अजय ओमप्रकाश आर्य
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अजय ओमप्रकाश आर्य
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#❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
❤️जीवन की सीख - जो हिंदू हित की बात करेगा वही देश पर राज करेगा , जो हिंदू राष्ट्र बनाएगा मन को वही भायेगा | जो हिंदू हित की बात करेगा वही देश पर राज करेगा , जो हिंदू राष्ट्र बनाएगा मन को वही भायेगा | - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏कर्म क्या है❓ - मौन का जवाब वक्त देता है समझदार जब मौन उसे अपनी जीत समझ बैठता ओढ़ लेता है, मूर्ख గే1 शब्दों की कमी को वह कमजोरी मान लेता है और शांति को डर का नाम दे देता है। पर मौन भाषा है॰जो हर किसी की समझ भी एक गहरी में नहीं आती। समझदार टकराव से नहीं भागता , बस समय को बोलने देता है OMetaAl मौन का जवाब वक्त देता है समझदार जब मौन उसे अपनी जीत समझ बैठता ओढ़ लेता है, मूर्ख గే1 शब्दों की कमी को वह कमजोरी मान लेता है और शांति को डर का नाम दे देता है। पर मौन भाषा है॰जो हर किसी की समझ भी एक गहरी में नहीं आती। समझदार टकराव से नहीं भागता , बस समय को बोलने देता है OMetaAl - ShareChat
5.5.2026 कुछ लोग अपनी योजनाएं बनाते हैं, कि मुझे यह कार्य करना है। *"फिर उसके लिए पुरुषार्थ भी करते हैं। उनकी अनेक योजनाएं सफल भी हो जाती हैं।"* धीरे-धीरे उनकी आयु बढ़ने लगती है, और 60/65 तक पहुंच जाती है। वे फिर और योजनाएं बनाते हैं। फिर काम करते हैं और उन्हें सफलताएं भी मिलती जाती हैं। फिर कभी-कभी ऐसा भी सोचते हैं, *"अब तो मेरी आयु बहुत बढ़ गई। अब क्या योजना बनाएंगे!"* परन्तु जो लोग अभी भी काम करने में सक्षम हैं, समर्थ हैं। उनके शरीर में अभी शक्ति है और उनके पास योजनाएं भी हैं। उनमें उत्साह बुद्धिमत्ता दूरदर्शिता गंभीरता एवं अनुभव आदि अच्छे-अच्छे गुण भी हैं। तो केवल आयु बढ़ जाने के कारण निराश नहीं होना चाहिए। उन्हें सकारात्मक चिंतन करना चाहिए, कि *"अभी तो मेरे पास ईश्वर की दी हुई बहुत सी शक्ति बची हुई है। अभी मैं युवा हूं। अभी तो और कई वर्ष काम कर सकता हूं।"* ऐसा सोचकर पूरे उत्साह के साथ अपनी योजनाओं की पूर्ति में लगे रहें। *"ईश्वर आपका उत्साह बढ़ाएगा। आपको और अधिक शक्ति देगा और आप ऐसे ही स्वस्थ प्रसन्न एवं स्वयं को युवा अनुभव करते हुए और भी बहुत से कार्य कर जाएंगे।"* आपके कार्यों को देखकर अन्यों को भी प्रेरणा मिलेगी, कि *"यह व्यक्ति इस उम्र में भी इतनी भाग दौड़ करता है। पूरे उत्साह के साथ काम करता है। कहीं इसके जीवन में कमजोरी या निराशा नहीं दिखाई देती, तो हमें भी ऐसा ही करना या बनना चाहिए।"* *"इस प्रकार से आपके उत्तम कार्यों को देखकर दूसरों को भी बहुत सी प्रेरणा मिलेगी। इससे उनकी एवं समाज की उन्नति तो होगी ही, साथ में आपको भी इसका बहुत बड़ा पुण्य मिलेगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - बढ़ती हुई आयु की दशरथ मांझी चिंता न करें। इस पहाड को काटकर যনা শরনাশা থা जब तक आपके पास प्राप्त करने को लक्ष्य बाकी है, और आप लिए उसके पुरुषार्थ करते हैं, पूर्ण तो समझ लीजिए तब तक आप युवा हैं। व्सुविचार अज का ०५ मई स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:Ildarshanyog.org बढ़ती हुई आयु की दशरथ मांझी चिंता न करें। इस पहाड को काटकर যনা শরনাশা থা जब तक आपके पास प्राप्त करने को लक्ष्य बाकी है, और आप लिए उसके पुरुषार्थ करते हैं, पूर्ण तो समझ लीजिए तब तक आप युवा हैं। व्सुविचार अज का ०५ मई स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:Ildarshanyog.org - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #❤️जीवन की सीख
🙏कर्म क्या है❓ - Il3ilazll अकेलेपन में सड़ने की बजाय एकांत में खिलना यहीं जीवन जीने की सच्ची जड़ी बुटी है। जब आप अपनी अंदरकी शान्ति के साथ मैत्री करलेंगे तब आपको किसी कि अनुपस्थितिःका दुः्ख नृहीं रहेगा| क्योकि आप अपने ही श्रेष्ठ मित्र गए्होंगे। बन Il3ilazll अकेलेपन में सड़ने की बजाय एकांत में खिलना यहीं जीवन जीने की सच्ची जड़ी बुटी है। जब आप अपनी अंदरकी शान्ति के साथ मैत्री करलेंगे तब आपको किसी कि अनुपस्थितिःका दुः्ख नृहीं रहेगा| क्योकि आप अपने ही श्रेष्ठ मित्र गए्होंगे। बन - ShareChat
4.5.2026 संसार में देखा जाता है, कि अधिकांश लोग अनुशासन में रहना नहीं चाहते। क्योंकि वे गंभीरता से विचार नहीं करते कि अनुशासन में रहने से क्या-क्या लाभ होते हैं। *"और क्योंकि अनुशासन में रहने से तात्कालिक रूप से थोड़ा कष्ट भी होता है, उस कष्ट को वे सहन करना नहीं चाहते। इसलिए अधिकांश लोग अनुशासन में नहीं रहते।"* परंतु कुछ लोग जो पूर्व जन्मों के संस्कारी होते हैं, वे अनुशासन का महत्व समझते हैं और पूरे अनुशासन का पालन करते हैं। *"ऐसे लोगों को भी तात्कालिक रूप से थोड़ा कष्ट तो उठाना पड़ता है, परंतु वे उसका महत्व और लाभ जानते हैं, इसलिए वे तात्कालिक रूप से थोड़ा कष्ट उठाकर भी पूरे अनुशासन में रहते हैं। और फिर पूरा जीवन उसका उत्तम फल = सुख शांति और समृद्धि रूप फल भोगते हैं।"* *"अतः सभी को अनुशासन का महत्व समझना चाहिए और अपने जीवन को सुखमय एवं प्रेरणादायक बनाने के लिए अनुशासन में रहना चाहिए। इससे सब का सुख बढ़ता है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #❤️जीवन की सीख #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
❤️जीवन की सीख - अनुशासन में रहने से थोड़े समय का कष्ट होता है परंतु जीवन {3{OI লাম মিলনা El व्सुविचार अज का ०४ मई स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:lldarshanyog org अनुशासन में रहने से थोड़े समय का कष्ट होता है परंतु जीवन {3{OI লাম মিলনা El व्सुविचार अज का ०४ मई स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:lldarshanyog org - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏कर्म क्या है❓ - Il3iazII 66 मनुष्य के चार स्थान कभी नही भरते समुद्र. श्मशान, तृष्णा का घड़ा और मनुष्य का मन న Il3iazII 66 मनुष्य के चार स्थान कभी नही भरते समुद्र. श्मशान, तृष्णा का घड़ा और मनुष्य का मन న - ShareChat
3.5.2026 ईश्वर दयालु है। ईश्वर के इस दयालुपन गुण को धारण करने वाले कुछ लोग भी दयालु होते हैं। वे सदा दूसरों की सहायता करने को तैयार रहते हैं। "कोई भी योग्य पात्र मिले, चाहे रोगी हो, विकलांग हो, निर्धन हो, कोई पशु पक्षी हो अथवा कोई अचानक आपत्ति में फंस हो गया हो, तो ऐसे लोगों की सहायता करने को वे दयालु लोग सदा तत्पर रहते हैं, और शीघ्र ही उनकी सहायता करते हैं। इससे उन आपत्तिग्रस्त लोगों की समस्याएं दूर हो जाती हैं, तथा उनका पूरा दिन आनंद से बीतता है।" "और दयालु व्यक्ति को ईश्वर तत्काल आनन्द उत्साह निर्भयता आदि प्रदान करता है। इससे दयालु व्यक्ति भी सुख से अपना जीवन जीता है।" "इसलिए दयालु ईश्वर के दयालुता गुण को अवश्य ही धारण करना चाहिए, और योग्य पात्रों की सहायता अवश्य करनी चाहिए।" ---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।" #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - स्सुविचाव अज का 03: दयालु बनें। क्योंकि आपकी थोड़ी सी दयालुता किसी दूसरे के दिन भर के आनन्द का कारण बन सकती है। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org स्सुविचाव अज का 03: दयालु बनें। क्योंकि आपकी थोड़ी सी दयालुता किसी दूसरे के दिन भर के आनन्द का कारण बन सकती है। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - ।ओ३म्। ೆ सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के उपप्रधान , आर्य प्रतिनिधि सभा बंगाल के प्रधान , अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ (पूर्वोत्तर) के प्रधान एवं डॉलर इंडस्ट्रीज के चेयरमैन श्री दीनदयाल गुप्त जी का आज 2 मई प्रातः २०२६ प्रातः १०:०० बजे आकस्मिक निधन समस्त आर्य जगत की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अंतिम संस्कार आज सायं 7 बजे नीमतल्ला घाट , कोलकाता अखिल भारतीय दयानन्द सेवाश्रम संघ ।ओ३म्। ೆ सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के उपप्रधान , आर्य प्रतिनिधि सभा बंगाल के प्रधान , अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ (पूर्वोत्तर) के प्रधान एवं डॉलर इंडस्ट्रीज के चेयरमैन श्री दीनदयाल गुप्त जी का आज 2 मई प्रातः २०२६ प्रातः १०:०० बजे आकस्मिक निधन समस्त आर्य जगत की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अंतिम संस्कार आज सायं 7 बजे नीमतल्ला घाट , कोलकाता अखिल भारतीय दयानन्द सेवाश्रम संघ - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ।ओ३म्। ೆ सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के उपप्रधान , आर्य प्रतिनिधि सभा बंगाल के प्रधान , अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ (पूर्वोत्तर) के प्रधान एवं डॉलर इंडस्ट्रीज के चेयरमैन श्री दीनदयाल गुप्त जी का आज 2 मई प्रातः २०२६ प्रातः १०:०० बजे आकस्मिक निधन समस्त आर्य जगत की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अंतिम संस्कार आज सायं 7 बजे नीमतल्ला घाट , कोलकाता अखिल भारतीय दयानन्द सेवाश्रम संघ ।ओ३म्। ೆ सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के उपप्रधान , आर्य प्रतिनिधि सभा बंगाल के प्रधान , अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ (पूर्वोत्तर) के प्रधान एवं डॉलर इंडस्ट्रीज के चेयरमैन श्री दीनदयाल गुप्त जी का आज 2 मई प्रातः २०२६ प्रातः १०:०० बजे आकस्मिक निधन समस्त आर्य जगत की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अंतिम संस्कार आज सायं 7 बजे नीमतल्ला घाट , कोलकाता अखिल भारतीय दयानन्द सेवाश्रम संघ - ShareChat
2.5.2026 ज्ञानी व्यक्ति मूर्खों के सामने मौन हो जाते हैं। वे समझते हैं, कि *"मूर्ख लोग समझाने पर भी नहीं मानेंगे।"* क्योंकि उनके पास भूतकाल का बहुत सारा अनुभव पहले से विद्यमान होता है। इसलिए वे मूर्खों को समझाने का प्रयास नहीं करते। और उनकी मूर्खता को देखकर मन ही मन दुखी भी नहीं होते, बल्कि प्रसन्न रहते हैं। *"और जो लोग स्वयं मूर्ख होते हैं। वे दूसरे मूर्खों की उल्टी सीधी क्रियाओं को देखकर क्रोधित होते हैं। और उन मूर्खों को समझाने का प्रयास करते हैं। क्योंकि वे इस बात को नहीं जानते कि ये सामने वाले लोग मूर्ख हैं, ये नहीं समझेंगे।" "इस बात को न समझने वाले लोग स्वयं मूर्ख होते हैं, और वे क्रोध करके लड़ाई झगड़ा उत्पन्न करते हैं।"* तो सारी बात का सार यह हुआ, कि *"मूर्खों के सामने मौन रहने में ही बुद्धिमत्ता है, और उनसे झगड़ा न करते हुए अपना बचाव करने में ही आनन्द है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏कर्म क्या है❓ - व्सुविचाव Bu7 & 0)22శికే मूर्खों के सामने मौन रहने में जो आनंद है से शिकायत करने में नहींहै। मूर्खों 6 क्योंकि ज्ञान की शक्ति मौन है, और मूर्खता की शक्ति क्रोध करना है। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org व्सुविचाव Bu7 & 0)22శికే मूर्खों के सामने मौन रहने में जो आनंद है से शिकायत करने में नहींहै। मूर्खों 6 क्योंकि ज्ञान की शक्ति मौन है, और मूर्खता की शक्ति क्रोध करना है। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org - ShareChat