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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - 6 साध कै संगि द्रिड़ै सभि धरम Il साध कै संगि केवल पारब्रहम ।l. अर्थः संतों और प्रभु प्रेमियों की संगति में रहने से मनुष्य के भीतर सारे वास्तविक धार्मिक गुण जैसे दया, संतोष, सत्य, ননিক্ষমীতা और शील दृढ़ हो जाते हैं। व्यक्ति अपने आत्मिक और ' कर्तव्यों को सच्चे अर्थों में समझने और निभाने लगता हैl m साध संगति का सबसे बड़ा फल यह है कि वहाँ केवल और केवल उस अविनाशी पारब्रह्म परमात्मा की ही महिमा होती है, जिससे मनुष्य का मन संसार के भ्रमों को छोड़कर तेरा एकमात्र सर्वोच्च सत्ता ईश्वर से जुड़ जाता है। हे भाई! जब हम अच्छे , पवित्र और प्रभु से जुड़े लोगों की भाणा संगति में बैठते हैं, तो हमारा भटकाव खत्म होता है। वहां न तो किसी की निंदा होती है और न ही सांसारिक माया का अहंकार। वहां सिर्फ ईश्वर की चर्चा होती है, जिससे हमारे जीवन में धर्म और सच्चाई का वास सुदृढ़ हो जाता है। 6 साध कै संगि द्रिड़ै सभि धरम Il साध कै संगि केवल पारब्रहम ।l. अर्थः संतों और प्रभु प्रेमियों की संगति में रहने से मनुष्य के भीतर सारे वास्तविक धार्मिक गुण जैसे दया, संतोष, सत्य, ননিক্ষমীতা और शील दृढ़ हो जाते हैं। व्यक्ति अपने आत्मिक और ' कर्तव्यों को सच्चे अर्थों में समझने और निभाने लगता हैl m साध संगति का सबसे बड़ा फल यह है कि वहाँ केवल और केवल उस अविनाशी पारब्रह्म परमात्मा की ही महिमा होती है, जिससे मनुष्य का मन संसार के भ्रमों को छोड़कर तेरा एकमात्र सर्वोच्च सत्ता ईश्वर से जुड़ जाता है। हे भाई! जब हम अच्छे , पवित्र और प्रभु से जुड़े लोगों की भाणा संगति में बैठते हैं, तो हमारा भटकाव खत्म होता है। वहां न तो किसी की निंदा होती है और न ही सांसारिक माया का अहंकार। वहां सिर्फ ईश्वर की चर्चा होती है, जिससे हमारे जीवन में धर्म और सच्चाई का वास सुदृढ़ हो जाता है। - ShareChat