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2122 2122 212 आँख में अश्को के धारे हो गये दूर हम से सब किनारे हो गये हमने चाहा था दिलो जाँ से जिसे वो खुदा को मेरे प्यारे हो गये अब न उम्मीदें रहीं ना आरजू ख्वाब मेरे सब तुम्हारे हो गये सामने हो कर मेरी आँखों के भी गुम निगाहों से नजारे हो गये ज़िन्दगी में मेरे भर कर अंधेरे आसमाँ के वो सितारे हो गये बद नसीबी रोकता कैसे भला गर्दिशों में सब ही तारे हो गये चार दिन की चाँदनी थी ज़िन्दगी अपने ही किस्मत के मारे हो गये युँ छुड़ा कर हाथ हाथो से मेरे अपने गैरो के सहारे हो गये ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 22/1/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - मरवा खुदा क ಝ3 ೯ 7ಲ आँख में अश्को के धारे हो गये दूर हम से सब किनारे हो गये हमने चाहा था दिलो जॉं से जिसे मेरे वो खुदा के प्यारे हो गये अब न उम्मीदें रहीं ना आरजू جآ ख्वाब मेरे अब எ  R सामने हो कर मेरी आँखों के भी गुम निगाहों से नजारे हो गये ज़िन्दगी में मेरे भर कर अंधेरे రగ आसमाँ केवो सितारे हो गये बद नसीबी रोकता कैसे भला गर्दिशों में सारे तारे हो गये घे चार दिन की चाँदनी थी जिन्दगी अपने ही किस्मत के मारे हो गये हसे गेये युँ छुड़ा कर हाथ हाथो अपने गैरो $ 46R 61 लक्ष्मण दावानी मरवा खुदा क ಝ3 ೯ 7ಲ आँख में अश्को के धारे हो गये दूर हम से सब किनारे हो गये हमने चाहा था दिलो जॉं से जिसे मेरे वो खुदा के प्यारे हो गये अब न उम्मीदें रहीं ना आरजू جآ ख्वाब मेरे अब எ  R सामने हो कर मेरी आँखों के भी गुम निगाहों से नजारे हो गये ज़िन्दगी में मेरे भर कर अंधेरे రగ आसमाँ केवो सितारे हो गये बद नसीबी रोकता कैसे भला गर्दिशों में सारे तारे हो गये घे चार दिन की चाँदनी थी जिन्दगी अपने ही किस्मत के मारे हो गये हसे गेये युँ छुड़ा कर हाथ हाथो अपने गैरो $ 46R 61 लक्ष्मण दावानी - ShareChat
122 122 122 122 निगाहों में तुम्हे बसाये हुए है तुम्हारे नयन दिल पे छाये हुए है खफा हो रहे क्यों मुहब्बत से मेरी दिलो जाँ तुम पे ही लुटाये हुए है अहद -ऐ- मुहब्बत से मुकरते क्यूँ हो तेरे सजदे में सर झुकाये हुए है छलक जायें ना आँसु आँखों से मेरी बड़ी मुश्किलों से दबाये हुए है शिकायत है गर बैठ के बात कर लो गिले शिक्वे सब हम भुलाये हुए है बसे होयुँ सांसो में तुम बनके खुशबू तुम्हे तन बदन पर लगाये हुए है कहीं बुझन जाये कसक मेरे दिलकी धुनी हम तेरी ही रमाये हुए है गुजर जाऊंगा देखना शाम ढलते कजा पास अपने बुलाये हुए है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 25/11/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - तूम्ह तन बदन पर लगाये हुए है निगाहीरमें   नृम्हे बसाये   हुए नयन दिल पे छाये ह४ त्ार ஏ=ர 5வ4##1    Eiia ನೆ लुटाये ढए ह अहत ५ गृहब्बत रो मुकरते क्यूँ हो   4-=|4/4 5! 5 छलक जायें ना ऑाँसु आंखों से मेरी बडी॰ मुश्किला   से दबाये ढए शिकायत हगरवठ के चात करलो भुलाये हए गिल शिक्व   बसे होयुँ सांसो में तुम बनके खुशब् लगाये हुए 9 बदन प n कहीं बृझन जाये कसक मेरे दिलकी धुनी हम तेरी ही॰ रगाये हए गुज्जर जाऊंगा देखना शाम ढलते Tleil कजा पास अपने बलाये 7 लकषपण नवानी तूम्ह तन बदन पर लगाये हुए है निगाहीरमें   नृम्हे बसाये   हुए नयन दिल पे छाये ह४ त्ार ஏ=ர 5வ4##1    Eiia ನೆ लुटाये ढए ह अहत ५ गृहब्बत रो मुकरते क्यूँ हो   4-=|4/4 5! 5 छलक जायें ना ऑाँसु आंखों से मेरी बडी॰ मुश्किला   से दबाये ढए शिकायत हगरवठ के चात करलो भुलाये हए गिल शिक्व   बसे होयुँ सांसो में तुम बनके खुशब् लगाये हुए 9 बदन प n कहीं बृझन जाये कसक मेरे दिलकी धुनी हम तेरी ही॰ रगाये हए गुज्जर जाऊंगा देखना शाम ढलते Tleil कजा पास अपने बलाये 7 लकषपण नवानी - ShareChat
212 212 212 22 हाल- ऐ -दिल बताए नही जाते दर्द दिल के दिखाए नही जाते दर्द का यार कुछ तो सबब होगा अश्क यूँ तो बहाए नही जाते दरमियाँ जो दिलो के हुए कायम रिश्ते वो फिर मिटाए नही जाते कह रही फिरसे तन्हाई कानो में गम के साये गिराए नही जाते बोलते क्योँ नही हक में मेरे तुम झूठे रिश्ते निभाए नही जाते है सुबह पर नज़र और डर भी है गम दिलो के उठाए नही जाते ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 29/11/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - रिश्ते वो फिर मिटाए नही जाते हाल ऐ दिल बताए नही जाते दर्द दिलके दिखाए नही जाते दर्द का यारकुछतो सबब होगा यूँतो बहाए नही जाते 3T9e दिलो के हुए दरमियाँजो कायम रिश्ते वो फिर मिटाए नही जाते कह रही फिरसे तन्हाई कानो में गिराए नही जाते गम केसाये बोलते व्यों नही हक में मेरे तुम झठे रिश्ते  निभाए नही जाते है सुबह पर नज़र औरडरभी है गम दिलो के उठाए नही जाते लक्ष्मण दावानी रिश्ते वो फिर मिटाए नही जाते हाल ऐ दिल बताए नही जाते दर्द दिलके दिखाए नही जाते दर्द का यारकुछतो सबब होगा यूँतो बहाए नही जाते 3T9e दिलो के हुए दरमियाँजो कायम रिश्ते वो फिर मिटाए नही जाते कह रही फिरसे तन्हाई कानो में गिराए नही जाते गम केसाये बोलते व्यों नही हक में मेरे तुम झठे रिश्ते  निभाए नही जाते है सुबह पर नज़र औरडरभी है गम दिलो के उठाए नही जाते लक्ष्मण दावानी - ShareChat
122 122 122 122 सभी ख्वाहिशे अब दुआ से कहेंगे गुजारिश करेंगे , खुदा से कहेंगे लिखा क्यों नसीबो में ये जख्म मेरे छुपा आँसुओ को अदा से कहेंगे बढ़ी जा रही दिल की बैचेनियाँ ये बदलती हुई इस फिजा से कहेंगे अगर रुक सके तो कभी रोक लेना दिलो को जलाती हवा से कहेंगे नही और कुछ पास बाकी रहा है बहारों में बिखरी खिजा से कहेंगे ये घुप अंधेरे मार डालेंगे हमको रहम कर जरा अब निशा से कहेंगे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 19/1/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - गुजारिश करेंगे, खुदा से कहेंगे सभी ख्वाहिशे अब दुआ से कहेंगे गुजारिश करेंगे , खुदा से कहेंगे लिखा क्यों नसीबो में ये जख्म मेरे आँसुओ को अदा से कहेंगे Bu बढीजा रही दिल की बैचेनियाँ ये बदलती हई इस फिजा से कहेंगे अगर रुकसकेतो कभी रोक लेना दिलो को जलाती हवा से कहेंगे नही और कुछ पास बाकी रहा हे में बिखरी खिजा से कहेंगे बहारों ये घुप अंधेरे मार डालेंगे हमको रहम कर जरा अब निशा से कहेंगे ( লঃসত নানানী गुजारिश करेंगे, खुदा से कहेंगे सभी ख्वाहिशे अब दुआ से कहेंगे गुजारिश करेंगे , खुदा से कहेंगे लिखा क्यों नसीबो में ये जख्म मेरे आँसुओ को अदा से कहेंगे Bu बढीजा रही दिल की बैचेनियाँ ये बदलती हई इस फिजा से कहेंगे अगर रुकसकेतो कभी रोक लेना दिलो को जलाती हवा से कहेंगे नही और कुछ पास बाकी रहा हे में बिखरी खिजा से कहेंगे बहारों ये घुप अंधेरे मार डालेंगे हमको रहम कर जरा अब निशा से कहेंगे ( লঃসত নানানী - ShareChat
2122 2122 2122 ख्वाब आँखों में सजाना चाहता है आज फिर दिल गुनगुनाना चाहता है रह गये जज्बात दिल के जो अधूरे वो ग़ज़ल गा कर सुनाना चाहता है है मेरे अहसास में शामिल तु अब भी राज दिल का ये बताना चाहता है खाके झूठी कस्मे कर के झूठे वादे आज फिर हमको हसाना चाहता है सोई है जो हसरते दिल में तेरे भी प्यार से अपने जगाना चाहता है कर यकीं इस बार अपने आशिक पे वादे सब अपने निभाना चाहता है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/12/2016 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - वादे सब अपने निभाना चाहता है ख्वाब आँखों में सजाना चाहनाह आज फिर दिल गुनगुनाना चाहता है 1 چ रह गये जज्बात दिल के जो वो ग़ज़ल गा कर सुनाना चाहता है मेरे अहसास मे शशिलतु अब ःभी दिल का ये बताना चाहता है வI करके झूठे बादे खाके कस्मे झूठी आज फिर हमको हसाना चाहना है ग सोई है जो हसरते दिल में तेरे भी जगांना   चाहता है प्यार से अपने ज़ कर यकीं इस बार अपने आशिक पे ल वादे सब अपने निभाना चाहता है ( लक्ष्मण दावानी 4) वादे सब अपने निभाना चाहता है ख्वाब आँखों में सजाना चाहनाह आज फिर दिल गुनगुनाना चाहता है 1 چ रह गये जज्बात दिल के जो वो ग़ज़ल गा कर सुनाना चाहता है मेरे अहसास मे शशिलतु अब ःभी दिल का ये बताना चाहता है வI करके झूठे बादे खाके कस्मे झूठी आज फिर हमको हसाना चाहना है ग सोई है जो हसरते दिल में तेरे भी जगांना   चाहता है प्यार से अपने ज़ कर यकीं इस बार अपने आशिक पे ल वादे सब अपने निभाना चाहता है ( लक्ष्मण दावानी 4) - ShareChat
2122 2122 212 ज़िन्दगी इतनी बुरी पहले न थी अंधेरे में गुम खुशी पहले न थी आरजू सहमी है लब खामोश है इस तरह की बे बसी पहले न थी मैंकरूँ किसके गिले शिक्वे यहाँ राहें काँटो से भरी पहले न थी खुश्क सहरा रातें बुझी सी मेरी इस कदर तो तीरगी पहले न थी ये समंदर पीर क्या जाने मेरी मेरे आँखों मे नदी पहले न थी फूल दुआ के चुराकर ले गया इस जहाँ से दुश्मनी पहले न थी ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 16/10/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - মং আাঁ্া ম ননী পমল ন থী ज़िन्दगी इतनी   बुरी पहले न थी थे गुम नथी 393 U6d खुशी आरजू सहमी है  लब खामोश है इस तरह तो बे बसी पहले न थी मैंकरूँ किसके गिले शिक्वे यहाँ नथी ம = ஈ पहले खुश्क सहरा रातें बुझी सी मेरी इस कबरतो तीरगी पहले न थी ये समंदर पीर क्या जाने मेरी मेरे आँखों मे नदी नथी पहले फूल दुआ के चुराकर ले गया जहाँ से दुश्मनी पहले न थी डस लक्ष्मण दावानी  ) মং আাঁ্া ম ননী পমল ন থী ज़िन्दगी इतनी   बुरी पहले न थी थे गुम नथी 393 U6d खुशी आरजू सहमी है  लब खामोश है इस तरह तो बे बसी पहले न थी मैंकरूँ किसके गिले शिक्वे यहाँ नथी ம = ஈ पहले खुश्क सहरा रातें बुझी सी मेरी इस कबरतो तीरगी पहले न थी ये समंदर पीर क्या जाने मेरी मेरे आँखों मे नदी नथी पहले फूल दुआ के चुराकर ले गया जहाँ से दुश्मनी पहले न थी डस लक्ष्मण दावानी  ) - ShareChat
122 122 122 122 नजर में कहाँ अब नजारे बचे है खुशी के वो दिन अब हमारे बचे है लगा ही लिया था गले मौत ने भी दुआओं के ही हम सहारे बचे है हुआ हादसा ज़िन्दगी से कुछ ऐसा फकत याद के ही उजाले बचे है कदम मौत को बढ़ रहे रफ्ता रफ्ता जलाने को तेरे शरारे बचे है बसी थी मेरे दिल मे जो तेरी मूरत मेरे दिल मे उस के शिवाले बचे है तलाशे वफ़ा में हुऐ दर बदर हम महज आँसुओ के हवाले बचे है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 28/9/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - मेरे दिल मे उसके शिवाले बचे है नजर र्मे कहाँ अब नजारे बचे है के हमारे बचे है कहाँ दिन खुशी लगाही लियाःथागले मौत ने भी दुआओं केही हम सहारे बचे है ज़िन्दगी से कुछ ऐसा हआ हादसा के ही उजाले बचे है फकत याद कदम मौत को बढ रहे रपता रपता जताने  = 9 बचे ह बसी थीमेरे दिलमे जो तेरी मूरत मेरे दिल मे उस केशिवाले बच है हुऐ दर बदर हम तलाशे बफ़ा में आँसुओ के हवाले बचे है महज लक्ष्मण दावानी मेरे दिल मे उसके शिवाले बचे है नजर र्मे कहाँ अब नजारे बचे है के हमारे बचे है कहाँ दिन खुशी लगाही लियाःथागले मौत ने भी दुआओं केही हम सहारे बचे है ज़िन्दगी से कुछ ऐसा हआ हादसा के ही उजाले बचे है फकत याद कदम मौत को बढ रहे रपता रपता जताने  = 9 बचे ह बसी थीमेरे दिलमे जो तेरी मूरत मेरे दिल मे उस केशिवाले बच है हुऐ दर बदर हम तलाशे बफ़ा में आँसुओ के हवाले बचे है महज लक्ष्मण दावानी - ShareChat
212 212 212 212 दरमियाँ इस कदर फासला हो गया जिस्म ओ जां से , मेरी जुदा हो गया बनके तूफां गिरी बिजलियाँ वक्त की कर के बर्बाद हमको चला हो गया है ये कैसा जहाँ कोई समझाए तो क्यों वफ़ा लफ़्ज है लापता हो गया लुट चुका हूँ बहुत ज़िन्दगी में सनम अक्ल से दूर अब फलसफा हो गया झूठ ही झूठ दुनियाँ में सच है कहाँ झूठ ही सच का अब आईना हो गया यूँ ही बदनाम हुए उनके प्यार मैं खा म खाँ हर किसीको पता हो गया ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 7/10/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 212 212 212 212 दरमियाँ   इस कदर फासला हो गया जिस्म ओ जां से , मेरी जुदा हो गया बनके तूफां गिरी बिजलियाँ वक्त की कर के बर्बाद चला हा गया हमको है ये कैसा जहाँ कोई समझाए तो क्यों वफ़ा लफ़्ज है लापता हा गया चुका हूँ बहुत ज़िन्दगी में सनम अक्ल सेदूर अब फलसफा हा गया झूठ ही झूठ  दुनियाँ में सच है कहाँ झूठ ही सच का अब आईना हो गया प्यार मैं 4 & 3$ বননাস ভৎ खा म खाँ हर किसीको पता हो गया ৫ ) दावानी ( লঃসতা 7/10/2018 212 212 212 212 दरमियाँ   इस कदर फासला हो गया जिस्म ओ जां से , मेरी जुदा हो गया बनके तूफां गिरी बिजलियाँ वक्त की कर के बर्बाद चला हा गया हमको है ये कैसा जहाँ कोई समझाए तो क्यों वफ़ा लफ़्ज है लापता हा गया चुका हूँ बहुत ज़िन्दगी में सनम अक्ल सेदूर अब फलसफा हा गया झूठ ही झूठ  दुनियाँ में सच है कहाँ झूठ ही सच का अब आईना हो गया प्यार मैं 4 & 3$ বননাস ভৎ खा म खाँ हर किसीको पता हो गया ৫ ) दावानी ( লঃসতা 7/10/2018 - ShareChat
2122 2122 212 अश्क आँखों से बहेगा कब तलक ख्वाब यूँ तन्हा फिरेगा कब तलक लौट आएगा तु मेरी जीस्त में आँख से ओझल रहेगा कब तलक मिल गई है खाक में ये ज़िन्दगी आशियाँ आखिर लुटेगा कब तलक ना मिटा है , ना मिटेगा दिल से तू साथ ऐसे ही निभेगा कब तलक आ गया हूँ उम्र की दहलीज पर दर्द ये दिल अब सहेगा कब तलक तुमसे घर संसार था रौशन मेरा अंधेरा अब ये छटेगा कब तलक ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 14/1/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - आँख से ओझल रहेगा कब तलक अश्क आँखों बह कब तलक तन्हा फिरेगा कब तलक ख्वाब < #q[ लौट आएगा  # आँख से ओझल कब तलक मिल गई है खाक में ये ज़िन्दगी आशियाँ आखिर लुटेगा कब तलक के 43 ना मिटेगा दिल ना मिटा है சி ஈ कब तलक साथ हूँ उम्र की दहलीज पर गया आ ঘ दर्द येदिल अब सहेगा कब तलक 3 घर संसार था रौशन मेरा तुमसे अब ये छटेगा अंधेरा कब तलक  ( लक्ष्मण दावानी ) आँख से ओझल रहेगा कब तलक अश्क आँखों बह कब तलक तन्हा फिरेगा कब तलक ख्वाब < #q[ लौट आएगा  # आँख से ओझल कब तलक मिल गई है खाक में ये ज़िन्दगी आशियाँ आखिर लुटेगा कब तलक के 43 ना मिटेगा दिल ना मिटा है சி ஈ कब तलक साथ हूँ उम्र की दहलीज पर गया आ ঘ दर्द येदिल अब सहेगा कब तलक 3 घर संसार था रौशन मेरा तुमसे अब ये छटेगा अंधेरा कब तलक  ( लक्ष्मण दावानी ) - ShareChat
2122 2122 212 मुस्कराये तो जमाना हो गया दिल गमों का ही ठिकाना हो गया आह निकली तो इशारे भी हुए दर्द से फिर दोस्ताना हो गया दौरे तारीकी बड़ा मुश्किल रहा रौशनी का तो बहाना हो गया कागजी रिश्तों पे क्या करते यकीं रहनुमा ही जब बेगाना हो गया बे मुरब्बत है जमाना जान कर रुखसती को आबुदाना हो गया आस दिलमें थी फलक को छूने की नेमतों पर ही निशाना हो गया ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 4/10/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 212 2122 2122 মুব্যাঠ নী जमाना हा गया दिल गमों का ही ठिकाना हो गया आह निकली तो इशारे भी हुए दर्द   से॰ फिर दोस्ताना గౌ गया मुश्चित दौरे तारीकी बडा گ रौशनी <1<1 त ChT 322 S I Ra  கரசசி जबषबेनानौ १६ रहनमरही T बे मुरब्बत है எ# ত` रुखसती को आबुदाना 6- आस दिलमें थी फलक कने की नेमतों पर ही निशाना हामया ( লঃসতা মাবানী & 4/10/018 212 2122 2122 মুব্যাঠ নী जमाना हा गया दिल गमों का ही ठिकाना हो गया आह निकली तो इशारे भी हुए दर्द   से॰ फिर दोस्ताना గౌ गया मुश्चित दौरे तारीकी बडा گ रौशनी <1<1 त ChT 322 S I Ra  கரசசி जबषबेनानौ १६ रहनमरही T बे मुरब्बत है எ# ত` रुखसती को आबुदाना 6- आस दिलमें थी फलक कने की नेमतों पर ही निशाना हामया ( লঃসতা মাবানী & 4/10/018 - ShareChat