2122 1212 22
रुख से उन के जब नकाब उतरा
चाँद का बन के वो जवाब उतरा
हर गली हर डगर थी ये चर्चा
फिर जमी पे आज माहताब उतरा
लहरा के झूम उठे मेरी बाहों में
शर्मओ हया का जो हिजाब उतरा
जुनूँ है , या सनक है मेरी कोई
मेरी आँखों मे ऐसा ख्वाब उतरा
जान ओ जिस्म तर बतर हुआ
अश्क बन आँखों से आब उतरा
चौट ऐसी लगी मेरे दिल पर
इश्क का सर से मेरे ताब उतरा
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
22/10/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
221 2121 1221 212
आँखों के बहते अश्क के धारो को छोड़ दो
मौजो के साथ खेलो किनारों को छोड़ दो
सुर बजते है गमो के मेरी मुहब्बत के अब
मत पूछ नग्मा - इश्क के तारों को छोड़ दो
इस इश्क ने किसे है दिया साथ उम्र भर
तन्हा सफर हे झूठे सहारो को छोड़ दो
गुलफिर खिलेंगे उजड़े चमन केआशियाँ में
बिखरी हुई बहारो के खारों को छोड़ दो
हर हसरतो के खाब अधूरे रहते नहीं
इन बद नसीब दर्द के मारों को छोड़ दो
पत्थर नहीं थे फेंक दिया जो तूने हमें
आओ करीब दिल के दयारों को छोड़ दो
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
1222 1222 1222 22
वफाओ ओ जफ़ाओं में जरा अंतर रखना
छुपा के दर्द अपना दिल के ही अंदर रखना
रहोगे प्यार बन के तुम सदा दिल मे मेरे
बना के दिल मे अपना तू मेरे ही घर रखना
कभी जो जीने ना दें गम मुहब्बत के तुम्हे
छुपाके अश्क अपने दिलपे तू पत्थर रखना
दिखा के फायदा क्या गम जमाने को यारा
लबो पे अपने तू मुस्कान का खंज़र रखना
खुदाया और तो क्या कुछमें माँगू तमसेअब
न कोई रंज , ना ही आँख में समन्दर रखना
सताये यादे जब तुम्हे मुहब्बत की यारा
निगाहों में मुहब्बत का यही मंज़र रखना
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
22/10/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
212 1222 212 1222
सजदे में तेरे सर अब भी झुका हमारा है
जो खुदा तुम्हारा है , वो खुदा हमारा है
देख ले कभी झुकाके नज़र ये दिलमे भी
अक्स दिलमे तेरे अब भी बसा हमारा है
होते हो पशेमाँ क्यूँ दिलसे अपने ऐ यारा
हाथ आज भी दुआ में उठा हमारा है
दिख रही फिजाओं में जोउदासियाँ तुम्हे
एक दिल फिंजा मे टूटा हुआ हमारा है
रौनके सभी चहरे की बिखर गईं मेरे
हिज्रे गममें ये जीवन ढल गया हमारा है
गमन कर निगाहों सेबहते हुएअश्को का
दर्द मोहब्बत का इनमें छुपा हमारा है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
20/10/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
2122 1212 22/112
सारे गम अपने तुम छुपा के कहो
जो भी कहना है मुस्करा के कहो
क्यों उदासी है छाई चहरे पर
राज दिल के नज़र मिला के कहो
हो चुकी बातें बहुत इशारों में
अब के हमको गले लगा के कहो
लग गया रोग इश्क का तुमको
नज्म लब पे कोई सजा के कहो
क्यूँ छुपाये हो चहरे को अपने
पर्दा रुख से अपने उठा के कहो
बात गर शर्म ओ हया की है
नज़रे अपनी सबसे चुरा के कहो
( लक्ष्मण दावानी )
16/12/2016 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 1212 22/112
हक मुहब्बत का युँ अदा करते
खुशियों की तेरे दुआ करते
झाँक कर देख दिल मे मेरे भी
बेवफा से भी हम वफ़ा करते
अंधेरो को मिटाने की खातिर
दीप बन दर तेरे जला करते
लाख छुपाते चाँद आँचल में
दीद को रात भर जगा करते
छेड़ कर जुल्फ उंगलियों से
उम्र भर इनसे हम खेला करते
दिल मे रहती न कोई ओ चाहत
नाम बस आपका जपा करते
जख्म मिलता या दर्दे दिल हमको
आँसु छुप छुप के हम पिया करते
चाँदनी संग चाँद होता तब
पहलू में अपने भर लिया करते
दौरे - आतिश बना है हर नादाँ
हम भी करते तो यार क्या करते
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
12/10/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
212 212 212 2
इस मुहब्बत से किस को मिला है
कुछ गिले शिक्वे इसका सिला है
हर सूँ बस हुस्न ही हुस्न दिखता
खुद नुमाई का मेला लगा है
अब करूँ किस से शिक्वे गिले में
है न उसकी न मेरी खता है
जख्म जो प्यार में था मिला वो
आज भी दिल का मेरे हरा है
यूँ तराशा मुहब्बत से उसको
उस खुदा की कला ने छला है
रूह बन के मिलेंगे कही अब
इश्क पर जोर किसका चला है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
5/3/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 1212 22/112
दिल में मूरत कोई बसा दोगे
इश्क को मेरे तुम हवा दोगे
पहलू में तेरे रात भर जी लूँ
रस्म एसी कोई निभा दोगे
क्या तकल्लुफ करूँ ये कहने में
खुश हुआ तो हमें रुला दोगे
खो रहा किस कदर तबाही में
ज़िन्दगी की मुझे दुआ दोगे
हो गई है खता मुहब्बत की
अब बता क्या हमें सजा दोगे
आये शिद्दत से बज्म में तेरी
बज्म से प्यासे ही उठा दोगे
करते हो दिल पे जो सितम मेरे
दर्दे दिल की मेरे दवा दोगे
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
4/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
122 122 122 122
नज़र उनसे हमको मिलानी नही थी
उसे बात दिल की बतानी नहीं थी
कली बन के आई मेरी ज़िन्दगी में
देखी हमने ऐसी जवानी नहीं थी
चमक चहरे पे चाँदनी की तरह थी
मगर वो मेरी रात रानी नहीं थी
चली हम सफ़र बन के वो साथ मेरे
मगर रस्मे उल्फत निभानी नहीं थी
जला डाले वो सारे ख़त हमने उसके
मोहब्बत की जिसमे कहानी नहीं थी
चढ़ा इश्क का था नशा उन पर मेरे
मगर इश्क में वो रवानी नहीं थी
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
5/3/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
2122 2122
दिल का कुछ उपचार कर ले
चल जरा सा प्यार कर ले
तरसूँ कब तक प्यार को मैं
प्यार का इजहार कर ले
हर कदम है अंधेरा ही
आँखे अब दो चार कर ले
हर्फ यादों में लिखे जो
पढ़ के तू अशआर कर ले
आरजू है बस यही अब
सपने तू साकार कर ले
गम लगा लूँगा गले से
मुझे तू स्वीकार कर ले
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
10/10/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️













