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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - मशरूफ रहने का अंदाज़ तनहा ना कर दे ग़ालिब, గ్ౌగే रिश्ते फुर्सत के नहीं तवज्जो के मोहताज़ होते हैं.../ मिर्ज़ा ग़ालिब 1797/6 ೧0 मशरूफ रहने का अंदाज़ तनहा ना कर दे ग़ालिब, గ్ౌగే रिश्ते फुर्सत के नहीं तवज्जो के मोहताज़ होते हैं.../ मिर्ज़ा ग़ालिब 1797/6 ೧0 - ShareChat