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#📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 1222122 1222 जिसे सब हुस्न की कहते अदा है मोहब्बत में उसी के दिल जेला है कल कल में जोये सुनाई दे। रही सिसकते आब में किस की सदा है ননাতিংা ম रंजिश व साजिश ত্লুণী दबा कर नफ़रतें दिल मे रखा है लुटा दीं खुशियाँ सब जिनपे अपनी रकीबो संग मिल के वो छला है वही कशिश हमे फिर खींच लाई नशा है मुहब्बत भी सजा है য प्यास तू सहरा में आकर ؟؟ हमारी तुम से इतनी इल्तिजा है ( লঃসতা মাবানী ৫) 20/2017 Shot 00 1222122 1222 जिसे सब हुस्न की कहते अदा है मोहब्बत में उसी के दिल जेला है कल कल में जोये सुनाई दे। रही सिसकते आब में किस की सदा है ননাতিংা ম रंजिश व साजिश ত্লুণী दबा कर नफ़रतें दिल मे रखा है लुटा दीं खुशियाँ सब जिनपे अपनी रकीबो संग मिल के वो छला है वही कशिश हमे फिर खींच लाई नशा है मुहब्बत भी सजा है য प्यास तू सहरा में आकर ؟؟ हमारी तुम से इतनी इल्तिजा है ( লঃসতা মাবানী ৫) 20/2017 Shot 00 - ShareChat
122 122 122 122 झुकाकर पलक मुस्कराना तुम्हारा अदा से मुझे युँ रिझाना तुम्हारा सितम ढा रही है ये दिल पे हमारे उठाकर ये पलकें गिरना तुम्हारा बहुत याद आते है वो लम्हे हमको मना कर गले से लगाना तुम्हारा कहीं बिजलियाँ ना गिरा दे दिलो पर युँ शाने से आँचल गिराना तुम्हारा बहुत बार लुट चुका मोहब्बत में हमे याद है वो रुलाना तुम्हारा उठाकर कफन देख चहरा न मेरा मुझे भाए ना सर झुकाना तुम्हारा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 30/9/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 122 122 122 122 झकाकर पलक मुस्कराना तुऱ्हारा अदरसे  मुझे युँ रिझाना तुम्हारा सिंतम ढा रही है ये दिल पे हमारे उठाकर ये गिरना तुम्हारा  पलकें बहुत याद आते है वो लम्हे हमको से लगाना तुम्हारा मना कर गले कहीं बिजलियाँ ना गिरा दे दिलो पर युँ शाने से आँचल गिराना तुम्हारा बहुत बार॰लुट चुका मोहब्बत में हमे वो याद है रुलाना S5K उठाकर कफन देख चहरा नमेरा मुझे भाए ना सर झुकाना तुम्हारा ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 36/9/2017 Shot on Vivo Al 122 122 122 122 झकाकर पलक मुस्कराना तुऱ्हारा अदरसे  मुझे युँ रिझाना तुम्हारा सिंतम ढा रही है ये दिल पे हमारे उठाकर ये गिरना तुम्हारा  पलकें बहुत याद आते है वो लम्हे हमको से लगाना तुम्हारा मना कर गले कहीं बिजलियाँ ना गिरा दे दिलो पर युँ शाने से आँचल गिराना तुम्हारा बहुत बार॰लुट चुका मोहब्बत में हमे वो याद है रुलाना S5K उठाकर कफन देख चहरा नमेरा मुझे भाए ना सर झुकाना तुम्हारा ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 36/9/2017 Shot on Vivo Al - ShareChat
221 2121 1221 212 बस देखते है तुम्हे हि दीवानगी से हम घायल हुए है यार तेरी सादगी से हम होशो हवास खोये हुए बैठे है यहाँ मदहोश हुए यार तेरी आशिकी से हम शिद्दत -ऐ -दर्द का था न अहसास भी हमे अब तो तड़फ रहे यार बेबसी से हम खोई है मंजिले ओर राहें बदल गई बेज़ार यार हो गए है ज़िन्दगी से हम खुश्बू चमन में प्यार कि तेरे सदा रही खुद को जुदा न कर पाये बानगी से हम किस मार्ग पर ले आई मुहब्बत में ज़िन्दगी अब खो न जायेअपने ही आवारगी से हम ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 14/10/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 2121 4_ 1221 212 बस देखते है तुम्हे हि दीवानगी से हम घायल हुए है यार तेरी सादगी से हम होशो खोये है यहाँ हवास हुए   बैठे मदहोश हुए यार तेरी आशिकी से हम शिद्दत -ऐ -दर्द का था न अहसास भी हमे अब तो तड़फ रहे यार बेबसी से हम खोई ৯ মঁতিল ओर राहें बदल गई R हो  गए है ज़िन्दगी से हम यार खुश्बू चमन में प्यार कि तेरे सदा रही खुद को जुदा न कर पाये बानगी #೯ किस मार्ग पर ले आई मुहब्बत में ज़िन्दगी अब खो न जायेअपने ही आवारगी #೯ ( लक्ष्मण दावानी Z 14/10/2017 Shot 0n 10 Vivo Al Cenerel 2121 4_ 1221 212 बस देखते है तुम्हे हि दीवानगी से हम घायल हुए है यार तेरी सादगी से हम होशो खोये है यहाँ हवास हुए   बैठे मदहोश हुए यार तेरी आशिकी से हम शिद्दत -ऐ -दर्द का था न अहसास भी हमे अब तो तड़फ रहे यार बेबसी से हम खोई ৯ মঁতিল ओर राहें बदल गई R हो  गए है ज़िन्दगी से हम यार खुश्बू चमन में प्यार कि तेरे सदा रही खुद को जुदा न कर पाये बानगी #೯ किस मार्ग पर ले आई मुहब्बत में ज़िन्दगी अब खो न जायेअपने ही आवारगी #೯ ( लक्ष्मण दावानी Z 14/10/2017 Shot 0n 10 Vivo Al Cenerel - ShareChat
212 1222 212 1222 सजदे में तेरे सर अब भी झुका हमारा है जो खुदा तुम्हारा है , वो खुदा हमारा है देख ले कभी झुकाके नज़र ये दिलमे भी अक्स दिलमे तेरे अब भी बसा हमारा है होते हो पशेमाँ क्यूँ दिलसे अपने ऐ यारा हाथ आज भी दुआ में उठा हमारा है दिख रही फिजाओं में जोउदासियाँ तुम्हे एक दिल फिंजा मे टूटा हुआ हमारा है रौनके सभी चहरे की बिखर गईं मेरे हिज्रे गममें ये जीवन ढल गया हमारा है गमन कर निगाहों सेबहते हुएअश्को का दर्द मोहब्बत का इनमें छुपा हमारा है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 20/10/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 212 1222 212 1222 सजदे में तेरे सर अब भी झुका हमारा है जो खुदा तुम्हारा है , वो खुदा हमारा है देख ले कभी झुकाके नज़र ये दिलमे भी अक्स दिलमे तेरे अब भी बसा हमारा है शेमा क्यूँ दिलसे अपने ऐ यारा भी दुआ में उठा हमारा है हाथ आज दिख रही फिजाओं में जोउदासियाँ तुम्हे एक ।दिल फिंजा मे  टूटा हुआ हमारा है रौनके सभी चहरे की बिखर गईं मेरे हिज्रे गममें ये जीवन ढल गया हमारा है निगाहों सेबहते हुएअश्को  गमन कर दर्द मोहब्बत का इनमें छुपा हमारा हे लक्ष्मण दावानी ८ ) 20/10/2017 212 1222 212 1222 सजदे में तेरे सर अब भी झुका हमारा है जो खुदा तुम्हारा है , वो खुदा हमारा है देख ले कभी झुकाके नज़र ये दिलमे भी अक्स दिलमे तेरे अब भी बसा हमारा है शेमा क्यूँ दिलसे अपने ऐ यारा भी दुआ में उठा हमारा है हाथ आज दिख रही फिजाओं में जोउदासियाँ तुम्हे एक ।दिल फिंजा मे  टूटा हुआ हमारा है रौनके सभी चहरे की बिखर गईं मेरे हिज्रे गममें ये जीवन ढल गया हमारा है निगाहों सेबहते हुएअश्को  गमन कर दर्द मोहब्बत का इनमें छुपा हमारा हे लक्ष्मण दावानी ८ ) 20/10/2017 - ShareChat
2122 1212 22/112 ना खलिश ना मलाल रखते है दिल में पर कुछ सवाल रखते है जब से उन से हुई मोहब्बत है दर्दे दिल बे मिसाल रखते है जब सुनाते है हाले दिल अपना दिल कलेजा निकाल रखते है दिल में नफरत नही मुहब्बत है जाने क्यों इसको पाल रखते है हो न हमसे कभी खफा जाना दिल में ऐसा खयाल रखते है इसतरह उलझे उनके ज़ुल्फो में हुस्न का ऐसा जाल रखते है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 15/2/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - दिल कलेजा निकाल रखते है ना खलिश ना मलाल रखते है दिल में कुछ तो सवाल रखते हुई है जबसे मोहब्बत उनसे fd { बे मिसाल रखते है ग मुनाते है हाले दिल अपना जब दिल कलेजा निकाल रखते है 5 पाले है नफ़रतें दिलो में खूब जाने क्यों वो सँभाल रखते है লে ೩T कभी खफा जाना $ दिल खयाल रखते है 4]][ उलझे उनके # ज़ुल्फो इसतर जाल रखते है हुस्न का ऐसा लक्ष्मण दावानी दिल कलेजा निकाल रखते है ना खलिश ना मलाल रखते है दिल में कुछ तो सवाल रखते हुई है जबसे मोहब्बत उनसे fd { बे मिसाल रखते है ग मुनाते है हाले दिल अपना जब दिल कलेजा निकाल रखते है 5 पाले है नफ़रतें दिलो में खूब जाने क्यों वो सँभाल रखते है লে ೩T कभी खफा जाना $ दिल खयाल रखते है 4]][ उलझे उनके # ज़ुल्फो इसतर जाल रखते है हुस्न का ऐसा लक्ष्मण दावानी - ShareChat
221 2121 1221 212 दिल चाहता है फिर एक अहसान ले ले तू फिर इश्क कर के दर्द का तूफान ले ले तू छुपा के गम पुराने सभी मोहब्बत के तुम झूठी सही लबो पे ये मुस्कान ले ले तू आ जायेगा युँ चहरे पे तेरे निखार वो हाथो में हाथ थाम के गुलदान ले ले तू कब तक बिताएगा युँ उदासी में ज़िन्दगी इस ज़िन्दगी में जीने का सामान ले ले तू जिन्हें है ज़िन्दगी पे तेरी रस्क होने दो लगती है राहें तुम्हे जो आसान ले ले तू कट जायेगी फिर तेरी खुशहाल ज़िन्दगी दिल मे बसा के कोई ,तो अरमान ले ले तू ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/11/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 1221 221 2121 212 ল ল নু दिल चाहता है फिर एक अहसान 43 फिर इश्क   कर के दर्द का तूफान ले छुपा के गम सरभी मोहब्बत के तुम पुराने ল ল নু झूठी सही रबोऐये। मुस्कान खखायेगा युँ चहर वेखेर शेखार वा में हाथ थाम के गुलदानललेतू हथो बिताएगा युँ उनसाय ज़िन्दगी कब तक सामानले ले तू 50த जिन्हें है ज़िन्दगी पे तेरी रस्व होनेदो লী ল 66 लगती है राहें तुम्हे जो आासान कट जायेगी फिर तेरी खुशहाल जिन्दगी ले लेतू दिलमे्यसा केकोई तो अरमान ( नक्ष्मण दावानी Z ) Shot onU1ol 10/11/2017 Vivo Alcamera 1221 221 2121 212 ল ল নু दिल चाहता है फिर एक अहसान 43 फिर इश्क   कर के दर्द का तूफान ले छुपा के गम सरभी मोहब्बत के तुम पुराने ল ল নু झूठी सही रबोऐये। मुस्कान खखायेगा युँ चहर वेखेर शेखार वा में हाथ थाम के गुलदानललेतू हथो बिताएगा युँ उनसाय ज़िन्दगी कब तक सामानले ले तू 50த जिन्हें है ज़िन्दगी पे तेरी रस्व होनेदो লী ল 66 लगती है राहें तुम्हे जो आासान कट जायेगी फिर तेरी खुशहाल जिन्दगी ले लेतू दिलमे्यसा केकोई तो अरमान ( नक्ष्मण दावानी Z ) Shot onU1ol 10/11/2017 Vivo Alcamera - ShareChat
2122 1212 22/112 बहते अश्को के जाम रहने दो शामें गम मेरे नाम रहने दो सजदे में है सदा से हम तेरे मुझे अपना गुलाम रहने दो आरजुएं दफ़न है दिल में सब इनका कुछ एहतिराम रहने दो कबतलक तरसूँ हिज्र-ऐ-गम में शाम इक मेरे नाम रहने दो कहने है राज दिलके हमको भी दर्दे दिल की एक शाम रहने दो तुम मिटा ना सकोगे सर से ये सर मेरे ये इल्जाम रहने दो मिट न जाऊं मैं इल्जाम से तेरे कुछ मेरा भी मकाम रहने दो ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 12/2/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - s अपना गु़लाम रहने दो बहते अश्को के जाम ೩6 शामें गम मेरे नाम रहने ೩೯ सजदे में है तेरे सदा गु़लाम रहने दो मुझे अपना आरजुएं दफ़न है दिल में सब इनका तो एहतिराम रहने दो तरसूँ हिज्र ऐ ्गम में कबतलक ग शाम   इक मेरे नाम रहने दो कहने है राज दिलके हमको भी इसका भी एहतिमाम रहने दो ज़ বুস সিমা না সক্ষীীী মংময सर मेरे ये इतिहाम ఢె रहने ल और  सर मेरे तुम भी সন লখা कुछ मेरा भी मकाम रहने दो लक्ष्मण दावानी s अपना गु़लाम रहने दो बहते अश्को के जाम ೩6 शामें गम मेरे नाम रहने ೩೯ सजदे में है तेरे सदा गु़लाम रहने दो मुझे अपना आरजुएं दफ़न है दिल में सब इनका तो एहतिराम रहने दो तरसूँ हिज्र ऐ ्गम में कबतलक ग शाम   इक मेरे नाम रहने दो कहने है राज दिलके हमको भी इसका भी एहतिमाम रहने दो ज़ বুস সিমা না সক্ষীীী মংময सर मेरे ये इतिहाम ఢె रहने ल और  सर मेरे तुम भी সন লখা कुछ मेरा भी मकाम रहने दो लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 2122 212 माजरत जिस दिन खता हो जाएगा लग्जिशों का तब मजा हो जाएगा कर रहे हो आज जिसपे तुम यकीं देखना कल बे वफा हो जाएगा पूजेगा तब कौन पत्थर को यहाँ आदमी जिस दिन खुदा हो जाएगा फिर मिला ना पाएंगे हमसे नज़र सच से जब भी सामना हो जाएगा लर्जिशे लब को कभी महसूस कर दर्दे दिल तेरा दफा हो जाएगा साथ काँटो पर मेरे चल के देखो जोश ओ जुनू हवा हो जाएगा ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 5/12/2017 माजरत - क्षमा याचना लग्जिशों - भयंकर भूलें लर्जिशे लव - होंठो की कंपन #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 2122 2122 212 माजरत जिस दिन खता हो जाएगा लग्जिशों तब मजा हो जाएगा ChT कर रहे होे आज जिसपे तुम यकीं देखना कल बे वफाहो जाएगा तब कौन पत्वर को यहाँ पूजेगा आदमी जिस दिन   खुदा हो जाएगा फिर मिला ना पाएंगे हमसे नज़र जाएगा যামনা 61 যনযী তন নী लर्जिशे लब को कभी महसूस कर दर्दे   दिल तेरा दफा हो जाएगा साथ काँटो पर मेरे चल के देखो जोश ओ ৪ী আহা हवा जुनू ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 5/12/2017 क्षमा याचना माजरत भयंकर भूलें लग्जिशों CCu होंठो की कंपन ल्जिश लव 2122 2122 212 माजरत जिस दिन खता हो जाएगा लग्जिशों तब मजा हो जाएगा ChT कर रहे होे आज जिसपे तुम यकीं देखना कल बे वफाहो जाएगा तब कौन पत्वर को यहाँ पूजेगा आदमी जिस दिन   खुदा हो जाएगा फिर मिला ना पाएंगे हमसे नज़र जाएगा যামনা 61 যনযী তন নী लर्जिशे लब को कभी महसूस कर दर्दे   दिल तेरा दफा हो जाएगा साथ काँटो पर मेरे चल के देखो जोश ओ ৪ী আহা हवा जुनू ( लक्ष्मण दावानी ८ ) 5/12/2017 क्षमा याचना माजरत भयंकर भूलें लग्जिशों CCu होंठो की कंपन ल्जिश लव - ShareChat
122 122 122 12 सदा साथ हम जिनके चलते रहे वही राहे मंजिल पे छलते रहे जगी दिल में उम्मीदे जिनसे मेरी निगाहों में उन ही के खलते रहे किये वादे थे उम्र भर साथ के मुसाफिर से रस्ते बदलते रहे लबो से हँसी छीन कर मेरे लहू से मेरे लब वो रंगते रहे कुचल सारे अरमां दिलो के मेरे मिला हाथ गैरो से हसते रहे यही ज़िन्दगी की कहानी रही सदा साथ मेरे झगड़ते रहे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/2/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 2 122 122 122 सदा साथ हम जिनके चलवे रहे " राहे मंजिल जगी दिल में उम्मीदे जिन निगाहों   में उन ही के खलते रह किये वादे थे उम्र भर साथ के रस्ते बदलते रहे मुसाफिर से लबो   से हँसी छीन कर मेरे लब वो रंगते रहे লচ্ু যী সং कुचल   सारे अरमां दिलो के मेरे मिला हाथ गैरो से हसते रहे ज़िन्दगी की कहानी रही मेरे झगड़ते रहे 2779 सदा लक्ष्मण दावानी ८ ) 10/2/2017 2 122 122 122 सदा साथ हम जिनके चलवे रहे राहे मंजिल जगी दिल में उम्मीदे जिन निगाहों   में उन ही के खलते रह किये वादे थे उम्र भर साथ के रस्ते बदलते रहे मुसाफिर से लबो   से हँसी छीन कर मेरे लब वो रंगते रहे লচ্ু যী সং कुचल   सारे अरमां दिलो के मेरे मिला हाथ गैरो से हसते रहे ज़िन्दगी की कहानी रही मेरे झगड़ते रहे 2779 सदा लक्ष्मण दावानी ८ ) 10/2/2017 - ShareChat
2122 1212 22 राजे दिल अपना में बताता हूँ जख्म खा कर भी मुस्कराता हूँ पूछ ना हँसने की वजह हम से आँख नम मैं भी कर दिखता हूँ लाख गहरा हो इश्क का दरिया वादे जाँ दे के भी निभाता हूँ राह में मोड़ तो कई आये हरकदम खुद को आजमाता हूँ मौज हर इक़ बहा के ले जाती बन के चट्टान में अड़ जाता हूँ है मुबारक मुझे ये तन्हाई रोज दिल इस से बाहलाता हूँ ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/12/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 2122 1212 22 राजे दिल अपना में बताता हँ 8 जख्म खा कर भी मुस्कराता पूछ ना हँसने की वजह हम से आँख नम मैं भी कर दिखता हूँ लाख गहरा हा इश्क का दरिया वादे जाँ देके भी निभाता हूँ  Hls = राह कई आये हरकदम खुद को आजमाता हूँ मौज हर इक़ बहा के ले जाती बन के चट्टान में अड़ जाता हूँ 3 मुझे 4 గౌగిక్షే HaRa रोज दिल इस से हलाता हू ( लक्ष्मण दावानी ८ ) Shot onU1O Vivo A camera 10/19.9017 2122 1212 22 राजे दिल अपना में बताता हँ 8 जख्म खा कर भी मुस्कराता पूछ ना हँसने की वजह हम से आँख नम मैं भी कर दिखता हूँ लाख गहरा हा इश्क का दरिया वादे जाँ देके भी निभाता हूँ  Hls = राह कई आये हरकदम खुद को आजमाता हूँ मौज हर इक़ बहा के ले जाती बन के चट्टान में अड़ जाता हूँ 3 मुझे 4 గౌగిక్షే HaRa रोज दिल इस से हलाता हू ( लक्ष्मण दावानी ८ ) Shot onU1O Vivo A camera 10/19.9017 - ShareChat