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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #ज्ञान की बातें #प्रेरणादायक बातें#अनमोल वचन
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - तो दूर की सही पास की नजर कमजोर है होती है और कभी नजर कमजोर दूरकी होती है तो पास की सही होनी है, दृष्टि तो वही सही मानी जाती है जो दूरका भी देख सके और पास का भी देख सके, अंदर बाहर दोनों साफ दिखाई दे और तभी हो यह सकता है जब हम पास ,दूर की दृष्टि से ऊपर उठकर देखें। अर्थात "अपने तीसरे दृष्टिकोण से तीसरे नेत्र से देखें तो दूर की सही पास की नजर कमजोर है होती है और कभी नजर कमजोर दूरकी होती है तो पास की सही होनी है, दृष्टि तो वही सही मानी जाती है जो दूरका भी देख सके और पास का भी देख सके, अंदर बाहर दोनों साफ दिखाई दे और तभी हो यह सकता है जब हम पास ,दूर की दृष्टि से ऊपर उठकर देखें। अर्थात "अपने तीसरे दृष्टिकोण से तीसरे नेत्र से देखें - ShareChat