Ashutosh shukla
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शराबी की मधुशाला १. कोई आता झूम-झूम के, चकित हों नर-नारी बाला, उलझन में हैं सभी देख के, झूमता क्यों ये मतवाला, एक महाशय ने फिर आकर बतलाया इसका कारण, मदिरा पीने की खातिर यह गया हुआ था मधुशाला। २. चलते-फिरते गोते खाता, क्यों ये झंझट है पाला, होश नहीं है किसी बात का, जोखिम में खुद को डाला, राह लग रही है मुश्किल कितनी उस बेचारे को, सोच रहा है मन ही मन में, क्यों मैं गया था मधुशाला... ३. ठौर-ठिकाना नहीं है कोई, कहीं भी पाता वो ताला, अपनों से भी हुआ पराया पछताता मदिरावाला, घड़ी-घड़ी यह सोचता फिरता कहाँ पाऊँगा आश्रय मैं, गया मज़े था करने लेकिन आफ़त बन गयी मधुशाला... ४. इस पर भी न समझ रहा वो, बन बैठा भोला-भाला, सबकी सुनता निस-दिन पर वो बुद्धि में है पर्दा डाला, अब करेगा आगे क्या जाने सोच नहीं पाता है वो, एक विचार ही करता रहता, जाऊँ कब मैं मधुशाला... ५. आख़िर फिर से चला गया वो, थका है समझाने वाला, गलत राह पर है चल निकला, बुने कुकर्मों का जाला, वही काम करता है जाके भूल के सबकी बातों को, मन में लालच पैदा करके उसे लुभाती मधुशाला। ६. भाव जागते उसके अंदर, जाने कर्म है ये काला, पर फिर भी उसका दिल करता, जपूँ मैं मदिरा की माला, संकट में फँस गया बेचारा, पड़ गया है असमंजस में, छोड़ न पाता प्याले को वो रस है देती मधुशाला... ७. खुद से है वो पता लगाता, कोई न बतलाने वाला, हल न विपदा का है निकलता, खुद को विकटता में ढाला, विद्वानों से पूछता फिरता समाधान इस उलझन का, पैर में जंजीरों की भाँति पीछे पड़ गयी मधुशाला। ८. समझ चुका है वो अब सब-कुछ, नहीं है सिखलाने वाला, खुश होकर मद-मस्त है चलता, कोई न कुछ कहने वाला, छोड़ के आया है अवगुण वो उसी मधु के द्वारे पर, ठान लिया संकल्प है करता, कभी न जाऊँ मधुशाला... ९. अपनाया फिर सबने उसको, बना है वो अब दिलवाला, क्षमा मांगता है वो सबसे, बना वो अब चाहत वाला, कहता फिरता सबसे है वो मुझको ना ठुकराओ तुम, कान पकड़ के कहता हूँ मैं कभी ना देखूँ मधुशाला... १०. कहता अब वो सारे जग से, व्यसन बड़ा झगड़ेवाला, घर की होती बर्बादी है, कुल को नष्ट करने वाला, हाथ जोड़ के करूँ प्रार्थना, कथन मान लो मेरा ये, सुखी रहोगे हरदम जो ना जाओगे तुम मधुशाला... #🤣मधुशाला🤣 #Madhushala
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