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#self #आत्मनिर्भर #👌 आत्मविश्वास #📖 कविता और कोट्स✒️
self - खुद से মুলাক্ান यहीं से होती है॰ भीड़ बहुत है इस ज़माने में , साथ बहुत हैं हर अफ़साने में, फिर भी एक तन्हाई है ऐसी , जो बस मिलती है खुद से मिलने में। भागते-भागते थक सा गया हूँ, ख्वाहिशों के पीछे भटक सा गया हूँ, अब रुककर देखा है जब खुद को, जाना, मैं कितना छूट सा गया हूँ किसी से कोई शिकवा है, 7 न किसी से कोई गिला है जो मिला, जैसा मिला, ठीक मिला, जो है, वही मेरा सिलसिला है अब खामोशी भी अब अच्छी लगती है अकेले में बातें भी सच्ची लगती हैं, दर्पण में जब आँखें मिलती हैं, तब महसूस होता है - ज़िन्दगी सच्ची लगती है। कोई जल्दबाज़ी है अब न कोई अधूरापन बाकी है, न जो हूँ, जैसा हूँ, अच्छा हूँ बस, यही एहसास ही मेरी सबसे बड़ी कमाई है। खुद से মুলাক্ান यहीं से होती है॰ भीड़ बहुत है इस ज़माने में , साथ बहुत हैं हर अफ़साने में, फिर भी एक तन्हाई है ऐसी , जो बस मिलती है खुद से मिलने में। भागते-भागते थक सा गया हूँ, ख्वाहिशों के पीछे भटक सा गया हूँ, अब रुककर देखा है जब खुद को, जाना, मैं कितना छूट सा गया हूँ किसी से कोई शिकवा है, 7 न किसी से कोई गिला है जो मिला, जैसा मिला, ठीक मिला, जो है, वही मेरा सिलसिला है अब खामोशी भी अब अच्छी लगती है अकेले में बातें भी सच्ची लगती हैं, दर्पण में जब आँखें मिलती हैं, तब महसूस होता है - ज़िन्दगी सच्ची लगती है। कोई जल्दबाज़ी है अब न कोई अधूरापन बाकी है, न जो हूँ, जैसा हूँ, अच्छा हूँ बस, यही एहसास ही मेरी सबसे बड़ी कमाई है। - ShareChat