27.4.2026
कभी-कभी व्यक्ति जीवन में असफल हो जाता है। तब वह अपने साथियों मित्रों या परिवार वालों की सहायता चाहता है। उसके साथी उसकी सहायता करते भी हैं।
परंतु हर बार ऐसा नहीं समझना चाहिए, कि जब भी कोई सहायता करे, तो आप यह समझें, कि *"आप अपने जीवन में फेल हो गए हैं।"*
आपके कुछ प्रशंसक आपके चाहने वाले, मित्र रिश्तेदार परिवार वाले या परिचित व्यक्ति ऐसे भी होते हैं, जो आपसे बहुत अधिक प्रेम करते हैं, और आपको सदा प्रसन्न देखना चाहते हैं। *"यदि आप के जीवन में थोड़ी सी भी परेशानी उन्हें दिखाई देती है, तो वे तुरंत आपकी सहायता करने के लिए तैयार हो जाते हैं।"*
ऐसी स्थिति में उनकी भावनाओं को आप समझें। वे आपके हितकारी हैं। *"आपके विशेष गुणों के कारण वे आपसे प्रेम करते हैं। इसलिए तत्काल आपकी सहायता करने को तैयार रहते हैं।"* तब आपको यह नहीं समझना चाहिए, कि *"मैं अपने जीवन में फेल हो गया हूं। इसलिए लोग मुझ पर तरस खाकर मेरी मदद कर रहे हैं."* बल्कि ऐसी स्थिति में तो आपको प्रसन्न होना चाहिए कि *"आप एक सामान्य व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि एक विशेष व्यक्ति हैं। आपकी विशेषता को दूसरे लोग समझते हैं, इसीलिए वे आपसे प्रेम करते हैं। और उन्हें आपकी थोड़ी सी भी परेशानी सहन नहीं होती। इसीलिए वे आपकी सहायता करने को तत्पर रहते हैं।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख
26.4.2026
निन्दा चुगली करना, यह दोष तो सदा से चला आ रहा है। कुछ लोग निंदा चुगली में बहुत मजा लेते हैं। उन्हें दूसरों पर सच्ची झूठी टीका टिप्पणी करने में बहुत आनंद आता है। *"ऐसे लोग कभी-कभी सच बात भी कहते हैं, परंतु अधिकतर झूठे आरोप लगाकर लोगों को बदनाम करते हैं। भले ही उन्हें इस कार्य में सुख मिलता हो, परंतु वे इसका दुष्परिणाम नहीं जानते, कि इससे समाज की बहुत बड़ी-बड़ी हानियां होती हैं। और ऐसे निंदा चुगली करने वाले लोगों को ईश्वर की ओर से बहुत भारी दंड भी भोगना पड़ता है।"*
समाज में कुछ बुद्धिमान लोग भी होते हैं। जो इस बात को समझते हैं, कि *"यदि कोई किसी पर झूठे आरोप लगाए, तो वह अच्छा नहीं है।" "ऐसी स्थिति में वे उन झूठी बातों का खंडन करते हैं, और समाज में भ्रांति फैलाने वाले लोगों को रोकते हैं।"*
जिस पर ये झूठे आरोप लगाए जाते हैं, यदि कोई व्यक्ति उस समय उन बातों को अच्छी तरह से जानता हो, कि *"उस व्यक्ति को व्यर्थ ही बदनाम किया जा रहा है। उस पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। तब वह झूठे आरोपों का खंडन करके उस व्यक्ति की रक्षा करता है। इतना ही नहीं बल्कि उसके उत्तम गुणों को समाज में स्थापित करता है।"* और बताता है, कि *"वह तो बहुत अच्छा व्यक्ति है, उसे व्यर्थ बदनाम नहीं करना चाहिए। अन्यथा समाज के लोग उसके उत्तम गुणों से लाभ नहीं उठा पाएंगे। इससे समाज की बड़ी हानि होगी।"*
*"इस तरह से यदि कोई सत्य बात कह कर उस निर्दोष व्यक्ति की रक्षा करता है, तो यह उस व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा सम्मान है," कि "जो उसकी अनुपस्थिति में उस पर लगाए गए मिथ्या आरोपों का खंडन करके समाज में उसके गुणों को स्थापित किया गया।"*
आप भी यदि कहीं ऐसा होते हुए देखें, तो *"अवश्य ही उन निंदक एवं चुगलखोरों का विरोध करें, तथा समाज में भ्रांति फैलने से रोकें। आपको इसका बहुत बड़ा पुण्य मिलेगा, और तत्काल आनन्द भी मिलेगा।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
25.4.2026
जब लोग आपस में मिलते हैं। एक दूसरे का स्वागत करते हैं। एक दूसरे को देखकर प्रसन्न होते हैं। फिर आपस में कुछ बातचीत करते हैं। फिर चर्चा करने के बाद जब वे अलग होते हैं, तो *"एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। उनके उत्तम भविष्य की सुखमय जीवन की अपने-अपने ढंग से अनेक प्रकार की शुभकामनाएं देते हैं।"*
हमारी दृष्टि में सबसे अच्छी शुभकामनाएं इस प्रकार से हैं, कि लोग एक दूसरे से कहें, कि *"आपका स्वास्थ्य अच्छा रहे। आपका शरीर बलवान रहे। आप दीर्घायु होवें। आपका मन सदा शांत और स्थिर रहे। संसार के अच्छे लोग आपके मित्र बनें। आप बुराइयों से दूर रहें। दुष्ट लोगों की छाया भी आप पर कभी न पड़े। सदा सज्जनों का संग रहे, और आप सदा सुखी रहें।"* इस प्रकार की शुभकामनाएं एक दूसरे को देनी चाहिएं। ऐसी शुभकामनाएं सबसे उत्तम होती हैं।
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
24.4.2026
व्यक्ति खाली तो बैठ नहीं सकता। चाहे वह अच्छा कर्म करे, चाहे बुरा करे, कुछ तो करेगा ही।
यदि वह अच्छा कर्म करेगा, तो ही बुराई से बच पाएगा। यदि अच्छा नहीं करेगा, तो बुरा कर्म करेगा। क्योंकि वह खाली तो बैठ नहीं सकता। *"यदि बुरा कर्म करेगा, तो ईश्वर की ओर से उसे दंड मिलेगा। यदि दंड से बचना हो, तो इसी में बुद्धिमत्ता है, कि व्यक्ति अच्छा कर्म करे।"*
अब कौन सा कर्म अच्छा है, और कौन सा बुरा? इस बात का निर्णय करने के लिए प्रमाण और तर्क की आवश्यकता होती है। *"प्रमाण और तर्क को जानने के लिए महर्षि गौतम जी का बनाया हुआ न्याय दर्शन पढ़ना चाहिए।"*
*"वेदों के आधार पर महर्षि गौतम जी ने न्याय दर्शन की रचना की, और उसमें विस्तार से बताया कि प्रमाण और तर्क क्या होता है, और वह कैसे काम करता है। यदि आप भी प्रमाण और तर्क के विषय में ठीक प्रकार से जानना चाहते हों, तो न्याय दर्शन का अध्ययन अवश्य करें।"*
यदि न्याय दर्शन कठिन लगे, तो इसी पद्धति पर *"महर्षि दयानंद सरस्वती जी की लिखी हुई एक पुस्तक है जिसका नाम है सत्यार्थ प्रकाश। उसको पढ़ें। तो भी आपको प्रमाण और तर्क की बहुत अच्छी जानकारी हो सकती है।"*
इस प्रकार से प्रमाण और तर्क से जानकारी करके ही कोई भी कर्म करें। *"यज्ञ करना दान देना सेवा करना ईश्वर की उपासना करना वेद प्रचार करना इत्यादि शुभ कर्म कहलाते हैं। इन शुभ कर्मों का आचरण करें। अन्यथा बुरे कर्मों से बचना तथा अच्छे कर्मों को कर पाना बहुत कठिन है।"*
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24.4.2026
व्यक्ति खाली तो बैठ नहीं सकता। चाहे वह अच्छा कर्म करे, चाहे बुरा करे, कुछ तो करेगा ही।
यदि वह अच्छा कर्म करेगा, तो ही बुराई से बच पाएगा। यदि अच्छा नहीं करेगा, तो बुरा कर्म करेगा। क्योंकि वह खाली तो बैठ नहीं सकता। *"यदि बुरा कर्म करेगा, तो ईश्वर की ओर से उसे दंड मिलेगा। यदि दंड से बचना हो, तो इसी में बुद्धिमत्ता है, कि व्यक्ति अच्छा कर्म करे।"*
अब कौन सा कर्म अच्छा है, और कौन सा बुरा? इस बात का निर्णय करने के लिए प्रमाण और तर्क की आवश्यकता होती है। *"प्रमाण और तर्क को जानने के लिए महर्षि गौतम जी का बनाया हुआ न्याय दर्शन पढ़ना चाहिए।"*
*"वेदों के आधार पर महर्षि गौतम जी ने न्याय दर्शन की रचना की, और उसमें विस्तार से बताया कि प्रमाण और तर्क क्या होता है, और वह कैसे काम करता है। यदि आप भी प्रमाण और तर्क के विषय में ठीक प्रकार से जानना चाहते हों, तो न्याय दर्शन का अध्ययन अवश्य करें।"*
यदि न्याय दर्शन कठिन लगे, तो इसी पद्धति पर *"महर्षि दयानंद सरस्वती जी की लिखी हुई एक पुस्तक है जिसका नाम है सत्यार्थ प्रकाश। उसको पढ़ें। तो भी आपको प्रमाण और तर्क की बहुत अच्छी जानकारी हो सकती है।"*
इस प्रकार से प्रमाण और तर्क से जानकारी करके ही कोई भी कर्म करें। *"यज्ञ करना दान देना सेवा करना ईश्वर की उपासना करना वेद प्रचार करना इत्यादि शुभ कर्म कहलाते हैं। इन शुभ कर्मों का आचरण करें। अन्यथा बुरे कर्मों से बचना तथा अच्छे कर्मों को कर पाना बहुत कठिन है।"*
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23.4.2026
लकड़ी जब किसी वस्तु को जलाती है, तो दूसरी वस्तु को जलाने से पहले वह खुद जलती है, तभी वह दूसरे पदार्थ को जला पाती है। क्रोध भी इसी प्रकार का होता है।
*"क्रोध करने वाला व्यक्ति पहले स्वयं जलता है, उसके बाद दूसरे को जलाता है। दूसरे की हानि तो बाद में होगी या नहीं होगी, अभी सिद्ध नहीं है। परंतु क्रोध करने वाले व्यक्ति की हानि तो पहले हो ही जाएगी, यह तो सिद्ध ही है।" "इसलिए क्रोध करना बुद्धिमता की बात नहीं है। अतः क्रोध करने से बचें, और अपनी हानि न करें।"*
मन्यु, क्रोध से अलग चीज है। *"क्रोध का अर्थ होता है मूर्खतापूर्ण ढंग से दूसरों को अन्याय पूर्वक दुख देना।"* जबकि मन्यु का अर्थ होता है, *"गलती करने वाले को न्याय पूर्वक उचित दंड देना।" "वेद आदि शास्त्रों में न्याय करने का विधान है और उसके लिए मन्यु का प्रयोग कर सकते हैं। उसकी छूट है।" "परन्तु क्रोध नहीं करना चाहिए। क्योंकि क्रोध करने वाले व्यक्ति की बुद्धि नष्ट हो जाती है। फिर वह अन्याय करने लगता है।"*
ईश्वर स्वयं भी मन्यु का प्रयोग करता है, और अपराधियों को यथापराध छोटे तथा बड़े भयंकर दंड देता है। *"ईश्वर अपराधियों को सूअर कुत्ता शेर भेड़िया सांप बिच्छू वृक्ष वनस्पति व्हेल मछली आदि आदि न जाने कैसी-कैसी योनियों में डालकर बहुत दुख देता है। उसका वह सब कार्य न्याय पूर्वक होता है, इसलिए उसे मन्यु कहते हैं।"*
*"जैसे ईश्वर न्याय पूर्वक दंड देकर मन्यु का प्रयोग करता है। ऐसा ही यहां मनुष्यों में भी जो अपने-अपने क्षेत्र के अधिकारी लोग हैं, उन्हें भी मन्यु करने का अधिकार तो है, परन्तु क्रोध करने का नहीं। क्योंकि क्रोध करने से तो बुद्धि नष्ट हो जाती है।"*
*"अतः यदि कभी करना भी पड़े, तो अपने क्षेत्र में अपने अधिकार के अनुसार दोष करने वाले व्यक्तियों पर क्रोध न करें, मन्यु का प्रयोग कर सकते हैं।"* #🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*













