600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ज्येष्ठ पूर्णिमा को सशरीर प्रकट हुए और इसके साक्ष्य आज भी काशी में मौजूद हैं। जिन्हें संत रामपाल जी महाराज ने उजागर किया है।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
2Days Left Kabir Prakat Diwas
#💫ध्यान के मंत्र🧘♂️
"कबीर साहेब प्रकट दिवस" वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग में आया।।
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#🙏कर्म क्या है❓
क्या वेद बता सकते हैं भगवान कौन है?
जी हाँ, और जवाब है कबीर साहेब!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा कभी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता, वह शिशु रूप में प्रकट होता है। वही कबीर साहेब हैं।
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#🕉️सनातन धर्म🚩
अजन्मा परमेश्वर, जन्म-मृत्यु से परे कबीर साहेब
कबीर साहेब के न कोई माता-पिता हैं, न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा हैं, जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते हैं।
ना मेरा जन्म, ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा तहाँ जुलाहे ने पाया।
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#🙏गुरु महिमा😇
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं। संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में कबीर साहेब प्रकट दिवस, 27-29 जून को भव्य रूप से मनाया जा रहा है। आइए, सब मिलकर इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनें। #न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
♦️ तोप से गोले दागना
शेखतकी ने कबीर साहेब पर लगातार 12 घंटे (4 पहर) तक तोप से गोले चलवाए। लेकिन एक भी गोला उनके पास तक नहीं पहुंचा। अंत में कबीर साहेब वहां से अंतर्ध्यान होकर संत रविदास जी की कुटिया में प्रकट हो गए।
#परमात्मा_पर_किये_गए_जुल्म
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#🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇
♦️ उबलते तेल की कढ़ाई में डालना
शेखतकी ने हजारों लोगों के सामने कबीर साहेब को खौलते हुए तेल के कड़ाहे में डाल दिया। लेकिन परमात्मा कबीर जी उसमें ऐसे आराम से बैठे रहे जैसे ठंडे जल में बैठे हों; उन्हें खरोंच तक नहीं आई।
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♦️ गले में जहरीला सांप डालना
कबीर जी जब सत्संग कर रहे थे, तब शेखतकी के आदेश पर एक सिपाही ने उनके गले में खतरनाक जहरीला सांप डाल दिया। लेकिन गले में जाते ही वह सांप सुंदर फूलों की माला बन गया।
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#🙏कर्म क्या है❓ #🕉️सनातन धर्म🚩
♦️ तलवारों से वार करना
शेखतकी ने रात के समय कुटिया में सो रहे कबीर साहेब की हत्या के लिए गुंडों से बेतहाशा तलवारें चलवाईं। लेकिन कबीर जी का शरीर अविनाशी और नूरी होने के कारण तलवारें उनके शरीर के आर-पार निकल गईं।
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♦️ मदमस्त खूनी हाथी के आगे डालना
कबीर साहेब के हाथ-पैर बांधकर उन्हें शराब पिलाए गए एक हाथी के आगे फेंक दिया गया। लेकिन हाथी को कबीर जी की जगह एक भयानक बब्बर शेर दिखाई दिया, जिसे देखकर हाथी डरकर उल्टे पैर भाग गया।
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#💫ध्यान के मंत्र🧘♂️



