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22 22 22 22 किसने कहा के प्यार नही था बस जुबाँ पर इकरार नहीं था चाहत में खो दिए दो जहाँ इश्क था ये व्यापार नहीं था मिलने को मिल जाती दौलत लेकिन मैं गद्दार नहीं था न हम सफर था न ही साथी फिर भी मैं लाचार नहीं था मिले ज़ख्म जितने छुपा लिए श्रृंगार था आजार नहीं था दाग क्या दिखाते दामन के ये मेरा किरदार नहीं था जी रहे जिस हाल में अब हम कल तक यूँ संसार नहीं था ( लक्ष्मण दावानी ✍जबलपुर ) 1/8/2019 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #शायरी
📜मेरी कलम से✒️ - 22 22 22 22 किसने कहा के प्यार नही था पर इकरार नहीं था जुबाँ बस दिए चाहत में खो दो जहाँ [4 व्यापार नहीं था इश्क मिलने को मिल जाती दौलत লক্কিন # नहीं था गद्दार न हम सफर था न॰ही साथी फिर भी मैं लाचार नहीं था मिले ज़ख्म जितने छुपा लिए आजार नहीं श्रृंगार था [ दाग क्या दिखाते दामन के d AT किरदार 78 4 जी रहे जिस हाल में अब हम कल तक यूँ संसार नहीं था लक्ष्मण दावानी / जबलपुर 1/8/2019 22 22 22 22 किसने कहा के प्यार नही था पर इकरार नहीं था जुबाँ बस दिए चाहत में खो दो जहाँ [4 व्यापार नहीं था इश्क मिलने को मिल जाती दौलत লক্কিন # नहीं था गद्दार न हम सफर था न॰ही साथी फिर भी मैं लाचार नहीं था मिले ज़ख्म जितने छुपा लिए आजार नहीं श्रृंगार था [ दाग क्या दिखाते दामन के d AT किरदार 78 4 जी रहे जिस हाल में अब हम कल तक यूँ संसार नहीं था लक्ष्मण दावानी / जबलपुर 1/8/2019 - ShareChat
2122 1212 22/112 चाहतो से तेरी में सँवरा हूँ इसलिये आज तक में ज़िन्दा हूँ क्यूँ सताते हो प्यार में हम को तेरे ही दिल का तो में टुकड़ा हूँ रूठ जाये ना ज़िन्दगी इक दिन हिज्र - ऐ - गम से तेरे डरता हूँ सह लिये सदमे सारे ही हम ने पी जहर जुल्म का में निखरा हूँ अच्छे ना थे इरादे तूफाँ के बस चिरागे वफ़ा सा जलता हूँ आ गये पास झूठे सब तेरे में वहीँ सच की राह ठहरा हूँ पहलू में देख गैर के तुमको टूटकर आईने सा बिखरा हूँ ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 1/4/2017 #शायरी #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️
शायरी - तेरे ही दिल का तो ম বুক্ভা 8 चाहतो   से तेरी में सँवरा { इसलिये आज तक में ज़िन्दा क्यूँ सताते हो मोहब्बत में तुम तेरे ही दिल का तो में टुकडा हूँ ज़िन्दगी रूठ जाये ना इक दिन हिज्र - ऐ - गम   से तेरे डरता हूँ सह लिये कैसे कैसे सदमे सब पीजहर जुल्म का में निखरा हूँ थे इरादे अच्छे ना के तूफाँ ग बस चिरागे वफ़ा सा जलता हूँ पास झूठे सब तेरे 31 Tಶ में वहीं सच की राह ठहरा हूँ ೪[ पहलू में देख गै़र के तुमको टूटकर आईने सा बिखरा हूँ ल ( लक्ष्मण दावानी तेरे ही दिल का तो ম বুক্ভা 8 चाहतो   से तेरी में सँवरा { इसलिये आज तक में ज़िन्दा क्यूँ सताते हो मोहब्बत में तुम तेरे ही दिल का तो में टुकडा हूँ ज़िन्दगी रूठ जाये ना इक दिन हिज्र - ऐ - गम   से तेरे डरता हूँ सह लिये कैसे कैसे सदमे सब पीजहर जुल्म का में निखरा हूँ थे इरादे अच्छे ना के तूफाँ ग बस चिरागे वफ़ा सा जलता हूँ पास झूठे सब तेरे 31 Tಶ में वहीं सच की राह ठहरा हूँ ೪[ पहलू में देख गै़र के तुमको टूटकर आईने सा बिखरा हूँ ल ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 2122 212 चहरे पर चहरा लगाती ही रही ज़िन्दगी हर पल सताती ही रही इश्क के किस्से सुना कर वो हमें ख्वाब झूठे वो दिखाती ही रही दिल में उमंगें जगा कर वो मेरे उम्र भर बस आजमाती ही रही मात खाये इश्क -ऐ - जुनूँ में हम दिल में चाहत कसमसाती ही रही कबजलाती है शमा हर परवाने को बस इशारों पर नचाती ही रही वस्ल की शब् दास्ताँ बन कर रही आरजू बस गिड़गिड़ाती ही रही ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 31/3/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #शायरी
📜मेरी कलम से✒️ - आरजू बस गिड़गिड़ाती ही रही पर चहरा लगाती ही रही 46 चहरे ज़िन्दगी हर पल सताती ही रही इश्क के किस्से सुना कर वो हमें 8 4 ஈி ही रही ख्ाब रेहेरे दिल में उमंगें जिगा वो कर आजमाती ही उम्र भर बस जुनूँ में मात खाये इश्क  ऐ য = दिल में चाहत कसमसाती ही कबजलाती है शमा हर परवाने को ज़ नचाती ही रही इशारों बस पर वस्ल की शब् दास्ताँ बन कर रही ल गिड़गिड़ाती ही रही आरजू बस ( लक्ष्मण दावानी आरजू बस गिड़गिड़ाती ही रही पर चहरा लगाती ही रही 46 चहरे ज़िन्दगी हर पल सताती ही रही इश्क के किस्से सुना कर वो हमें 8 4 ஈி ही रही ख्ाब रेहेरे दिल में उमंगें जिगा वो कर आजमाती ही उम्र भर बस जुनूँ में मात खाये इश्क  ऐ য = दिल में चाहत कसमसाती ही कबजलाती है शमा हर परवाने को ज़ नचाती ही रही इशारों बस पर वस्ल की शब् दास्ताँ बन कर रही ल गिड़गिड़ाती ही रही आरजू बस ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 1122 1122 22 बिन तेरे भायें हमें अब ये नज़ारे कैसे रास आयेंगे हमें अब ये सितारे कैसे दर्द जब दिल में नहीं तुम्हे जुदाई का तो सुर्ख आँखों में उतर आये शरारे कैसे फंस गई बीच भंवर नाव मेरे जीवन की कौन सोचे कि लगे नाव किनारे कैसे हाथ छुड़ा के चला राहें सफर में जब वो फिर ज़माने के झूठे अब ये सहारे कैसे ज़िन्दगी जुल्फ में वोअपने मेरी उलझा के जुल्फ को अपने झटक के वो सँवारे कैसे साथ लाये है रकीबो को भरी महफ़िल में दर्दे दिल उन्हें सुनाने को पुकारें कैसे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 30/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - आँखों में सुर्ख उतर आये शरारे कैसे अबये नज़ारे कैसे भायें हमें নিন ৯২ ये सितारे कैसे हमें अब आयेंगे रास दर्द जब दिल में नहीं तुम्हे का तो जुदाई में उतर आये शरारे कैसे आँखों सुर्ख ग फंस गई बीच भंवर नाव मेरे जीवन की सोचे कि लगे नाव किनारे कैसे कौन ೪ चला राहें सफर में जब वो हाथ ত্তুভা ৯ फिर ज़माने के झूठे अब ये सहारे कैसे লে ज़िन्दगी जुल्फ में वोअपने मेरी उलझा के जुल्फ को अपने झटक के वो सँवारे कैसे साथ लाये है रकीबो को भरी महफ़िल में कैसे दिल उन्हें ೩ को सुनाने पुकारें ( লঃসতা নানানী % ) आँखों में सुर्ख उतर आये शरारे कैसे अबये नज़ारे कैसे भायें हमें নিন ৯২ ये सितारे कैसे हमें अब आयेंगे रास दर्द जब दिल में नहीं तुम्हे का तो जुदाई में उतर आये शरारे कैसे आँखों सुर्ख ग फंस गई बीच भंवर नाव मेरे जीवन की सोचे कि लगे नाव किनारे कैसे कौन ೪ चला राहें सफर में जब वो हाथ ত্তুভা ৯ फिर ज़माने के झूठे अब ये सहारे कैसे লে ज़िन्दगी जुल्फ में वोअपने मेरी उलझा के जुल्फ को अपने झटक के वो सँवारे कैसे साथ लाये है रकीबो को भरी महफ़िल में कैसे दिल उन्हें ೩ को सुनाने पुकारें ( লঃসতা নানানী % ) - ShareChat
2122 1212 22/112 प्यार का जिनके दिल शिकार हुआ सब से पहले वही गद्दार हुआ आ गया वो चमन में फिर शायद प्यार का दिल पे फिर खुमार हुआ हाथ हाथो में जब मिला उनका फिर हमें ज़िन्दगी से प्यार हुआ हो गया प्यार पर यकीं उनके प्यार का सर पे फिर खुमार हुआ गर्द उड़ती रही गुजिश्ता की फिर से दिल तार एक बार हुआ कह गया वो झुका के नजरें अब प्यार में तेरे शर्म सार हुआ कर चला खत्म सांसो से रिश्ता हर घड़ी हश्र का इंतजार हुआ ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 13/11/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 2122 '212 22/112 प्यार का जिनक दिल शिकार हुआ सब से॰  पहले वही गद्दार हुआ গযেযো নী বমন ম ক্িং থায়ন प्यारका दिलप फिर खुमार हुआ ম তান মিলা हाथो న (ా हमें ज़िन्दगी से प्यार हुआ  पर  यकीं   उनके TT tన 61 प्यारका सरपे फिर खुमार हुआ गर्द   उड़ती रही गुजिश्ता কী फिर से दिल तार एक बारहुआ गयावो झुका के नजरें अब कह யR # R शर्म सार 53TT कर चला खत्म सांसो से रिश्ता हर घड़ी हश्र का इंतजार हुआ ( लक्ष्मण दावानी Z१ 18/11/2017 Shot on Vivo Al camera 2122 '212 22/112 प्यार का जिनक दिल शिकार हुआ सब से॰  पहले वही गद्दार हुआ গযেযো নী বমন ম ক্িং থায়ন प्यारका दिलप फिर खुमार हुआ ম তান মিলা हाथो న (ా हमें ज़िन्दगी से प्यार हुआ  पर  यकीं   उनके TT tన 61 प्यारका सरपे फिर खुमार हुआ गर्द   उड़ती रही गुजिश्ता কী फिर से दिल तार एक बारहुआ गयावो झुका के नजरें अब कह யR # R शर्म सार 53TT कर चला खत्म सांसो से रिश्ता हर घड़ी हश्र का इंतजार हुआ ( लक्ष्मण दावानी Z१ 18/11/2017 Shot on Vivo Al camera - ShareChat
2122 1212 22/112 इश्क को दिल्लगी समझते हो तुम मेरी मनचली समझते हो वक़्ते नाजिल अजाब बीतेगा खो गई क्यों ख़ुशी समझते हो धन दौलत नहीं यहाँ सब कुछ तुम मेरी जो कमी समझते हो सर झुका है मेरा मुहब्बत में तुम इसे बेबसी समझते हो जल रहा दिल मेरा यहाँ अब भी तुम उसे रौशनी समझते हो होश दीदारे यार में गुम है आप बस मैकशी समझते हो ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 27/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - तुम इसे बेबसी समझते हा इश्क को दिल्लगी समझते हो मनचली   समझते हो तुम मेरी वक़्ते नाजिल अजाब बीतेगा সস্ান ৪ী खो गई क्यों ख़ुशी ग धन दौलत नहीं यहाँ सब कुछ तुम मेरीजो कमी समझते हो ज़ सर झुका है मेरा मुहब्बत में बेबसी   समझते हो নুস   হরষী লে जल रहा दिल मेरा यहाँ अब भी रौशनी   समझते हो 37 37 4 T है होश दीदारे यार बस मैकशी समझते आप ( लक्ष्मण दावानी तुम इसे बेबसी समझते हा इश्क को दिल्लगी समझते हो मनचली   समझते हो तुम मेरी वक़्ते नाजिल अजाब बीतेगा সস্ান ৪ী खो गई क्यों ख़ुशी ग धन दौलत नहीं यहाँ सब कुछ तुम मेरीजो कमी समझते हो ज़ सर झुका है मेरा मुहब्बत में बेबसी   समझते हो নুস   হরষী লে जल रहा दिल मेरा यहाँ अब भी रौशनी   समझते हो 37 37 4 T है होश दीदारे यार बस मैकशी समझते आप ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
1222 1222 1222 1222 मुहब्बत , जंग में थोड़ी सियासत भी जरूरी है बचाये जो फरेबों से , वो किस्मत भी जरूरी है इरादे हो बुलंद , ओ हौसले हो आसमानों पर खुदा की ऐसे सर पे अपने रहमत भी जरूरी है कठिन है राहें माना मोहब्बत की इस जमाने मे मिटाने नफरतो को दिलसे उल्फत भी जरूरी है गुजर जाए युँ हसते गाते सबकी ज़िन्दगी यारो लगा दो आग पानी मे ये जहमत भी जरूरी है ले कर मय की सुराही हाथ मे अपने पिलाते हो पिला के मारने को दिल मे नफरत भी जरूरी है मिले अब कोई गम गुसार हमको भी यहाँ यारो यहाँ पर जीने की खातिर मसर्रत भी जरूरी है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/11/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 1222 1222 1222 1222 मुहब्बत , जंग में थोड़ी सियासत भी जरूरी है बचाये जो फरेबों से , वो किस्मत भी जरूरी है इरादे हो बुलंद , ओ हौसले हो आसमानों पर ऐसे सर पे अपने रहमत भी जरूरी है खुदा की कठिन है राहें माना मोहब्बत की इस जमाने मे मिटाने नफरतो को दिलसे उल्फत भी जरूरी है गुजर जाए युँ हसते गाते सबकी ज़िन्दगी यारो लगा दो आग पानी मे ये जहमत भी जरूरी है ले कर मय की  सुराही हाथ मे अपने पिलाते हो पिला के मारने को दिल मे नफरत भी जरूरी है मिले अब कोई  गम गुसार हमको भी यहाँ यारो यहाँपर जीने की खातिर मसर्रत भी जरूरी है ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 10/11/2017 366 1222 1222 1222 1222 मुहब्बत , जंग में थोड़ी सियासत भी जरूरी है बचाये जो फरेबों से , वो किस्मत भी जरूरी है इरादे हो बुलंद , ओ हौसले हो आसमानों पर ऐसे सर पे अपने रहमत भी जरूरी है खुदा की कठिन है राहें माना मोहब्बत की इस जमाने मे मिटाने नफरतो को दिलसे उल्फत भी जरूरी है गुजर जाए युँ हसते गाते सबकी ज़िन्दगी यारो लगा दो आग पानी मे ये जहमत भी जरूरी है ले कर मय की  सुराही हाथ मे अपने पिलाते हो पिला के मारने को दिल मे नफरत भी जरूरी है मिले अब कोई  गम गुसार हमको भी यहाँ यारो यहाँपर जीने की खातिर मसर्रत भी जरूरी है ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 10/11/2017 366 - ShareChat
2122 1212 22/112 दर्द से फिर बिखर रहा हूँ मै फिर तुझे याद कर रहा हूँ मै अब सही जाये ना जुदाई ये हिज्र-ऐ-गम से मर रहा हूँ मै रो रही रातें भी सदा दे कर सन्ग उनके बिफर रहा हूँ मैं ऐ कजा तू खफा न हो हमसे राह तेरी गुज़र रहा हूँ मै बुझ चुके सब शरारे यादो के फिरभी येआहें भर रहा हूँ में हिर्स- ऐ- जर में दर बदर हुए राहें मंजिल मगर रहा हूँ में ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - राह तेरी गुज़र रहा 8# दर्द से फिर बिखर रहा हूँ मै फिर तुझे याद कर रहा 4 जाये ना जुदाई ये अबःसह ऐन्ाम से मर रहाहूँ मै TT रोरही रातें भी सदा दे कर सन्ग उनके बिफर रहा हूँ मैं ؟ ऐ कजातू खफा न हो हमसे राह तेी गुज़र रहा চুঁ ম ल क सब शसरे यादो के झ पिरभी येआहें भर रहा हूँमें 9` 8 हिर्स- ऐ- जर में दर बदर राहें मंजिल मगर रहा چ ( लक्ष्मण दावानी ) राह तेरी गुज़र रहा 8# दर्द से फिर बिखर रहा हूँ मै फिर तुझे याद कर रहा 4 जाये ना जुदाई ये अबःसह ऐन्ाम से मर रहाहूँ मै TT रोरही रातें भी सदा दे कर सन्ग उनके बिफर रहा हूँ मैं ؟ ऐ कजातू खफा न हो हमसे राह तेी गुज़र रहा চুঁ ম ल क सब शसरे यादो के झ पिरभी येआहें भर रहा हूँमें 9` 8 हिर्स- ऐ- जर में दर बदर राहें मंजिल मगर रहा چ ( लक्ष्मण दावानी ) - ShareChat
2122 2122 212 ख्वाब पलकों पे बिखरते जा रहे अश्क आँखों में पिघलते जा रहे बढ़ रही बैचेनियाँ दिल की मेरे दर्द दिल ही दिल सुलगते जा रहे लाख हरजाने मुहब्बत के भरे हाथसे फिर भी फिसलते जा रहे खो गया हूँ जुल्फ में तेरी कहीं हद से चाहत में गुजरते जा रहे साँसे साँसों में तेरी यूँ मिल गई रूह में मेरी उतरते जा रहे ना ये दिल काबू में ना ही होश है तुझे पाकर हम निखरते जा रहे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 22/3/2017 #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
शायरी - रूह में मेरी उतरते जा रहे पलकों पे बिखरते जा रहे ख्ाब अश्क आँखों से पिघलते जा रहे बढ रही बैचेनियाँ दिल की मेरे दर्द दिल ही दिल सुलगते जा रहे लाख हरजाने मुहब्बत के भरे हाथसे फिर भी फिसलते जा रहे ग 8 ஈகசி खो गया जुल्फ में हद से चाहत में गुजरते जा रहे ज़ साँसों में तेरी यूँ मिल गई सास ल रूह में मेरी उतर्ते रहे जा ना ये दिल काबू में ना ही होश है तुझे पाकर हम निखरते <8 నగౌ ( লঃসত নানানী रूह में मेरी उतरते जा रहे पलकों पे बिखरते जा रहे ख्ाब अश्क आँखों से पिघलते जा रहे बढ रही बैचेनियाँ दिल की मेरे दर्द दिल ही दिल सुलगते जा रहे लाख हरजाने मुहब्बत के भरे हाथसे फिर भी फिसलते जा रहे ग 8 ஈகசி खो गया जुल्फ में हद से चाहत में गुजरते जा रहे ज़ साँसों में तेरी यूँ मिल गई सास ल रूह में मेरी उतर्ते रहे जा ना ये दिल काबू में ना ही होश है तुझे पाकर हम निखरते <8 నగౌ ( লঃসত নানানী - ShareChat
2122 1212 22/112 सजदे में सर झुका के रखते है तुम्हे अपना बना के रखते है कोई चुरा न ले तुझे दिल से दिल में ताला लगा के रखते है ये झुकी पलके कह रही बाते धड़कनों में बसा के रखते है तेरे कदमो में है मेरी जन्नत सर ये कदमो में ला के रखते है लग न जाये नज़र ज़माने की हर नज़र से बचा के रखते है हो पूरी हर मुरादें अपनी भी लब पे दुआ सजा के रखते है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 22/3/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️ #💝 शायराना इश्क़ #शायरी
📚कविता-कहानी संग्रह - लब पे दुआ सजा के रखते है सजदे में 8 হ স্তুব্ধা बना के तुम्हे ಷ ব্ধীৎ ব্রুহা ন ল নতুঃ چ নিল ঐ নালা লপা येझुकी पलके कह रही बाते कनों में बसा के रखते है तेरे कदमो में है मेरी जन्नत 1 सर ये कदमो में ला के रखते है ড়া लग नजाये नज़र ज़माने की हर नज़रसे बचा के रखते है লে हो पूरी हर अपनी भी मुरादें लब पे दुआ सॅजा के रखते है লঃসতা নানানী लब पे दुआ सजा के रखते है सजदे में 8 হ স্তুব্ধা बना के तुम्हे ಷ ব্ধীৎ ব্রুহা ন ল নতুঃ چ নিল ঐ নালা লপা येझुकी पलके कह रही बाते कनों में बसा के रखते है तेरे कदमो में है मेरी जन्नत 1 सर ये कदमो में ला के रखते है ড়া लग नजाये नज़र ज़माने की हर नज़रसे बचा के रखते है লে हो पूरी हर अपनी भी मुरादें लब पे दुआ सॅजा के रखते है লঃসতা নানানী - ShareChat