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#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
शुभ मुहूर्त - 25-06-26 मां गायत्री प्राकट्योत्सव aR की जन्मदात्री माना गया है, इन गायत्री मां को हिंदू भारतीय " संस्कृति से ही चारों वेदों की उत्पति भी मानी गयी है, इसलिए माता गायत्री को वेद भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार गायत्री प्राकट्योत्सव का पर्व माता ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मनाया जाता हैं। ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् गायत्री जयंतीः २५ जून २०२६, गुरुवार एकादशी तिथिः २४ जून शाम ०६ः१२ बजे से २५ जून रात ०८ः०१ बजे तक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को मनाई जाने वाली गायत्री जयंती वैदिक ज्ञान, प्रज्ञा और पवित्र और सद्बुाद्ध चेतना की आराधना का पावन दिवस है। माता गायत्री को वेदमाता সমান करने वाली दिव्य शक्ति माना जाता है। अथर्ववेद में मां ; को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और प्रदान करने वाली সম্মনত गायत्री देवी कहा गया है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद उगते सूर्य को जल अर्पित करें। स्वच्छ और शांत स्थान पर बैठकर श्रद्धानुसार २४ , ५४ या १०८ बार गायत्री मंत्र का जाप करें। पूजा में दीप, पुष्प और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। अपनी क्षमता अनुसार पुस्तक, अन्न, वस्त्र या शिक्षण सामग्री का दान करें। गायत्री जयंती हमें विचारों की पवित्रता, ज्ञान के सम्मान और विवेकपूर्ण जीवन का सुंदर संदेश देती है। 25-06-26 मां गायत्री प्राकट्योत्सव aR की जन्मदात्री माना गया है, इन गायत्री मां को हिंदू भारतीय " संस्कृति से ही चारों वेदों की उत्पति भी मानी गयी है, इसलिए माता गायत्री को वेद भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार गायत्री प्राकट्योत्सव का पर्व माता ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मनाया जाता हैं। ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् गायत्री जयंतीः २५ जून २०२६, गुरुवार एकादशी तिथिः २४ जून शाम ०६ः१२ बजे से २५ जून रात ०८ः०१ बजे तक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को मनाई जाने वाली गायत्री जयंती वैदिक ज्ञान, प्रज्ञा और पवित्र और सद्बुाद्ध चेतना की आराधना का पावन दिवस है। माता गायत्री को वेदमाता সমান करने वाली दिव्य शक्ति माना जाता है। अथर्ववेद में मां ; को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और प्रदान करने वाली সম্মনত गायत्री देवी कहा गया है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद उगते सूर्य को जल अर्पित करें। स्वच्छ और शांत स्थान पर बैठकर श्रद्धानुसार २४ , ५४ या १०८ बार गायत्री मंत्र का जाप करें। पूजा में दीप, पुष्प और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। अपनी क्षमता अनुसार पुस्तक, अन्न, वस्त्र या शिक्षण सामग्री का दान करें। गायत्री जयंती हमें विचारों की पवित्रता, ज्ञान के सम्मान और विवेकपूर्ण जीवन का सुंदर संदेश देती है। - ShareChat