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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴 - कबीर का दोहा 6 पानी केरा बुदबुदा, अस मानस की जात। देखत ही छिप जाएगा , ज्यों तारा परभात I। अर्थ के बुलबुले की तरह क्षणभंगुर है।  मानव जीवन पानी यह एक दिन ऐसे ही समाप्त हो जाएगा , जैसे सुबह होते ही तारे गायब हो जाते हैं । सीख हर दिन को सार्थक जीवन बहुत अच्छे कर्म ही अहंकार और लालच सदुपयोग समय का वास्तविक पहचान हैं । छोटा है। से दूर रहें। কই | बनाने का प्रयास करें। महत्व यह दोहा हमें जीवन की नश्वरता का बोध कराता है और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। निष्कर्ष जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए हर क्षण को प्रेम , सेवा और सदकर्म में लगाकर इसे सार्थक बनाएं। कबीर का दोहा 6 पानी केरा बुदबुदा, अस मानस की जात। देखत ही छिप जाएगा , ज्यों तारा परभात I। अर्थ के बुलबुले की तरह क्षणभंगुर है।  मानव जीवन पानी यह एक दिन ऐसे ही समाप्त हो जाएगा , जैसे सुबह होते ही तारे गायब हो जाते हैं । सीख हर दिन को सार्थक जीवन बहुत अच्छे कर्म ही अहंकार और लालच सदुपयोग समय का वास्तविक पहचान हैं । छोटा है। से दूर रहें। কই | बनाने का प्रयास करें। महत्व यह दोहा हमें जीवन की नश्वरता का बोध कराता है और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। निष्कर्ष जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए हर क्षण को प्रेम , सेवा और सदकर्म में लगाकर इसे सार्थक बनाएं। - ShareChat