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2122 2122 2122 वो फरेबो को सजा कर ही मिली थी ज़िन्दगी मेरी वहीँ पर बस थमी थी शासवत है आज भी वो मेरे दिल में इश्क की मेरे इबादत की जमी थी छाले दिल पे इस लिये आते नज़र है आरजू दिल की यहीं मेरी जली थी मिलसका नाआज तकजिसका हमें हल वो मेंरी और उसकी आशिकी थी वो अगर कर दे दुआ मिल जाये ख़ुशी सोच सजदे में नज़र मेरी झुकी थी देख लिया है हर किसी को आजमाकर इस जहाँ में बस वही सबसे भली थी वक़्त - ऐ - रुखसत पे रो पाये नहीं हम आँख के आँसू छुपाना बेबसी थी ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 4/4/2017 #शायरी #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह #📜मेरी कलम से✒️
शायरी - 3$ 3{ छुपाना बेबसी थी वो फरेबो को ٩ मेरी बरहीं पर बस थशी रथी जिन्दगी शासवत है आज भीवो मेरे दिलमें % கி # इबादत की जमी थी छाले दिल पे इस लियेआते नज़र है आरजू दिल की यही मेरी जली थी मिलसका नाआज तकजिसका हमें हल वो   मेंरी और ' उसकी आशिकी थी वो अगर कर दे दुआ मिल जाये ख़ुशी ग में नज़र मेरी झुकी थी सोच सजदे देख लिया हैहरकिसी को आजमाकर ؟ इस जहाँ में बस वही सबसे भली थी वक़्त - ऐ - रुखसत पे रो पाये नहीं हम লে 3াঁবু के आँख छुपाना   बेबसी थी ( লঃসতা নানানী 3$ 3{ छुपाना बेबसी थी वो फरेबो को ٩ मेरी बरहीं पर बस थशी रथी जिन्दगी शासवत है आज भीवो मेरे दिलमें % கி # इबादत की जमी थी छाले दिल पे इस लियेआते नज़र है आरजू दिल की यही मेरी जली थी मिलसका नाआज तकजिसका हमें हल वो   मेंरी और ' उसकी आशिकी थी वो अगर कर दे दुआ मिल जाये ख़ुशी ग में नज़र मेरी झुकी थी सोच सजदे देख लिया हैहरकिसी को आजमाकर ؟ इस जहाँ में बस वही सबसे भली थी वक़्त - ऐ - रुखसत पे रो पाये नहीं हम লে 3াঁবু के आँख छुपाना   बेबसी थी ( লঃসতা নানানী - ShareChat