#जय श्री हनुमान #जय श्री राम
लंका युद्ध के पश्चात् भगवान राम, सीता जी और लक्ष्मण जी माता अंजनी के पास पहुँचे, जो एक पर्वत पर तपस्या में लीन थीं। अपने पुत्र हनुमान को इतने वर्षों बाद सामने देखकर माता अंजनी का हृदय वात्सल्य से भर गया। हनुमान जी भी एक छोटे बालक की भाँति अपनी माता की गोद में चढ़ गए और उनसे लिपट गए। यह दृश्य इतना सुखद था कि भगवान राम और माता सीता के नेत्र भी सजल हो गए। माता अंजनी ने स्वयं अपने हाथों से भोजन तैयार कर प्रभु श्री राम को पवाया।
प्रसाद ग्रहण करने के बाद माता अंजनी ने लंका युद्ध के बारे में पूछा। हनुमान जी ने बड़े उत्साह के साथ सुंदरकांड से लेकर लंका कांड तक की पूरी कथा सुनाई—कैसे उन्होंने समुद्र लांघा, लंका जलाई, संजीवनी बूटी लाए और रावण का वध हुआ। परंतु यह सब सुनकर माता अंजनी प्रसन्न होने के बजाय क्रोधित हो गईं।
उन्होंने हनुमान जी से कहा कि उन्हें यह सुनकर संशय और लज्जा हो रही है कि उनके जैसे पुत्र के रहते हुए भगवान राम को इतना परिश्रम करना पड़ा। माता ने कहा कि हनुमान की परवरिश ऐसी हुई थी कि वह अकेला ही अपने एक प्रहार से पूरी लंका को रसातल (पाताल) में भेज सकता था और सीता जी को ससम्मान वापस ला सकता था। उनके रहते सेतु बनाने की आवश्यकता क्या थी? लक्ष्मण जी को शक्ति कैसे लग गई? माता को लगा कि हनुमान ने अपनी पूरी शक्ति का उपयोग प्रभु की सेवा में नहीं किया।
जब लक्ष्मण जी को लगा कि माता अंजनी शायद हनुमान जी के बल का कुछ ज्यादा ही बखान कर रही हैं, तब माता अंजनी के भीतर का वात्सल्य दूध बनकर बहने लगा। उनके दुग्ध की मात्र एक बूंद जब एक पर्वत खंड पर गिरी, तो वह विशाल पर्वत बीच से फट गया और वहां ज्वालामुखी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। पृथ्वी डगमगाने लगी। माता ने स्पष्ट किया कि जिस दूध की एक बूंद यह पृथ्वी और पर्वत सहन नहीं कर सकते, उस दूध को पीकर हनुमान बड़ा हुआ है, इसलिए उसकी शक्ति असीमित है।
अंत में भगवान राम ने माता अंजनी को शांत करते हुए कहा कि हनुमान जी के बल और बुद्धिमत्ता पर किसी को कोई संदेह नहीं है। उन्होंने बताया कि हनुमान जी में सबसे बड़ा गुण यह है कि वे अपने बल को अपना नहीं बल्कि 'राम का प्रताप' मानते हैं। वे सब कुछ कर सकते थे, परंतु उन्होंने मर्यादा का पालन किया और केवल उतनी ही शक्ति दिखाई जितनी उन्हें आज्ञा दी गई थी। हनुमान जी अपनी समस्त योग्यताओं के स्वामी स्वयं न बनकर, उन्हें अपने प्रभु के चरणों में समर्पित रखते हैं। यह सुनकर माता अंजनी का हृदय गर्व और संतोष से भर गया।
राधे राधे 🙏


