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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - सार्थळ बदलात ७४ रंजना मिश्रा मघुरं्जन , रीवा * बूढ़ी माई ने दिखाई संतोष की राह का दुख हर लेने से सुख  किसी को दुख देकर सुख नहीं मिलूता बल्कि ढूसरे  मिलता है अम्मा से मिली ऐसी ही सीख जीवन को सार्थक बदलाव दे गई। मुस्कराई और बोली  बेटा प्रसन्न रह लेती हो।' अम्मा ड़क के किनारे थोड़ी बहुत  सब्जी बेर स बरचुन कैथा बेचती हुई बूँढ़ी माई के पास  हम कुछ नहीं जानते। एक गुरु जी ने गुरु मंत्र दिया था  कि कबिरा आप ठगाइए और न ठगिए कोय, आप ठगे  बच्चों से लेकर बड़ों तक की ख़ासी भीड़ जमा हो सुख होत है, और ठगे दुख होय। * कैसे थी। ` माई हमें बेर चाहिए , ஈ अम्मा टमारर बस वही मंत्र जीवन में उतार लिया है। बेटा कैथा कितने का? ' ऐसी तमाम आवाजों के बीच  किसी को ठगने के बाद मलाल ख़ुशी ख़ुशी भाव बताकर ही मलाल मिलता है, पर किसी  सामान देने का क्रम बनाए जा से ठगे जाने के बाद जीवन में रही थी। हमने देखा कुछ कथित कमाल ही कमाल मिलता  बस तौर पर बड़े अमीर समझे जाने है।येजो दो पैसे कम दे गए हैं वाले लोग अम्मा से हर सामान वे मलाल सेःभरे रहेंगे, पर हमें पैसा कम करा रहे थे और पर कोई दुख नहीं। हमने तो देने का ज्यादा वस्तु की मांग कर रहे अमिट सुख पाया है। ' हम अम्मा थे। पर अम्मा संतुष्टि का भाव की बात से हतप्रभ रह गए॰ कि॰ लिए सभी को संतुष्ट करने का साक्षर न होते हुए भी सिर्फ एक भरपूर प्रयास कर रही थी।  करके जीवन मत्र पर श्रद्धा गुरु ख़ैर जब सभी चले गए का असली सुख पा लिया और  तो हम भी अम्मा के पास जा जैसे कथित पढ़े लिखों को हम पहुंचे   हमने भी वही मोल- जीवन सूत्र सिखा दिया। तब से आज तक हम भी इसी * और कम में ज्यादा लेने का प्रयास किया, और भाव सूत्र को अपनाते हुए वास्तविक सुखी जीवन जी रहे हैं।  अम्मा नेःभी वही संतोष से भरकर हमें संतुष्ट किया। अम्मा की उस बात ने हमारे जीवन जीने की दिशा और लिया, हमने अम्मा से उसको संतुष्टि का राज पूछ ही किसी ठगने दशा दोनों ही बदल दी। और अब हम भी कम पैसों में ज्यादा सामान चाहते हैं বরুপম  ও্সো; মল वाले को यह मंत्र बता सकते हैं। और तुम जानती हो फिर भी कैसे यह सब मैनेज करके  सार्थळ बदलात ७४ रंजना मिश्रा मघुरं्जन , रीवा * बूढ़ी माई ने दिखाई संतोष की राह का दुख हर लेने से सुख  किसी को दुख देकर सुख नहीं मिलूता बल्कि ढूसरे  मिलता है अम्मा से मिली ऐसी ही सीख जीवन को सार्थक बदलाव दे गई। मुस्कराई और बोली  बेटा प्रसन्न रह लेती हो।' अम्मा ड़क के किनारे थोड़ी बहुत  सब्जी बेर स बरचुन कैथा बेचती हुई बूँढ़ी माई के पास  हम कुछ नहीं जानते। एक गुरु जी ने गुरु मंत्र दिया था  कि कबिरा आप ठगाइए और न ठगिए कोय, आप ठगे  बच्चों से लेकर बड़ों तक की ख़ासी भीड़ जमा हो सुख होत है, और ठगे दुख होय। * कैसे थी। ` माई हमें बेर चाहिए , ஈ अम्मा टमारर बस वही मंत्र जीवन में उतार लिया है। बेटा कैथा कितने का? ' ऐसी तमाम आवाजों के बीच  किसी को ठगने के बाद मलाल ख़ुशी ख़ुशी भाव बताकर ही मलाल मिलता है, पर किसी  सामान देने का क्रम बनाए जा से ठगे जाने के बाद जीवन में रही थी। हमने देखा कुछ कथित कमाल ही कमाल मिलता  बस तौर पर बड़े अमीर समझे जाने है।येजो दो पैसे कम दे गए हैं वाले लोग अम्मा से हर सामान वे मलाल सेःभरे रहेंगे, पर हमें पैसा कम करा रहे थे और पर कोई दुख नहीं। हमने तो देने का ज्यादा वस्तु की मांग कर रहे अमिट सुख पाया है। ' हम अम्मा थे। पर अम्मा संतुष्टि का भाव की बात से हतप्रभ रह गए॰ कि॰ लिए सभी को संतुष्ट करने का साक्षर न होते हुए भी सिर्फ एक भरपूर प्रयास कर रही थी।  करके जीवन मत्र पर श्रद्धा गुरु ख़ैर जब सभी चले गए का असली सुख पा लिया और  तो हम भी अम्मा के पास जा जैसे कथित पढ़े लिखों को हम पहुंचे   हमने भी वही मोल- जीवन सूत्र सिखा दिया। तब से आज तक हम भी इसी * और कम में ज्यादा लेने का प्रयास किया, और भाव सूत्र को अपनाते हुए वास्तविक सुखी जीवन जी रहे हैं।  अम्मा नेःभी वही संतोष से भरकर हमें संतुष्ट किया। अम्मा की उस बात ने हमारे जीवन जीने की दिशा और लिया, हमने अम्मा से उसको संतुष्टि का राज पूछ ही किसी ठगने दशा दोनों ही बदल दी। और अब हम भी कम पैसों में ज्यादा सामान चाहते हैं বরুপম  ও্সো; মল वाले को यह मंत्र बता सकते हैं। और तुम जानती हो फिर भी कैसे यह सब मैनेज करके - ShareChat