-
ShareChat
click to see wallet page
@1032376567
1032376567
-
@1032376567
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
2122 1212 22 रुख को पर्दे से ना छुपा दिलबर चाँद सा मुखड़ा तो दिखा दिलबर रब से मैं माँगता हूँ दुआएँ बन के आओ मेरे खुदा दिलबर भर चुके जख्म सब पुराने अब इक नया जख्म तू लगा दिलबर रात भर सलवटें ये चुभती हैं खाब आंखों में फिर बसा दिलबर राहें अनजान ओ सफर तन्हा मंजिले तार्रुफ़ तो करा दिलबर ना गिला है न कोई शिकवा अब कोई इल्जाम तो लगा दिलबर रातें कटती हैं खत तेरे पढ़ कर इनको यूँ तो न तू जला दिलबर ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 30/10/2018 गिरह ज़िन्दगी से बेजार हो चुके ज़िन्दगी को नहीं मिला दिलबर #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 1212 22 2122 रुखको पर्दे सेना छुपा दिलबर  चाँद सा मुखड़ा तो दिखा दिलबर  हूँ  दुआएँ से॰ मै माँगता रब बन के आओ मे॰ खुदा दिव भर चुके पुराने अब सब जख्म जख्म तू लगा दिलबर इक नया सेलवटें ये है चुभती < న खाब आंखों में फिर बसा दिलबरं ओ सफर तन्हा राहें अनजान मंजिले तार्रुफ़ तो करा दिलबर न कोई शिकवा ना गिला है 3q लगा दिलबर S इल्जाम तो राते कटती हैं खत तेरे पढ़ कर নী ন নু ডালা নিল্য ! इनको यूँ लक्ष्मण दावानी 0~9/40)8 गिरह 6 बेजार স 8 f Tf 1212 22 2122 रुखको पर्दे सेना छुपा दिलबर  चाँद सा मुखड़ा तो दिखा दिलबर  हूँ  दुआएँ से॰ मै माँगता रब बन के आओ मे॰ खुदा दिव भर चुके पुराने अब सब जख्म जख्म तू लगा दिलबर इक नया सेलवटें ये है चुभती < న खाब आंखों में फिर बसा दिलबरं ओ सफर तन्हा राहें अनजान मंजिले तार्रुफ़ तो करा दिलबर न कोई शिकवा ना गिला है 3q लगा दिलबर S इल्जाम तो राते कटती हैं खत तेरे पढ़ कर নী ন নু ডালা নিল্য ! इनको यूँ लक्ष्मण दावानी 0~9/40)8 गिरह 6 बेजार স 8 f Tf - ShareChat
1222 1222 1222 1222 संजो रख्खे हैं जो सपने उन्हें बतला नहीं सकता कलेजा चीरकर अपना तुम्हे दिखला नहीं सकता तुझे चाहा तुझे पूजा तेरी ही बन्दगी की है किसी भी और के आगे ये सर झुका नहीं सकता यूँ मिलती है मसर्रत जो तुम्हे ये दिल दुखाने में कभी में दिलकिसी का ऐसे तो दुखा नहीं सकता बसी है मेरे साँसों में महक कुछ इस कदर तेरी छुपाना चाहूं भी तो मैं कभी छुपा नहीं सकता न होना तुम खफा हम से कभी भी ऐ मेरे हमदम जुदा होके में तुमसे ज़िन्दगी महका नहीं सकता करूँ मैं कैसे तुमसे झूठे वादे हम सफर मेरे जमी पर चाँद तारे तोड़ कर में ला नहीं सकता ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 16/1/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - जुदा होके में तुमसे ज़िन्दगी महका नहीं सकता गज़़ल सजोये   सपने सब के सामने बतला नहीं सकता दिखला नहीं सकता कलेजा चीरकर अपना 38 নযী ৪ী বল্ষীী বী ৯ तुझे तुझे पूजा चाहा किसी भी और के आगे ये सर झुका नहीं सकता यूँ मिलती है मसर्रत जो तुम्हे ये दिल दुखाने में कभी में दिलकिसी का ऐसे तो नहीं सकता Nವ बसी है  मेरे साँसों में महक कुछइस कदर तेरी तो मैं कभी नहीं सकता चाहूं भी छुपा छुपाना न होना तुम खफा हम से कभी भी ऐ मेरे हमदम जुदा होके में ज़िन्दगी महका नहीं सकता तुमसे करूँ मैं कैसे वादे हम सफर भेरे 58 तुमसे जमी पर चाँद तारेतोड़ कर मेंला नहीं कता ( लक्ष्मण दावानी जुदा होके में तुमसे ज़िन्दगी महका नहीं सकता गज़़ल सजोये   सपने सब के सामने बतला नहीं सकता दिखला नहीं सकता कलेजा चीरकर अपना 38 নযী ৪ী বল্ষীী বী ৯ तुझे तुझे पूजा चाहा किसी भी और के आगे ये सर झुका नहीं सकता यूँ मिलती है मसर्रत जो तुम्हे ये दिल दुखाने में कभी में दिलकिसी का ऐसे तो नहीं सकता Nವ बसी है  मेरे साँसों में महक कुछइस कदर तेरी तो मैं कभी नहीं सकता चाहूं भी छुपा छुपाना न होना तुम खफा हम से कभी भी ऐ मेरे हमदम जुदा होके में ज़िन्दगी महका नहीं सकता तुमसे करूँ मैं कैसे वादे हम सफर भेरे 58 तुमसे जमी पर चाँद तारेतोड़ कर मेंला नहीं कता ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
12122 12122 ये दर्दे दिल बेशुमार आये चाहत में होके शुमार आये दिखा नहीं कोई तेरे जैसा नज़र में मेरी हज़ार आये मुद्दत से है आरजू मेरी भी मेरे लिये गम गुसार आये फिगार है तेरे चाहतो में कभी हमें भी करार आये इनायतें बक्श दे हमें भी दहर में मेरी बहार आये सुखन लिखी मैंने नाम तेरे यूँ सुर दे अपने बयार आये ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 15/1/2017 फिगार - घायल दहर - दुनियाँ सुखन - कविता #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - दहर में मेरी बहार आये बेशुमार 24 fct 3114 में होके शुमार आये नहीं कोई तेरे जैसा तो हज़ार आये নড়াৎ आरजू   मेरी भी मृद्दत मेरे लि गम गुसार आये ग फिगार है तेरे में चाहतो ಿ ಈ 31ಶ कभी ज़ बक्श दे हमें भी ल मेरी बहार आये लिखी   मैंने नाम तेरे अंपने बयार आये सुर दे লঃসতা নানানী ) दहर में मेरी बहार आये बेशुमार 24 fct 3114 में होके शुमार आये नहीं कोई तेरे जैसा तो हज़ार आये নড়াৎ आरजू   मेरी भी मृद्दत मेरे लि गम गुसार आये ग फिगार है तेरे में चाहतो ಿ ಈ 31ಶ कभी ज़ बक्श दे हमें भी ल मेरी बहार आये लिखी   मैंने नाम तेरे अंपने बयार आये सुर दे লঃসতা নানানী ) - ShareChat
2122 1212 22 बिन तेरे पास अब बचा क्या है अंधेरो के सिवा रहा क्या है खो दिया तुझे खो के सब मैंने ज़िन्दगी में रहा मजा क्या है घुट रही साँसे धीरे धीरे अब मौत के सिवा रास्ता क्या है लुट गई खुशियां सभी मेरी कह रहे हो तेरा मिटा क्या है उड़ गये रंग ज़िन्द के सारे ओ बड़ी इससे बद्दुआ क्या है ना दवा में असर न दुआ में रब ने भी मेरा सुना क्या है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 16/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - 2122 1212 22 बिन तेरे पास अब बचा क्या है क्या है अंधेरो के सिवा रहा ৯ মন্ মন ভ্রী নিমা तुझे खो ज़िन्दगी में रहा ன I8 घुट रही साँसे धीरे धीरे अब .9 के सिवा रास्ता I 8 Cu [(( सभी मेरी खुशियां 19 कह रहे तेसः मिस क्याहै িম 35 ओ बद्दुआ व्य्हे মলা  ने। Vt 2122 1212 22 बिन तेरे पास अब बचा क्या है क्या है अंधेरो के सिवा रहा ৯ মন্ মন ভ্রী নিমা तुझे खो ज़िन्दगी में रहा ன I8 घुट रही साँसे धीरे धीरे अब .9 के सिवा रास्ता I 8 Cu [(( सभी मेरी खुशियां 19 कह रहे तेसः मिस क्याहै িম 35 ओ बद्दुआ व्य्हे মলা  ने। Vt - ShareChat
212 212 212 राह कोई दिखा ज़िन्दगी कुछ तरस हमपे खा ज़िन्दगी खो दिया आँख का तारा भी और ना अब रुला ज़िन्दगी गाज दिल पर गिरी है अभी शूल ना ओ चुभा ज़िन्दगी घुट रही साँसे तन्हाई में और ना आजमा ज़िन्दगी अंधेरो में जियूँ कब तलक कोई दे मशवरा ज़िन्दगी और तो पास कुछ ना बचा मौत से ही मिला ज़िन्दगी ले डूबेगा मेरा गम मुझे कर दवा या दुआ ज़िन्दगी ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 12/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - 212 212 212 दिखा   ज़िन्दगी कोई 6 कुछ तनस हमपे खा ज़िन्दगी खोदिया आँखं का तारा भी ज़िन्दगी और नाअब ঠলা गिरी है अभी गाज दिलष भा ज़िन्दगी शूल नाओ तन्हाई में g 5" 4 और  STHT ना जियूँ कब तलक अंधेरो ज़िन्दगी कोई ఢ मशवरा और तोपास कुछ ना बचा मौत से ही मिला ज़िन्दर्गी डूबेगा  मेरा गम   मुझे दुआ ज़िन्दगी C ು लक्ष्मणचा 2/2018 212 212 212 दिखा   ज़िन्दगी कोई 6 कुछ तनस हमपे खा ज़िन्दगी खोदिया आँखं का तारा भी ज़िन्दगी और नाअब ঠলা गिरी है अभी गाज दिलष भा ज़िन्दगी शूल नाओ तन्हाई में g 5" 4 और  STHT ना जियूँ कब तलक अंधेरो ज़िन्दगी कोई ఢ मशवरा और तोपास कुछ ना बचा मौत से ही मिला ज़िन्दर्गी डूबेगा  मेरा गम   मुझे दुआ ज़िन्दगी C ು लक्ष्मणचा 2/2018 - ShareChat
122 122 122 122 जरा देख आँखों मे पानी है अपनी दिले दर्द की भी कहानी है अपनी रूठा ही रहा वक़्त हम से हमेशा जली उस से ही ज़िन्दगानी है अपनी उतरता है जो दिल मे चुप चाप मेरे लुटाई उसी पर जवानी है अपनी बे बस छोड़ वापस चला तो गया तू ये जाँ अब तुझी पर लुटानी है अपनी कलम भी मेरी रो पड़ी आज देखो ग़ज़ल जो लिखी वो सुनानी है अपनी खयालो में जिसकेफकत खोये है हम यही बात उस को बतानी है अपनी लिखे जाएंगे फिर से अफसाने अपने कहानी जो सब से छुपानी है अपनी ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - ये जॉं अब तुझी पर लुटानी है अपनी जरा देख आँखों मे पानी है अपनी दिले दर्द की भी है अपनी कहानी रूठा ही रहा वक़्त हम से हमेशा जली उस से ही ज़िन्दगानी है अपनी মী उतरता है जो दिल मे चुप चाप मेरे पर जिवानी है अपनी उसी लुटाई बे बस छोड वापस चला तोगया तू लुटानी है अपनी ये जाँ अब तुझी पर के कलम भी मेरी रोपड़ी आज देखो है अपनी ग़ज़ल जो लिखी वो सुनानी खयालो में जिसकेफकत खोये है हम घे उस को बतानी है अपनी यही बात लिखे जाएंगे  फिर से अफसाने अपने है अपनी जोसब से कहानी छुपानी লঃসতা নানানী ये जॉं अब तुझी पर लुटानी है अपनी जरा देख आँखों मे पानी है अपनी दिले दर्द की भी है अपनी कहानी रूठा ही रहा वक़्त हम से हमेशा जली उस से ही ज़िन्दगानी है अपनी মী उतरता है जो दिल मे चुप चाप मेरे पर जिवानी है अपनी उसी लुटाई बे बस छोड वापस चला तोगया तू लुटानी है अपनी ये जाँ अब तुझी पर के कलम भी मेरी रोपड़ी आज देखो है अपनी ग़ज़ल जो लिखी वो सुनानी खयालो में जिसकेफकत खोये है हम घे उस को बतानी है अपनी यही बात लिखे जाएंगे  फिर से अफसाने अपने है अपनी जोसब से कहानी छुपानी লঃসতা নানানী - ShareChat
221 2121 1221 212 ज़िन्दा वजूद तो है मगर राहत नहीं रही तेरे बगैर जीने की चाहत नहीं रही बिस्तर कि सिलवटे दे रही दास्ताने ये नींदों कि रात में अब शिरकत नहीं रही कर ले अंदाजे गुफ्तगू मीठेे तु जितने भी लहजा बता रहा है मुहब्बत नहीं रही कुछ बंदिशे थी तेरे मुहब्बत में जाने जां अब जुल्फ की तेरे वो नेमत नहीं रही खोये से रहते थे तेरे खाबो ख़याल में उन ख्वाबो में जीने की आदत नहीं रही ताउम्र को निभाने कि कस्मे जो खाई थी उन्हें निभाने की अब जरूरत नहीं रही ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 13/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - नींदों कि रात में अब शिरकत नहीं रही गज़ल है मगर राहत नहीं रही रजूदीने मीग ।जन्दा নং नहीं रही बगैर चाहत बिस्तर कि सिलवटे दे रही दास्ताने ये नींदों कि रात में अब शिरकत   नहीं रही जे गुफ्तगू मीठे तु जितने भी ল अंदा बता रहा है मुहब्बत नहीं रही लहजा कुछ बंदिशे थी तेरे   मुहब्बत में जाने जां जुल्फ की तेरे वो नेमत नहीं रही अब खोये से रहते थे तेरे खाबो ख़याल में उन ख्वाबो में जीनेकी आदत नहीं रही ताउम्र को निभाने कि कस्मे जो खाई थी उन्हें निभाने की अब जरूरत नहीं रही ( লঃসতা মানানী नींदों कि रात में अब शिरकत नहीं रही गज़ल है मगर राहत नहीं रही रजूदीने मीग ।जन्दा নং नहीं रही बगैर चाहत बिस्तर कि सिलवटे दे रही दास्ताने ये नींदों कि रात में अब शिरकत   नहीं रही जे गुफ्तगू मीठे तु जितने भी ল अंदा बता रहा है मुहब्बत नहीं रही लहजा कुछ बंदिशे थी तेरे   मुहब्बत में जाने जां जुल्फ की तेरे वो नेमत नहीं रही अब खोये से रहते थे तेरे खाबो ख़याल में उन ख्वाबो में जीनेकी आदत नहीं रही ताउम्र को निभाने कि कस्मे जो खाई थी उन्हें निभाने की अब जरूरत नहीं रही ( লঃসতা মানানী - ShareChat
1212 1122 1212 22/112 रहे कहीं भी तु तुझपे ही ध्यान रहता है तु दिल मे मेरे मेरी बन के जान रहता है तेरे कदम के निशाँ मेरे दिलपे कायम है यहाँ पे बन के तू मेरा गुमान रहता है छुपी है आहें तबस्सुम में हिज्र की तेरे तड़फता है दिल मगर बेजुबान रहता है रहा जो सर पे तेरे साये की तरह हरदम झुका हुआ वो अब आसमान रहता है करूं में कैसे यकीं , छोड़ कर गया है तू बसा है रूह में मेरी ये भान रहता है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 12/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - रहे कहीं भी तु तुझपे ही थ्यान रहता है तु दिल मे मेरे मेरी बन के जान रहता है तेरे कदम के निशाँ मेरे दिलपे कायम है यहाँ पे बन केतू मेरा गुमान रहता है है आहें तबस्सुम में हिज्र की तेरे छुपी है दिल मगर बेजुबान रहता है तडफता रहा जो सर पे तेरे साये की तरह हरदम आसमान रहता है झुका हुआवो अब ( लक्ष्मण दावानी रहे कहीं भी तु तुझपे ही थ्यान रहता है तु दिल मे मेरे मेरी बन के जान रहता है तेरे कदम के निशाँ मेरे दिलपे कायम है यहाँ पे बन केतू मेरा गुमान रहता है है आहें तबस्सुम में हिज्र की तेरे छुपी है दिल मगर बेजुबान रहता है तडफता रहा जो सर पे तेरे साये की तरह हरदम आसमान रहता है झुका हुआवो अब ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
1212 2122 1212 212 बसा है जो रूह में , कैसे में भुलाऊं उसे ग़ज़ल बहाना करूँ , और गुनगुनाऊँ उसे महक रहा फूल के खुशबू जैसे घर जिससेये लगा के मैं जिस्म ओ जान में समाऊँ उसे उजड़ चुका है मेरा आशियाँ बहारो में जो बहारें फिर वो बुलाकर कैसे सजाऊँ उसे रहा कदम दर कदम साथ सदा जो मेरे कहाँ से अब में ढूँढ़ कर यहाँ में लाऊं उसे न जाने किसकी नज़र लग गई खुशी को मेरे बताये कोई मुझे अब में कैसे पाऊँ उसे उदास दिन , रातें वीरान है मेरी अब यहाँ घड़ी घड़ी दे के आवाज में बुलाऊँ उसे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/2/2018 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📜मेरी कलम से✒️ - गज़ल बहाना करू और गुनगुनाऊँ उसे बसा है जो रूह में , कैसे में भुलाऊं उसे और गुनगुनाऊँ उसे ग़ज़ल बहाना करूँ खुशबू जैसे घर जिससेये महक रहा फूल के समा के मैं जिस्म ओ जान में लगाऊँ उसे उजड़ चुका है मेरा आशियाँ में जो बहारो मैं फिर बुलाकर कैसे सजाऊँ उसे बहारें 3چچ साथ सदा जो रहा कदम दर कदम कहाँ से अबमें ढूँढ़ कर यहाँ में लाऊं ತ್ न जाने किसकी नज़र लग गई को खुशी बताये कोई मुझे अब में कैसे पाऊँ यहाँ रातें वीरान है मेरी उदास दिन अब ঘভী ঘভী $ ৯ আণাত ম 34 बुलाऊँ ( लक्ष्मण दावानी गज़ल बहाना करू और गुनगुनाऊँ उसे बसा है जो रूह में , कैसे में भुलाऊं उसे और गुनगुनाऊँ उसे ग़ज़ल बहाना करूँ खुशबू जैसे घर जिससेये महक रहा फूल के समा के मैं जिस्म ओ जान में लगाऊँ उसे उजड़ चुका है मेरा आशियाँ में जो बहारो मैं फिर बुलाकर कैसे सजाऊँ उसे बहारें 3چچ साथ सदा जो रहा कदम दर कदम कहाँ से अबमें ढूँढ़ कर यहाँ में लाऊं ತ್ न जाने किसकी नज़र लग गई को खुशी बताये कोई मुझे अब में कैसे पाऊँ यहाँ रातें वीरान है मेरी उदास दिन अब ঘভী ঘভী $ ৯ আণাত ম 34 बुलाऊँ ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat
2122 2122 2122 देख के उनको ज़ख्मे दिल गहरा हुआ है दर्द दिल का मेरे अब दुहरा हुआ है मायूसी चहरे पे छाई उनके भी थी दर्द दिल में उनके भी ठहरा हुआ है कब तलक छुपाते उनसे दर्द दिल का साँच पर कब आज तक पहरा हुआ है कौन कहता चाँद तारे तोड़ लाना चाँदनी पर भी लगा पहरा हुआ है मौत के आगोश में सो जाने दो अब बाद मुद्दत के सुकूँ मिलना हुआ है मत दिखा सपने सुहाने मोहब्बत के बे वफ़ा का पहले भी मोहरा हुआ है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 10/1/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - दर्द दिल में उनके भी ठहरा हुआ है देख के उनको ज़ख्मे दिल गहरा हुआ ಕ दर्द  दिल का मेरे अब दुहरा हुआ चहरे पे उनके भीथी [ छ ठहरा हुआ है दिल में उनके उनसे   दर्द दिल का कब तलक छुपाते पर कब आज तक पहरा हुआ है Ta चाँद तारे तोड कहता लाना पहरा हुआ है चाँदनी पर भी II THa के आगो़श में सो जाने दोअब बाद मुद्दत के सुकूँ मिलना हुआ है ल मोहब्बत के मत दिखा सपने सुहाने मोहरा हुआ है পকল নী 44!7 CT ( लक्ष्मण दावानी दर्द दिल में उनके भी ठहरा हुआ है देख के उनको ज़ख्मे दिल गहरा हुआ ಕ दर्द  दिल का मेरे अब दुहरा हुआ चहरे पे उनके भीथी [ छ ठहरा हुआ है दिल में उनके उनसे   दर्द दिल का कब तलक छुपाते पर कब आज तक पहरा हुआ है Ta चाँद तारे तोड कहता लाना पहरा हुआ है चाँदनी पर भी II THa के आगो़श में सो जाने दोअब बाद मुद्दत के सुकूँ मिलना हुआ है ल मोहब्बत के मत दिखा सपने सुहाने मोहरा हुआ है পকল নী 44!7 CT ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat