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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी दुनिया में अपने और पराए के बीच की लकीर अक्सर हमारी उम्मीदें खींचती हैं। जिस दिन हम उम्मीद का दूसरे पर डाल है तब जा कर रिश्तों को बोझ एक निभाने की असलियत का पता चलता है..!! दुनिया की भीड़ में अपने तो बहुत मिले, पर जब वक्त ने करवट ली॰तो समझ आया कि कई चेहरे सिर्फ अपनेपन का पहने हुए थे..!! नकाब रिश्तों मे खटास पैदा हुई या टूटे वह किसी पराए की वजह से नहीं, बल्कि अपनों से जुड़ी उन बेहिसाब उम्मीदों की वजह से टूटा जो हम ताउम्र  उनके प्रति uId కైౌ ' थे..!! सबसे बड़ी तन्हाई वह नहीं जब आप अकेले हों, बल्कि वह है जब आप अपने ही लोगों के बीच हों और फिर भी खुद को अनसुना और पराया पराया जब चोट देता है तो घाव होता है, महसूस करें॰ लेकिन जब अपना कोई घाव दे तो रूह छलनी हो जाती है, पराए से तो हम लड़ सकते हैं, पर अपनों के सामने अक्सर हम खामोश रह जाते हैं .!! सच तो यह है कि वह नहीं जो सिर्फ सुख में साथ हो, बल्कि वह है अपना जो आपके मौन को भी पढ़ ले और जिसे आपको अपनी तकलीफ समझाने के लिए शब्दों का सहारा न ][4$1 मेरी खामोशी लेगी दुनिया में अपने और पराए के बीच की लकीर अक्सर हमारी उम्मीदें खींचती हैं। जिस दिन हम उम्मीद का दूसरे पर डाल है तब जा कर रिश्तों को बोझ एक निभाने की असलियत का पता चलता है..!! दुनिया की भीड़ में अपने तो बहुत मिले, पर जब वक्त ने करवट ली॰तो समझ आया कि कई चेहरे सिर्फ अपनेपन का पहने हुए थे..!! नकाब रिश्तों मे खटास पैदा हुई या टूटे वह किसी पराए की वजह से नहीं, बल्कि अपनों से जुड़ी उन बेहिसाब उम्मीदों की वजह से टूटा जो हम ताउम्र  उनके प्रति uId కైౌ ' थे..!! सबसे बड़ी तन्हाई वह नहीं जब आप अकेले हों, बल्कि वह है जब आप अपने ही लोगों के बीच हों और फिर भी खुद को अनसुना और पराया पराया जब चोट देता है तो घाव होता है, महसूस करें॰ लेकिन जब अपना कोई घाव दे तो रूह छलनी हो जाती है, पराए से तो हम लड़ सकते हैं, पर अपनों के सामने अक्सर हम खामोश रह जाते हैं .!! सच तो यह है कि वह नहीं जो सिर्फ सुख में साथ हो, बल्कि वह है अपना जो आपके मौन को भी पढ़ ले और जिसे आपको अपनी तकलीफ समझाने के लिए शब्दों का सहारा न ][4$1 - ShareChat