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किसने कहा के प्यार नही था
बस जुबाँ पर इकरार नहीं था
चाहत में खो दिए दो जहाँ
इश्क था ये व्यापार नहीं था
मिलने को मिल जाती दौलत
लेकिन मैं गद्दार नहीं था
न हम सफर था न ही साथी
फिर भी मैं लाचार नहीं था
मिले ज़ख्म जितने छुपा लिए
श्रृंगार था आजार नहीं था
दाग क्या दिखाते दामन के
ये मेरा किरदार नहीं था
जी रहे जिस हाल में अब हम
कल तक यूँ संसार नहीं था
( लक्ष्मण दावानी ✍जबलपुर )
1/8/2019 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #शायरी
2122 1212 22/112
चाहतो से तेरी में सँवरा हूँ
इसलिये आज तक में ज़िन्दा हूँ
क्यूँ सताते हो प्यार में हम को
तेरे ही दिल का तो में टुकड़ा हूँ
रूठ जाये ना ज़िन्दगी इक दिन
हिज्र - ऐ - गम से तेरे डरता हूँ
सह लिये सदमे सारे ही हम ने
पी जहर जुल्म का में निखरा हूँ
अच्छे ना थे इरादे तूफाँ के
बस चिरागे वफ़ा सा जलता हूँ
आ गये पास झूठे सब तेरे
में वहीँ सच की राह ठहरा हूँ
पहलू में देख गैर के तुमको
टूटकर आईने सा बिखरा हूँ
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
1/4/2017 #शायरी #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️
2122 2122 212
चहरे पर चहरा लगाती ही रही
ज़िन्दगी हर पल सताती ही रही
इश्क के किस्से सुना कर वो हमें
ख्वाब झूठे वो दिखाती ही रही
दिल में उमंगें जगा कर वो मेरे
उम्र भर बस आजमाती ही रही
मात खाये इश्क -ऐ - जुनूँ में हम
दिल में चाहत कसमसाती ही रही
कबजलाती है शमा हर परवाने को
बस इशारों पर नचाती ही रही
वस्ल की शब् दास्ताँ बन कर रही
आरजू बस गिड़गिड़ाती ही रही
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
31/3/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #शायरी
2122 1122 1122 22
बिन तेरे भायें हमें अब ये नज़ारे कैसे
रास आयेंगे हमें अब ये सितारे कैसे
दर्द जब दिल में नहीं तुम्हे जुदाई का तो
सुर्ख आँखों में उतर आये शरारे कैसे
फंस गई बीच भंवर नाव मेरे जीवन की
कौन सोचे कि लगे नाव किनारे कैसे
हाथ छुड़ा के चला राहें सफर में जब वो
फिर ज़माने के झूठे अब ये सहारे कैसे
ज़िन्दगी जुल्फ में वोअपने मेरी उलझा के
जुल्फ को अपने झटक के वो सँवारे कैसे
साथ लाये है रकीबो को भरी महफ़िल में
दर्दे दिल उन्हें सुनाने को पुकारें कैसे
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
30/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
2122 1212 22/112
प्यार का जिनके दिल शिकार हुआ
सब से पहले वही गद्दार हुआ
आ गया वो चमन में फिर शायद
प्यार का दिल पे फिर खुमार हुआ
हाथ हाथो में जब मिला उनका
फिर हमें ज़िन्दगी से प्यार हुआ
हो गया प्यार पर यकीं उनके
प्यार का सर पे फिर खुमार हुआ
गर्द उड़ती रही गुजिश्ता की
फिर से दिल तार एक बार हुआ
कह गया वो झुका के नजरें अब
प्यार में तेरे शर्म सार हुआ
कर चला खत्म सांसो से रिश्ता
हर घड़ी हश्र का इंतजार हुआ
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
13/11/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 1212 22/112
इश्क को दिल्लगी समझते हो
तुम मेरी मनचली समझते हो
वक़्ते नाजिल अजाब बीतेगा
खो गई क्यों ख़ुशी समझते हो
धन दौलत नहीं यहाँ सब कुछ
तुम मेरी जो कमी समझते हो
सर झुका है मेरा मुहब्बत में
तुम इसे बेबसी समझते हो
जल रहा दिल मेरा यहाँ अब भी
तुम उसे रौशनी समझते हो
होश दीदारे यार में गुम है
आप बस मैकशी समझते हो
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
27/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
1222 1222 1222 1222
मुहब्बत , जंग में थोड़ी सियासत भी जरूरी है
बचाये जो फरेबों से , वो किस्मत भी जरूरी है
इरादे हो बुलंद , ओ हौसले हो आसमानों पर
खुदा की ऐसे सर पे अपने रहमत भी जरूरी है
कठिन है राहें माना मोहब्बत की इस जमाने मे
मिटाने नफरतो को दिलसे उल्फत भी जरूरी है
गुजर जाए युँ हसते गाते सबकी ज़िन्दगी यारो
लगा दो आग पानी मे ये जहमत भी जरूरी है
ले कर मय की सुराही हाथ मे अपने पिलाते हो
पिला के मारने को दिल मे नफरत भी जरूरी है
मिले अब कोई गम गुसार हमको भी यहाँ यारो
यहाँ पर जीने की खातिर मसर्रत भी जरूरी है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/11/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 1212 22/112
दर्द से फिर बिखर रहा हूँ मै
फिर तुझे याद कर रहा हूँ मै
अब सही जाये ना जुदाई ये
हिज्र-ऐ-गम से मर रहा हूँ मै
रो रही रातें भी सदा दे कर
सन्ग उनके बिफर रहा हूँ मैं
ऐ कजा तू खफा न हो हमसे
राह तेरी गुज़र रहा हूँ मै
बुझ चुके सब शरारे यादो के
फिरभी येआहें भर रहा हूँ में
हिर्स- ऐ- जर में दर बदर हुए
राहें मंजिल मगर रहा हूँ में
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
23/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
2122 2122 212
ख्वाब पलकों पे बिखरते जा रहे
अश्क आँखों में पिघलते जा रहे
बढ़ रही बैचेनियाँ दिल की मेरे
दर्द दिल ही दिल सुलगते जा रहे
लाख हरजाने मुहब्बत के भरे
हाथसे फिर भी फिसलते जा रहे
खो गया हूँ जुल्फ में तेरी कहीं
हद से चाहत में गुजरते जा रहे
साँसे साँसों में तेरी यूँ मिल गई
रूह में मेरी उतरते जा रहे
ना ये दिल काबू में ना ही होश है
तुझे पाकर हम निखरते जा रहे
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
22/3/2017 #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 1212 22/112
सजदे में सर झुका के रखते है
तुम्हे अपना बना के रखते है
कोई चुरा न ले तुझे दिल से
दिल में ताला लगा के रखते है
ये झुकी पलके कह रही बाते
धड़कनों में बसा के रखते है
तेरे कदमो में है मेरी जन्नत
सर ये कदमो में ला के रखते है
लग न जाये नज़र ज़माने की
हर नज़र से बचा के रखते है
हो पूरी हर मुरादें अपनी भी
लब पे दुआ सजा के रखते है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
22/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #शायरी













