ShareChat
click to see wallet page
search
अधिक मास आरंभ जिस मास में सूर्य संक्रान्ति नहीं होती उसे अधिकमास, लोंद मास, मल मास य पुरुषोत्तम मास कहते है। इसको सरल शब्दों में समझते है जिस मास में एक अमावस्या से दूसरे अमावस्या के बीच में कोई सूर्य की संक्रान्ति न पड़े उसे अधिक मास कहते है। संक्रान्ति के अर्थ है - सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को कहते है। अधिमास 32 मास 16 दिन तथा चार घड़ी के अन्तर से आता है। यह एक और तथ्य है कि सौर वर्ष 365 दिनों और लगभग 06 मिनट का होता है और चंद्र वर्ष 354 दिनों का बनता है। इस प्रकार सौर और चंद्र दोनों वर्षों में 11 दिन, 1 घंटा, 31 मिनट और 12 सेकंड का अंतराल होता है। जैसे-जैसे यह अंतर हर साल बढ़ता है, यह तीन साल से एक महीने तक का हो जाता है। जिसे अधिक मास कहते है। अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु है। क्योकि प्रत्येक मास का कोई देवता अधिपति होता है। परन्तु अधिकमास का कोई अधिपति नहीं था। इससे अधिकमास की घोर निन्दा होने लगी, तब अधिकमास भगवा विष्णु के शरण में गया। भगवान विष्णु जी ने कहा - “मैं इसे सर्वोपरि - अपने तुल्य करता हूँ। सदगुण, कीर्ति, प्रभाव, षडैश्वर्य, पराक्रम, भक्तों को वरदान देने का सामार्थ्य आदि जितने गुण सम्पन्न हैं, उन सबको मैंने इस मास को सौंप दिया है।’’ अहमेते यथा लोके प्रथितः पुरुषोत्तमः। तथायमपि लोकेषु प्रथितः पुरुषोत्तमः।। इन गुणों के कारण जिस प्रकार मैं वेदों, लोकों और शास्त्रों में ʹपुरुषोत्तमʹ नाम से विख्यात हूँ, उसी प्रकार यह मलमास भी भूतल पर ʹपुरुषोत्तमʹ नाम से प्रसिद्ध होगा और मैं स्वयं इसका स्वामी हो गया हूँ।” इस प्रकार अधिक मास, मलमास ʹपुरुषोत्तम मासʹ के नाम से विख्यात हुआ। इस महीनें में दान-पुण्य करने का फल अक्षय होता है। यदि दान न किया जा सके तो ब्राह्माणों तथा सन्तों की सेवा सर्वोत्तम मानी गई है। दान में खर्च किया गया धन क्षीण नहीं होता। उत्तरोत्तर बढ़ता ही जाता है। जिस प्रकार छोटे से बट बीज से विशाल वृक्ष पैदा होता है ठीक वैसे ही मल मास में किया गया दान अनन्त फलदायक सिद्ध होता है। अधिक मास में फल-प्राप्ति की कामना से किए जाने वाले सभी कार्य वर्जित होते है। सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह, गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीद आदि नहीं किए जाते है। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - १७ मई २०२६ से शुरू हो रहा है मलमास यहगास FlTooru (अधिक मास पुरुषोत्तम abntn೯ H लेकिन भक्ा दान १७ मई २०२६ से १५ जून २०२६ तक  ओर सायना कलिए अत्यत शभा जव सूर्य एक राशि से राशि मे प्रवश नही करते दसरी  तय यह गिशेष माहयनता जसे मलयास्या अधिक पास कहते ६ CIdಹ3 C ಹ की पूजा करे  fatj भगवान शादी विवाह, सगाई  रेज भगवान तिषणु ओर माता ल४्मी ढीपूना को फर ओर " ३२ नगो भगवते चानुदेवाच नमः गृह प्रवेश, निर्माण कार्य मननकाजाप कर। दान पुण्य करे 171 T! l ;20141471  मुडन जनेऊ सस्कार विशेग पुण्य मिलता हे 75 कथा।पाठ करे नया वाहन घरया नरामचरितमानस भगवद गीठा या प्रॉपर्टी न खरीदे వనాటా  4র79  1a 077 0. नया विजनेस शोरूम या दुकान शुरु न करे सात्विक जीवन अपनाए तामसिक भोजन (प्याज लहस नया वत शुरू न करे मातन्मदिरा) कात्याग करे भर ओरनही उच्वापन करे सात्तिक दिनचर्या अपनाए मलमासमे किया गया भक्तिो दान ओर साधना कई गुना फल देता हे४ १७ मई २०२६ से शुरू हो रहा है मलमास यहगास FlTooru (अधिक मास पुरुषोत्तम abntn೯ H लेकिन भक्ा दान १७ मई २०२६ से १५ जून २०२६ तक  ओर सायना कलिए अत्यत शभा जव सूर्य एक राशि से राशि मे प्रवश नही करते दसरी  तय यह गिशेष माहयनता जसे मलयास्या अधिक पास कहते ६ CIdಹ3 C ಹ की पूजा करे  fatj भगवान शादी विवाह, सगाई  रेज भगवान तिषणु ओर माता ल४्मी ढीपूना को फर ओर " ३२ नगो भगवते चानुदेवाच नमः गृह प्रवेश, निर्माण कार्य मननकाजाप कर। दान पुण्य करे 171 T! l ;20141471  मुडन जनेऊ सस्कार विशेग पुण्य मिलता हे 75 कथा।पाठ करे नया वाहन घरया नरामचरितमानस भगवद गीठा या प्रॉपर्टी न खरीदे వనాటా  4র79  1a 077 0. नया विजनेस शोरूम या दुकान शुरु न करे सात्विक जीवन अपनाए तामसिक भोजन (प्याज लहस नया वत शुरू न करे मातन्मदिरा) कात्याग करे भर ओरनही उच्वापन करे सात्तिक दिनचर्या अपनाए मलमासमे किया गया भक्तिो दान ओर साधना कई गुना फल देता हे४ - ShareChat