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17.4.2026 ईश्वर से अनेक प्रकार की प्रार्थनाएं करनी चाहिएं। परंतु प्रार्थना का नियम यह है, कि *"पहले अपने कार्य की सिद्धि के लिए पूर्ण पुरुषार्थ करें। और फिर यदि आपके कार्य की सिद्धि में कुछ कमी रह जाए, तो उसकी पूर्ति के लिए ईश्वर से भी प्रार्थना करें। और समाज के बुद्धिमान धनवान सामर्थ्यवान मनुष्यों से भी प्रार्थना करें।" "रोटी कपड़ा मकान आदि वस्तुएं तथा धन आदि के रूप में कुछ सहयोग समाज के लोग करते हैं, और आंतरिक रूप से उत्साह बढ़ाना, बुराई से बचाना, अच्छे काम में प्रेरणा देना इत्यादि, कुछ सहायता ईश्वर करता है।"* तो प्रार्थना अवश्य करें। परंतु पहले पुरुषार्थ करें। उसके बाद आपकी जो आवश्यकता हो, उसकी पूर्ति के लिए प्रार्थना भी करें। *"ईश्वर और समाज के बुद्धिमान लोग जब देखेंगे, कि आप दिखावा नहीं कर रहे, बल्कि ईमानदारी और बुद्धि पूर्वक पुरुषार्थ कर रहे हैं, तो वे भी आपकी यथायोग्य सहायता करेंगे।"* यह ध्यान अवश्य रहे, कि *"ईश्वर वाली सहायता ईश्वर ही करेगा, समाज के लोग नहीं। और समाज के लोगों का जो कार्य है, उसे समाज के लोग ही करेंगे, उसे ईश्वर नहीं करेगा। दोनों का अपना अलग-अलग क्षेत्र है, जैसा कि ऊपर बताया है। दोनों अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार आपकी सहायता करेंगे।"* तो क्या प्रार्थना करें? इस प्रकार से प्रार्थना करनी चाहिए। *"हे ईश्वर! मुझे ऐसी बुद्धि शक्ति विद्या बल सामर्थ्य आदि प्रदान कीजिए, कि मेरी आंखों में प्रेम हो। मैं सबको प्रेम पूर्वक देखूं। कठोर या घृणा वाली दृष्टि से किसी को न देखूं। मैं अपने दोनों हाथों से दूसरों की सेवा करूं। मेरी बुद्धि में सदा नम्रता और सभ्यता बनी रहे। कभी अभिमान न आ जाए। मेरी वाणी में मिठास हो। मैं सबसे मीठी भाषा बोलूं। और देश धर्म की रक्षा करने के लिए मेरी भुजाओं में बल दीजिए इत्यादि।"* इस प्रकार से पुरुषार्थपूर्वक प्रार्थना करने से ईश्वर तथा समाज के समर्थ लोगों से सहायता मिलती है। *"ऐसी सहायता अवश्य लेनी चाहिए और देश धर्म समाज की सेवा करते हुए अपने जीवन को सफल अवश्य ही बनाना चाहिए।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
❤️जीवन की सीख - )9 यह जीवन r तुमने है, संभालोगे भी तुम। आशा नहीं विश्वास है, हर मुश्किल से विधाता निकालोगे भी तुम। )9 यह जीवन r तुमने है, संभालोगे भी तुम। आशा नहीं विश्वास है, हर मुश्किल से विधाता निकालोगे भी तुम। - ShareChat