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600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है! कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ज्येष्ठ पूर्णिमा को सशरीर प्रकट हुए और इसके साक्ष्य आज भी काशी में मौजूद हैं। जिन्हें संत रामपाल जी महाराज ने उजागर किया है। #न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा 2Days Left Kabir Prakat Diwas #💫ध्यान के मंत्र🧘‍♂️
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