया।तब आंखें मूंदकर उसने का तन श्रीरामचन्द्र जी के चरणों में सिर नवाया। माताजी को आश्चर्यचकित देखकर खर के शत्रु श्रीराम जी फिर बाल रूप में आ गए। हनुमते रामदूताय नमः ತ 9 तन पुलकित मुख बचन न आवा। मूदि चरननि सिरु नावा।। नयन बिसमयवंत देखि महतारी| भए बहुरि सिसुरूप खरारी। २०१/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी का दिव्य रूप देखकर) माताजी पुलकित हो गया।तब आंखें मूंदकर उसने का तन श्रीरामचन्द्र जी के चरणों में सिर नवाया। माताजी को आश्चर्यचकित देखकर खर के शत्रु श्रीराम जी फिर बाल रूप में आ गए। - ShareChat
#🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #राम #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः देखी माया सब बिधि गाढ़ी| अति सभीत जोरें कर ठाढ़ी। देखा जीव नचावइ जाही। देखी भक्ति जो छोरइ ताही। | २०१/२, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(माता कौशल्या जी ने) सब प्रकार से बल- वती माया को देखा।वह माया भगवान के सामने अत्यंत भयभीत होकर हाथ जोड़कर खड़ीहै।जीव को देखा जिसे माया नचाती है और फिर भक्ति को देखा जो उस जीव को माया से छुड़ा देती है। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः देखी माया सब बिधि गाढ़ी| अति सभीत जोरें कर ठाढ़ी। देखा जीव नचावइ जाही। देखी भक्ति जो छोरइ ताही। | २०१/२, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -(माता कौशल्या जी ने) सब प्रकार से बल- वती माया को देखा।वह माया भगवान के सामने अत्यंत भयभीत होकर हाथ जोड़कर खड़ीहै।जीव को देखा जिसे माया नचाती है और फिर भक्ति को देखा जो उस जीव को माया से छुड़ा देती है। - ShareChat
#राम #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺
राम - 53#7</#&7/4 =#: ತ 9 अगनित रबि ससि सिव चतुरानन। बहु गिरि सरित सिंधु महि कानन।। काल कर्म गुन ग्यान सुभाऊ। सोउ देखा जो सुना न काऊ। | २०1/1 , बालकाण्डश्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी के दिव्य रूप में माता ने) अगणित सूर्य, चंद्रमा ,शिव, ब्रह्मा, बहुत से पर्वत, नदियां, समुद्र, पृथ्वी, काल, कर्म, गुण, ज्ञान और स्वभाव देखे जो कभी सुने भी न थे। 53#7</#&7/4 =#: ತ 9 अगनित रबि ससि सिव चतुरानन। बहु गिरि सरित सिंधु महि कानन।। काल कर्म गुन ग्यान सुभाऊ। सोउ देखा जो सुना न काऊ। | २०1/1 , बालकाण्डश्रीरामचरितमानस भावार्थ -(श्रीराम जी के दिव्य रूप में माता ने) अगणित सूर्य, चंद्रमा ,शिव, ब्रह्मा, बहुत से पर्वत, नदियां, समुद्र, पृथ्वी, काल, कर्म, गुण, ज्ञान और स्वभाव देखे जो कभी सुने भी न थे। - ShareChat
#श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏 जय हनुमान #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम
श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री মন্তুসন रामदूताय नमः देखरावा मातहि निज अद्भुत रूप अखंड। रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मण्ड| २०१ , बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस फिर उन्होंने (बालक श्रीराम जी ने) ম্ানাথ माता कौशल्या जी को अपना अखंड, अद्रुत रूप दिखाया। जिसके एक एक रोम में करोड़़ों ब्रह्मांड लगे हुए हैं। ऊँ श्री মন্তুসন रामदूताय नमः देखरावा मातहि निज अद्भुत रूप अखंड। रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मण्ड| २०१ , बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस फिर उन्होंने (बालक श्रीराम जी ने) ম্ানাথ माता कौशल्या जी को अपना अखंड, अद्रुत रूप दिखाया। जिसके एक एक रोम में करोड़़ों ब्रह्मांड लगे हुए हैं। - ShareChat
#🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान #राम #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः इहाँ उहाँ दुई बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा। | देखि राम जननी अकुलानी| प्रभु हॅँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी। | २००/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस (माता कौशल्या सोचने लगी)यहाँ और भावार्थ वहाँ मैंने दो बालक देखे।यह मेरी बुद्धि का भ्रम है या और कोई विशेष कारण है? बालक प्रभु श्री रामचन्द्रजी माताजी को घबड़ाई हुई देखकर मधुर मुस्कान से हंस दिए। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः इहाँ उहाँ दुई बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा। | देखि राम जननी अकुलानी| प्रभु हॅँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी। | २००/४, बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस (माता कौशल्या सोचने लगी)यहाँ और भावार्थ वहाँ मैंने दो बालक देखे।यह मेरी बुद्धि का भ्रम है या और कोई विशेष कारण है? बालक प्रभु श्री रामचन्द्रजी माताजी को घबड़ाई हुई देखकर मधुर मुस्कान से हंस दिए। - ShareChat
#राम #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः a R गै जननी पहिं भयभीता| देखा बाल तहाँ पुनि सूता। | आई देखा सुत सोई। बहुरि हृदयँ कंप मन धीर न होई।। २००/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस माता भयभीत होकर (पालने में सोया भावार्थ था, यहां किसने बैठा दिया ,इस बात से डरकर ) कुत्रे पास गयी।वहाँ पालने में बालक (श्रीराम जी) सोया देखा। फिर आकर पूजा स्थल पर देखा कि पुत्र उनके हृदय में कंप होने लगा वहां भोजन कर रहे हैं और मन में धीरज नहीं होता। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः a R गै जननी पहिं भयभीता| देखा बाल तहाँ पुनि सूता। | आई देखा सुत सोई। बहुरि हृदयँ कंप मन धीर न होई।। २००/३, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस माता भयभीत होकर (पालने में सोया भावार्थ था, यहां किसने बैठा दिया ,इस बात से डरकर ) कुत्रे पास गयी।वहाँ पालने में बालक (श्रीराम जी) सोया देखा। फिर आकर पूजा स्थल पर देखा कि पुत्र उनके हृदय में कंप होने लगा वहां भोजन कर रहे हैं और मन में धीरज नहीं होता। - ShareChat
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श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा | आपु गई जहॅँ पाक बनावा। | बहुरि मातु चलि आई। तहवाँ भोजन करत देख सुत जाई।। २००/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस माता कौशल्या जी ने) पूजा करके भावार्थ नैवेद्य चढ़ाया और स्वयं वहाँ गई जहाँ रसोई बनाई गई थी। फिर माता वहीं पूजा के स्थान पर आती है तो आने पर पुत्र को (इष्टदेव को चढ़ाया हुआ नैवेद्य का ) भोजन करते देखा। ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा | आपु गई जहॅँ पाक बनावा। | बहुरि मातु चलि आई। तहवाँ भोजन करत देख सुत जाई।। २००/२, बालकाण्ड -श्रीरामचरितमानस माता कौशल्या जी ने) पूजा करके भावार्थ नैवेद्य चढ़ाया और स्वयं वहाँ गई जहाँ रसोई बनाई गई थी। फिर माता वहीं पूजा के स्थान पर आती है तो आने पर पुत्र को (इष्टदेव को चढ़ाया हुआ नैवेद्य का ) भोजन करते देखा। - ShareChat
#राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏हनुमान चालीसा🏵 #🙏 जय हनुमान #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
राम - ऊँ श्री কন্তুমন रामदूताय नमः एक बार जननीं अन्हवाए पौढ़ाए। करि सिंगार पलनाँ அ निज कुल इष्टदेव भगवाना| पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना २००/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस एक बार माताजी ने श्री रामचन्द्र जी को भावार्थ स्नान कराया और श्रृंगार करके पालने पर पौढ़ा फिर अपने कुल के इष्टदेव भगवान की पूजा दिया लिए के स्नान किया। ऊँ श्री কন্তুমন रामदूताय नमः एक बार जननीं अन्हवाए पौढ़ाए। करि सिंगार पलनाँ அ निज कुल इष्टदेव भगवाना| पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना २००/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस एक बार माताजी ने श्री रामचन्द्र जी को भावार्थ स्नान कराया और श्रृंगार करके पालने पर पौढ़ा फिर अपने कुल के इष्टदेव भगवान की पूजा दिया लिए के स्नान किया। - ShareChat
#🙏 जय हनुमान #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #🙏हनुमान चालीसा🏵 #राम
🙏 जय हनुमान - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः प्रेम मगन कौशल्या निसि दिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।। २००, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस और ঈম ম মনে ব্ধীথাল্মা তী হান भावार्थ दिन का बीतना नहीं जानती थीं। पुत्र के स्नेह वश माताजी उनके बाल चरित्रों का गान किया करतीं থী | ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः प्रेम मगन कौशल्या निसि दिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।। २००, बालकाण्ड  श्रीरामचरितमानस और ঈম ম মনে ব্ধীথাল্মা তী হান भावार्थ दिन का बीतना नहीं जानती थीं। पुत्र के स्नेह वश माताजी उनके बाल चरित्रों का गान किया करतीं থী | - ShareChat