. “ज्ञान का घमण्ड”
गंगा को पार करने के लिए कई विद्वान नाव में सवार हुए। नाव धीरे-धीरे विद्वानों को लेकर किनारे की तरफ बढ़ रही थी। उनमें से एक विद्वान ने नाविक से पूछा– ‘क्या तुम पढ़े लिखे हो?’
नाविक ने कहा– ‘कैसी पढ़ाई लिखाई साहब, बस मुझे तो यह नाव चलानी आती है।’
विद्वान ने नाविक से पूछा– ‘क्या तुमने कभी भूगोल पढ़ा है?’
नाविक ने कहा– ‘यह भूगोल क्या होता है?’
विद्वान ने अपनी विद्या का प्रदर्शन करते हुए भला तुम्हें कैसे पता होगा तुम्हारी तो एक चौथाई जिन्दगी पानी में ही गुजर गयी।
इसके बाद दूसरे विद्वान ने नौका वाले से एक और प्रश्न किया– ‘इतिहास के बारे में जानते हो थोड़ा बहुत! बताओ बाबर कौन था?’
नाविक ने अपनी अज्ञानता जाहिर करते हुए कहा– ‘मुझे इसकी भी जानकारी नहीं है।’
विद्वान ने कहा– ‘फिर तो तुम्हारी आधी जिन्दगी ही पानी में बर्बाद हो गयी।’
इसके बाद विद्या के अभिमान में चूर हुए विद्वान ने एक और प्रश्न नाविक से पूछा– ‘रामायण और महाभारत के बारे में तो जानते होंगे?’
बेचारा नाविक क्या कहता उसने इशारे में ना कहा। ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पढ़ने के लिये हमारा फेसबुक पेज ‘श्रीजी की चरण सेवा’ को लाईक एवं फॉलो करें। अब आप हमारी पोस्ट व्हाट्सएप चैनल पर भी देख सकते हैं। चैनल लिंक हमारी फेसबुक पोस्टों में देखें। तभी विद्वान मुस्कराते हुए बोला– ‘फिर तो तुम्हारी सारी जिन्दगी पानी में ही बर्बाद हो गयी है।
कुछ देर बाद अचानक गंगा में पानी का बहाव तेज होने लगा नाविक ने सभी नाव में सवार विद्वानों को तूफान के आने की चेतावनी दी।
नाविक ने सभी विद्वानों से कहा– ‘बहुत तेज तूफान आने वाला है और यह नाव कभी भी डूब सकती है। क्या आप सभी को तैरना आता है?’
सभी विद्वानों ने घबराते हुए एक साथ बोला नहीं-नहीं हमें तैरना नहीं आता।’
नाव चलाने वाले ने स्थिति को भांपते हुए कहा– ‘अब तो महाशय आप लोगों की सारी जिन्दगी पानी में ही चली जायेगी।’
कुछ ही देर में तेज तूफान आने से नाव डूबने लगी नाविक तेजी से पानी कूद गया और तैरता-तैरता किनारे तक पहुँच गया परन्तु सभी विद्वान पानी में बह कर डूब गए।
ज्ञान वाद-विवाद के लिए नहीं है और ना ही दूसरों को नीचा दिखाने के लिए है। कुछ लोग ज्ञान के अभिमान में इस बात को भूल जाते हैं और दूसरों के साथ अपने ज्ञान का घमण्ड करने लगते हैं।
० ० ०
जय जय श्री राधे🏵️🌺 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️



