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212 212 212 जीस्त तेरी नज़र हो गयी ज़िन्दगी यूँ बसर हो गयी दर्द दिल का यूँ बढ़ता गया हर दुआ बे असर हो गयी जिक्र हुआ जहाँ भी तेरा ये निगाहे उधर हो गयी जब गज़ल गुनगुनाई तेरी महफ़िलो पे कहर हो गयी बैठे पहलू में जब वो मेरे शब्-ऐ-गम बेफिकर हो गयी सोये थे उनके बाहों में हम शाम से कब सहर हो गयी हो गया वो जुदा हमसे जब जीस्त तब से ज़हर हो गयी ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 29/1/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - हर दुआ बे असर ৪ী যাযী जिन्द तेरी गयी নড়াং ৪ী ज़िन्दगी यूँ गुज़र हो दर्द दिल का यूँ बढ़ता गया हर दुआ बेअसर हो गयी जिक्र हुआ जहाँ भी तेरा 1 F೯ ತಳ ೯ T೫ 4 गुनगुनाई मेरी जब गज़ल ؟ महफ़िलो पे कहर हो गयी फेजवबर हो गमेयी बैठे पहलू में शब् ऐ ्गम बेफिकर ೯ ল सोये थे उनके बाहों में हम शाम से कब सहरहो गयी हो गया वो जुदा हमसे जब जिन्द तब से ज़हर हो गयी ( लक्ष्मण दावानी हर दुआ बे असर ৪ী যাযী जिन्द तेरी गयी নড়াং ৪ী ज़िन्दगी यूँ गुज़र हो दर्द दिल का यूँ बढ़ता गया हर दुआ बेअसर हो गयी जिक्र हुआ जहाँ भी तेरा 1 F೯ ತಳ ೯ T೫ 4 गुनगुनाई मेरी जब गज़ल ؟ महफ़िलो पे कहर हो गयी फेजवबर हो गमेयी बैठे पहलू में शब् ऐ ्गम बेफिकर ೯ ল सोये थे उनके बाहों में हम शाम से कब सहरहो गयी हो गया वो जुदा हमसे जब जिन्द तब से ज़हर हो गयी ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
12122 12122 मेरा कभी जो हुआ नहीं है मगर वो दिल से जुदा नहीं है समझ न पाया जो दर्द दिल का नज़र से वो भी गिरा नहीं है गुजर गया कारवाँ जहाँ से गुबार कुछ भी बचा नहीं है ज़हर घुला मौत का फिंजा में लबो पे फिर भी गिला नहीं है उदासियाँ कहकहों में छुपा ये दर्द - ऐ - दिल कहा नहीं है दरारें ऐसी पड़ीं दिलों में सगा भी कोई रहा नही है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 15/3/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 12122 12122 मेरा कभी जो हुआ नहीं है मधरवो दिल से जुदा नहीं है समझ न पाया जो दर्द दिल का नज़र से॰वो भी गिरा नहीं है गुजर जहाँ से I कारवा बचा नहीं है गु़बार कुछ भी ज़हर घुला मौतका फिंजा में लबो पे फिरभी गिला नहीं है उदासियाँ में< छुपा कहकहों ये दर्द - ऐ - दिल कहा नहीं है ऐसी புS दिलों में R रहा नही है कोई भी समा ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 15/3/2018 12122 12122 मेरा कभी जो हुआ नहीं है मधरवो दिल से जुदा नहीं है समझ न पाया जो दर्द दिल का नज़र से॰वो भी गिरा नहीं है गुजर जहाँ से I कारवा बचा नहीं है गु़बार कुछ भी ज़हर घुला मौतका फिंजा में लबो पे फिरभी गिला नहीं है उदासियाँ में< छुपा कहकहों ये दर्द - ऐ - दिल कहा नहीं है ऐसी புS दिलों में R रहा नही है कोई भी समा ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 15/3/2018 - ShareChat
22 22 22 22 कण कण में बस तू ही तू है साँसों में तेरी ही रू है देखूँ जिधर आये तू नजर छाया कैसा ये जादू है कर रही मदहोश जो हमको तेरी ही तो वो खुशबू है तेरी बाहों के घेरे में गुजरे शामें ये आरजू है बहक रहा अब ये मौसम भी चल पड़ी प्यार की वो लू है हम साया बन के तू जानिब लिपटा जिस्म से हू ब हूँ है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/12/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 22 22 22 22 कण कण में बस तू ही तू है గ में সাঁসী ही रू है देखूँ जिधर आये तू नजर कैसा లౌ है जादू छाया कररही मिद्शीनो हमको तेरी ही॰ तोवो खुशबू है के   घेरे   में तेरी 161 गुजरे शामें आरजू है 4 बहक रहा अबये मौसम भी की वो लू है 495/ ந के तूजातिब हम साया बन लिपटा जिस्म सेहूब हूँ ह लक्ष्मण दावानी O SfRUalera 22 22 22 22 कण कण में बस तू ही तू है గ में সাঁসী ही रू है देखूँ जिधर आये तू नजर कैसा లౌ है जादू छाया कररही मिद्शीनो हमको तेरी ही॰ तोवो खुशबू है के   घेरे   में तेरी 161 गुजरे शामें आरजू है 4 बहक रहा अबये मौसम भी की वो लू है 495/ ந के तूजातिब हम साया बन लिपटा जिस्म सेहूब हूँ ह लक्ष्मण दावानी O SfRUalera - ShareChat
22 22 22 22 जीस्त से दूर जो तम हो जायें दिल की टीसें कम हो जायें दर्द की झील बनी हैं आँखें फिर नअब नया गम हो जायें रह गये जख्म दिल के ताजे जख्मो की मरहम हो जाये ज़िन्दगी मिलीजो दो पल की उसका कुछ मातम हो जाये बदल गया हयाते फलसफा फिर चश्म न पुरनम हो जाये पलकों पर ठहर गये झरने आँखे कहीं न नम हो जायें ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 13/3/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 22 22 22 22 जीस्त से दूर जो तम हो जायें दिल की टीसें कम हो जायें दर्द की झील बनी हैं आँखें फिर नअब नया गम हो जायें रह गये जख्म दिल के ताजे जख्मो की मरहम हो जाये जिन्दगी मिलीजो दो पल की उसका कुछ मातम हो जाये बदल गया हयाते फलसफा फिर चश्म न पुरनम हो जाये पलकों पर ठहर गये झरने आँखे कहीं न नम हो जायें WIDE लक्ष्मण द्वावानी Shot oh Alcamera - ShareChat
212 212 212 212 रंग गुलाल सबको लगाते चलो यूँ बुराई कि होली जलाते चलो गैर हो कोई या खास कोई तेरा तुम गले से सभी को लगाते चलो खो गई है मुहब्बत दिलो से यहाँ प्यार सब के दिलों में जगाते चलो हासिले कुछ नहीं नफरतो से यहाँ प्यार की राह में सर झुकाते चलो रूह से रूह का हो मिलन अपने भी रंग मुहब्बत का ऐसा चढ़ाते चलो प्यासे है हम यहाँ प्यासे हो तुम वहाँ तिश्नगी इन लबो से मिटाते चलो शौख चंचल अदाओं से अपने सनम हुस्न का जाम हमको पिलाते चलो ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 12/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - रंग सुहब्बत का ऐसा चढ़ाते चलो लगाते रंग   गुलाल चलो सबको होली তলান বলী 4 बुराई क गैर हो कोई या खास कोई तेरा गले सेसभी को लगाते चलो तुम खो गई है महब्बत दिलो से यहाँ ; प्यार सब के दिलों में जिगाते चलो हासिले कुछ नहीं सफरतो से यहाँ सरझुकाते चलो प्यार की राह में रूह से रूह का हो मिलन अपने भी का ऐसा चढ़ाते चलो रंग मुहब्बत ! प्यासे है हम यहाँ प्यासे हो तू 461 तिश्नगी इन लबो से मिटाते चलो পিলীন शौख चंचल अदाओं से सनम जाम हमको चलो हुस्न का ( लक्ष्मण दावानी रंग सुहब्बत का ऐसा चढ़ाते चलो लगाते रंग   गुलाल चलो सबको होली তলান বলী 4 बुराई क गैर हो कोई या खास कोई तेरा गले सेसभी को लगाते चलो तुम खो गई है महब्बत दिलो से यहाँ ; प्यार सब के दिलों में जिगाते चलो हासिले कुछ नहीं सफरतो से यहाँ सरझुकाते चलो प्यार की राह में रूह से रूह का हो मिलन अपने भी का ऐसा चढ़ाते चलो रंग मुहब्बत ! प्यासे है हम यहाँ प्यासे हो तू 461 तिश्नगी इन लबो से मिटाते चलो পিলীন शौख चंचल अदाओं से सनम जाम हमको चलो हुस्न का ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 1212 22 दिल तेरा आज भी दिवाना है दिलसे अपना तुझे हि माना है कुछ निगाहे करम दिखा हम पे तुमसे ही तो मेरा ज़माना है चल नहीं सकते साथ मेरे तुम मेरी तकदीर का फ़साना है घिर गया हूँ समयके चक्रव्यू में दर तेरा ही मेरा ठिकाना है जो मिला दे तु रूह से अपनी फिर ये कदमो तले ज़माना है दर्द हल्का है साँसे भारी है रस्मे उल्फत हमें निभाना है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 28/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - ही तो मेरा तुमसे IHII8 दिल तेरा आज भी दिवाना 8 दिलसे अपना तुझे हि माना कुछ निगाहे करम दिखा हम पे तुमसे ही तो मेरा ज़माना है TT मेरे तुम्है चल नहीं सकते साथ मेरी तकदी কা फसाना ज समयके चक्रव्यू में घिर गया چ दर तेरा मेरा ठिकाना है ल तु रूह से अपनी  जो मि फिरये कदमो तले ज़माना है दर्द हल्का है साँसे भारी ह रस्मे उल्फत हमें निभान ( लक्ष्मण दावानी ही तो मेरा तुमसे IHII8 दिल तेरा आज भी दिवाना 8 दिलसे अपना तुझे हि माना कुछ निगाहे करम दिखा हम पे तुमसे ही तो मेरा ज़माना है TT मेरे तुम्है चल नहीं सकते साथ मेरी तकदी কা फसाना ज समयके चक्रव्यू में घिर गया چ दर तेरा मेरा ठिकाना है ल तु रूह से अपनी  जो मि फिरये कदमो तले ज़माना है दर्द हल्का है साँसे भारी ह रस्मे उल्फत हमें निभान ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
1222 1222 122 छुपाया चाहे जितना भी किलों से कभी हो ना , सका जुदा दिलों से बिता दी ज़िन्दगी हम ने सफर में खफा है रास्ते भी मंजिलों से बढ़ा कर देख लीं नजदीकियाँ भी मिला जोभी मिला वो फासलों से कटी हैं किस तरह से रातें मेरी कभी पूछो मेरी तन्हाइयों से तमन्ना उम्र भरकी हमने जिसकी छला मिल के उसी ने कातिलों से उजाला हो न पाया ज़िन्दगी में जलाके घर भी देखा बिजलियोंसे सफीना युँ किनारों पर है डूबा केडर लगने लगा इन काफिलों से ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/3/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 1222 1222 122 चाहे जितना भी किलों से छुपाया कभी हो ना सका जुदा दिलों से बिता दी ज़िन्दगी   हम ने सफर में भी मंजिलों से खफा है रास्ते बढ़ा कर देख लीं नजदीकियाँ भी मिला जोभी मिला वो फासलों से किस तरह से रातें मेरी मेरी तन्हाइयों 4 तमन्ना उम्र भरकी हमने जिसकी छला मिल के उसी ने कातिलों से उजाला हो न पाया ज़िन्दगी में जलाके घर भी देखा बिजलियोंसे है डूबा सफीना युँ किनारों पर केडर लगने लगा इन काफिलों से ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 10/3/2018 1222 1222 122 चाहे जितना भी किलों से छुपाया कभी हो ना सका जुदा दिलों से बिता दी ज़िन्दगी   हम ने सफर में भी मंजिलों से खफा है रास्ते बढ़ा कर देख लीं नजदीकियाँ भी मिला जोभी मिला वो फासलों से किस तरह से रातें मेरी मेरी तन्हाइयों 4 तमन्ना उम्र भरकी हमने जिसकी छला मिल के उसी ने कातिलों से उजाला हो न पाया ज़िन्दगी में जलाके घर भी देखा बिजलियोंसे है डूबा सफीना युँ किनारों पर केडर लगने लगा इन काफिलों से ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 10/3/2018 - ShareChat
2122 2122 दर्दे दिल को तू रफू कर ज़िन्दगी फिर से शुरू कर खो दिया है तुमने जिसको फिर उसी की आरजू कर रंग भर के ज़िन्दगी में सब के तब तू रूबरू कर छेड़ कर फिर कोई नग्मा शायरी से तू अदू कर सारे अरमां होंगे पूरे बस खुदा से गुफ्तगू कर कर न रुस्वा ज़िन्दगी को बाँध इस को घुँघरू कर कुछ रहम तू कर के मौला जीस्त मेरी सुर्खरू कर ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 1/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 2122 2122 दर्दे दिलको तू रफू कर ज़िन्दगी फिर से शुरू कर खी दिया है तुमने जिसको  फिर उसी  की आरजू कर रंग भर के ज़िन्दगी सब केतबत छेड़ करफिर कोई से तू अदू कर R होंगे अरमां ؟ सारे बस खुदा से गुफ्तगू कर कर नरुस्वा ज़िन्दगी को बाँध इस को घुँघरू कर कुछ रहम तू कर के मौला मेरी Uf सुर्खरू कर ( লঃসতা মাণানী @ ) 1/2/2018 2122 2122 दर्दे दिलको तू रफू कर ज़िन्दगी फिर से शुरू कर खी दिया है तुमने जिसको  फिर उसी  की आरजू कर रंग भर के ज़िन्दगी सब केतबत छेड़ करफिर कोई से तू अदू कर R होंगे अरमां ؟ सारे बस खुदा से गुफ्तगू कर कर नरुस्वा ज़िन्दगी को बाँध इस को घुँघरू कर कुछ रहम तू कर के मौला मेरी Uf सुर्खरू कर ( লঃসতা মাণানী @ ) 1/2/2018 - ShareChat
2122 2122 2122 दर्दे दिल की ऐ खुदा कोई दवा दो खुशियों को मेरे घर का भी पता दो खुशियाँ कम है लिखी किस्मत में मेरी हो सके तो हमको भी कुछ हौसला दो दर्द जो समझे , निभाये साथ जो अब मेरे उस अपने से हमको भी मिला दो एक दीपक बुझ गया मेरी दुआ का फिर से उम्मीदें जगा कर तुम जला दो रूह प्यासी जिस्म है बे जान मेरा आबे जमजम नासही विषही पिला दो चल पड़ा है जिन नई राहों पे अब वो राह आँखों को मेरी भी वो दिखा दो ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 8/3/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 2 " [ दिल-का ए खुदा ~ाद खुशियो को मेरे घर का भ पता द खुशियाँ कम है लिखी किस्मत में मेरी हो सके तो हमको भी कुछ हेसला दो दर्दजो समझे निभाये साथ जा अब मेरे उस अपने से हमको भी मिला दो एक दीपक बुझ गया मेरी दुआ को फिर से उम्मीदें जगा कर तुम जला दो जिस्म है बे जान मेरा रूह ष्यासी अबे जमजम नासही विषही पिलान्दो पड़ा है जिन नईरहट अब वो mणedueise चल आँखों को मेरीभीवो दिखादो I6 लक्ष्मण दावानी ओ  8/3/2018 2 [ दिल-का ए खुदा ~ाद खुशियो को मेरे घर का भ पता द खुशियाँ कम है लिखी किस्मत में मेरी हो सके तो हमको भी कुछ हेसला दो दर्दजो समझे निभाये साथ जा अब मेरे उस अपने से हमको भी मिला दो एक दीपक बुझ गया मेरी दुआ को फिर से उम्मीदें जगा कर तुम जला दो जिस्म है बे जान मेरा रूह ष्यासी अबे जमजम नासही विषही पिलान्दो पड़ा है जिन नईरहट अब वो mणedueise चल आँखों को मेरीभीवो दिखादो I6 लक्ष्मण दावानी ओ  8/3/2018 - ShareChat
1212 1122 1212 22 दुआ में भी मेरे कोई असर नहीं आया गया वो ऐसे के फिर लौटकर नही आया भटकते फिरते रहे सेहरा में हम यारो बहुत रुस्वा हुए मगर वो घर नही आया सदा ही कैद रहा वो जमाने की ज़द में सफर की सख्त डगर देखकर नही आया निकल न पाई कभी दिल से यादें भी मेरे मंजर वो लौटके फिर से नज़र नही आया कहा गुलो से खिला दे फिजायें जीवन मे बहारे आ न सकी वो इधर नही आया बिखर गये कतरे कतरे हो के गम में हम करीब हो कर भी वो बेखबर नही आया ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 14/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 121___22 1212 22 दुआ में॰भी मेरे कोई्मैर नहीवआया गयाबो ऐसे केफिर लौटकटनही ओया 9505= 484 हमथारो बहुत रुस्वा द९ मगरवोघर नही ओया कैद सदाही रहावोजिमाने की ज़दमें सफर की सख्त डगर देखकर नही आर्या निकलनपाई कभी दिल से यादें भी॰मेरे मंजरवो लौटके फिर से नज़र नही आर्यी से खिला दे फिजायें जीवन मे गुलो कहा बहारे आ न सकी वो इधर नही आया @UILAE_ALFAAZ बिखर गये कतरे कतरे हो के गम में हम करीब हो कर भीवो बेखबर नही आया লঃসতা মাবানী ৫) 14/2/2018 121___22 1212 22 दुआ में॰भी मेरे कोई्मैर नहीवआया गयाबो ऐसे केफिर लौटकटनही ओया 9505= 484 हमथारो बहुत रुस्वा द९ मगरवोघर नही ओया कैद सदाही रहावोजिमाने की ज़दमें सफर की सख्त डगर देखकर नही आर्या निकलनपाई कभी दिल से यादें भी॰मेरे मंजरवो लौटके फिर से नज़र नही आर्यी से खिला दे फिजायें जीवन मे गुलो कहा बहारे आ न सकी वो इधर नही आया @UILAE_ALFAAZ बिखर गये कतरे कतरे हो के गम में हम करीब हो कर भीवो बेखबर नही आया লঃসতা মাবানী ৫) 14/2/2018 - ShareChat