अजय ओमप्रकाश आर्य
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अजय ओमप्रकाश आर्य
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#🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏कर्म क्या है❓ - स्व परििर्तन विश्व परिर्नन का फ्रुख्य आधार है 9 स्व परििर्तन विश्व परिर्नन का फ्रुख्य आधार है 9 - ShareChat
25.2.2026 लोग चाहते हैं दूसरों के साथ हमारा संबंध सदा बना रहे, सुदृढ़ हो, जिससे हमें दूसरे लोगों से जीवन भर लाभ मिलता रहे। लोग यह तो सोचते हैं, कि *"हमें दूसरों से जीवन भर लाभ मिलता रहे। परंतु उनके साथ संबंध को टिकाए रखने के जो नियम हैं, उन नियमों का पालन करना नहीं चाहते।"* इसका कारण है, *"उनका स्वार्थ मूर्खता हठ दुराग्रह क्रोध लोभ ईर्ष्या छल कपट आदि दोष।"* *"जो व्यक्ति अपने इन दोषों को दूर नहीं करता और दूसरों के साथ न्यायपूर्वक प्रेमपूर्वक व्यवहार नहीं करेगा, उसका संबंध दूसरों के साथ लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा, टूट जाएगा।"* प्रेम से व्यवहार करने का अर्थ है, *"एक दूसरे के प्रति समर्पण, अर्थात बुद्धिमत्ता और न्याय से सब व्यवहार करना।"* यदि आप चाहते हों, कि *"आपके संबंध दूसरों के साथ लंबे समय तक टिके रहें, दूसरों से आपको जीवन भर लाभ मिलता रहे, तो संबंध बनाए रखने के नियमों का पालन करें।" "दूसरों के साथ समर्पित भाव से सभ्यतापूर्वक नम्रतापूर्वक प्रेमपूर्वक शुद्ध मन से छल कपट आदि दोष रहित होकर अच्छा व्यवहार करें। तभी आपका संबंध दूसरों के साथ जीवन भर टिका रह सकता है, और आपको दूसरों से जीवन भर लाभ मिल सकता है, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏कर्म क्या है❓ - प्रेम से व्यवहार करने पर aaata গত কা 251 फरवरी संसार में संबंध टिकते हैंl प्रेम से व्यवहार करने का अर्थ है एक दूसरे के प्रति समर्पण, अर्थात बुद्धिमत्ता और न्याय से सब व्यवहार करना। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org प्रेम से व्यवहार करने पर aaata গত কা 251 फरवरी संसार में संबंध टिकते हैंl प्रेम से व्यवहार करने का अर्थ है एक दूसरे के प्रति समर्पण, अर्थात बुद्धिमत्ता और न्याय से सब व्यवहार करना। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org - ShareChat
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🙏कर्म क्या है❓ - महार्षि दयानंद के अलावा किसी भी मत संप्रदाय के संस्थापक गुरू पैग़म्बर ने यह घोषणा नहीं की :- सत्य के ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने के लिए सदा तैयार रहना चाहिए। महार्षि दयानंद के अलावा किसी भी मत संप्रदाय के संस्थापक गुरू पैग़म्बर ने यह घोषणा नहीं की :- सत्य के ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने के लिए सदा तैयार रहना चाहिए। - ShareChat
24.2.2026 *"संसार में बहुत से लोग अपनी अज्ञानता अविद्या स्वार्थ क्रोध लोभ हठ अभिमान आदि दोषों के कारण दूसरों के साथ अनुचित व्यवहार करते रहते हैं। वे स्वयं अयोग्य होते हुए भी दूसरे योग्य व्यक्तियों पर अपना शासन चलाना चाहते हैं।"* परंतु वे भोले लोग इस बात को नहीं समझते, कि *"संसार में सभी आत्माएं एक जैसी हैं।"* उन्हें ऐसे सोचना चाहिए कि *"जब आप नहीं चाहते कि कोई दूसरा योग्य व्यक्ति आप पर शासन करे, तो दूसरा योग्य व्यक्ति क्यों चाहेगा, कि आप उस पर शासन करें?"* न्याय तो यही कहता है कि *"जिसकी योग्यता कम हो, वह अधिक योग्यता वाले व्यक्ति के अनुशासन में रहे। कोई किसी पर अन्याय न करे। तभी सबका सुख बढ़ेगा।"* *"फिर भी अपनी इस मूर्खता के कारण वे लोग दूसरे योग्य व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार करते रहते हैं। अपने हठ अभिमान और क्रोध आदि दोषों के कारण दूसरों को दुख देते रहते हैं,"* जिसका परिणाम यह होता है कि *"उनके अन्य बुद्धिमानों के साथ संबंध टूट जाते हैं। वे जीवन भर दूसरे बुद्धिमानों से होने वाले लाभ को खो देते हैं, और जीवन भर अनेक प्रकार की हानियां उठाते हैं।" "यदि वे ऐसा न करते, और अन्य बुद्धिमानों के साथ प्रेम पूर्वक न्याय पूर्वक सत्य व्यवहार करते, तो उन्हें ऐसी हानियां नहीं उठानी पड़ती।"* इसलिए इस बात को सब लोग समझने का प्रयास करें, कि *"क्रोध, हठ और अभिमान करने से कोई लाभ नहीं होता, बल्कि बहुत सारी हानियां होती हैं।"* हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि *"हे भगवान्! आप सबको सद्बुद्धि दें। ताकि सब लोग अपनी मूर्खता हठ क्रोध लोभ आदि दोषों को छोड़कर सबके साथ न्यायपूर्वक अच्छा व्यवहार करें और अन्य लोगों के गुणों से भी जीवन भर लाभ उठाएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏कर्म क्या है❓ - औजु काव्सुविचार २४ फखरी जैसे हथौड़े से ताला खोलें, तो वह ट्ूट जाता है और बार-बार काम नहीं आता। चाबी से खोलने पर ताला टूटता नहीं और बार-बार काम आता है। ऐसे ही क्रोध करने से संबंध ट्ूट जाते हैं और प्रेम से व्यवहार करने पर लंबे समय तक बने रहते हैं। इसलिए प्रेमपूर्वक ही सब व्यवहार करने चाहिएं। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:lldarshanyog org औजु काव्सुविचार २४ फखरी जैसे हथौड़े से ताला खोलें, तो वह ट्ूट जाता है और बार-बार काम नहीं आता। चाबी से खोलने पर ताला टूटता नहीं और बार-बार काम आता है। ऐसे ही क्रोध करने से संबंध ट्ूट जाते हैं और प्रेम से व्यवहार करने पर लंबे समय तक बने रहते हैं। इसलिए प्रेमपूर्वक ही सब व्यवहार करने चाहिएं। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:lldarshanyog org - ShareChat
23.2.2026 संसार में ऐसा देखा जाता है, कि *"कोई व्यक्ति 25/30 वर्ष की आयु में ही बहुत बुद्धिमान हो जाता है। और कोई कोई 60/65 वर्ष की आयु में भी विशेष बुद्धिमान नहीं बन पाता। क्या कारण है?"* कारण यह है, कि *"जो व्यक्ति जीवन में आने वाली कठिनाइयों से संघर्ष करता है। पूर्व जन्म के अधिक विद्या बुद्धि के संस्कारों वाला भी होता है। उन संस्कारों के कारण वह कुछ स्वयं परिश्रम करता है। कुछ अन्य विद्वानों बुद्धिमानों से सलाह लेता है। इस प्रकार से पुरुषार्थ करते-करते वह कुछ ही समय में बुद्धिमान बन जाता है। और जीवन में आने वाली कठिनाइयां को पार कर जाता है, उन्हें जीत लेता है।"* *"और जो व्यक्ति पूर्व जन्म के अधिक विद्या बुद्धि के संस्कारों वाला नहीं होता। वर्तमान में भी विशेष पुरुषार्थ नहीं करता। तथा अन्य बुद्धिमानों की सलाह पर भी नहीं चलता। वह व्यक्ति 60/65 वर्ष की आयु में भी बुद्धिमान नहीं बन पाता।"* *"इसलिए व्यक्ति को केवल अपनी बुद्धि से ही सारे निर्णय नहीं करने चाहिएं। क्योंकि उसका ज्ञान अधूरा और अनुभव कम होता है।"* अतः जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए विशेष बुद्धिमान होना आवश्यक है। और *"उसके लिए अन्य विद्वानों बुद्धिमानों की सलाह लेनी चाहिए। उनके मार्गदर्शन से लाभ उठाना चाहिए, और स्वयं भी पूरा पुरुषार्थ करना चाहिए। तब जाकर व्यक्ति विशेष बुद्धिमान बनता है, और सुखी होता है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏कर्म क्या है❓ - ब्सुविचाळ శuuat २३ फखरी gIuHI से नहीं बढ़ती, केवल आयु बढ़ने बल्कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों से संघर्ष करने तथा उनको जीत लेने से बढ़ती है। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org ब्सुविचाळ శuuat २३ फखरी gIuHI से नहीं बढ़ती, केवल आयु बढ़ने बल्कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों से संघर्ष करने तथा उनको जीत लेने से बढ़ती है। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org - ShareChat
22.2.2026 लोग कहते हैं कि "बुरा देखना पाप है, बुरा सुनना पाप है, बुरा बोलना पाप है, और शरीर से बुरे काम करना भी पाप है।" जी हां, लोग ठीक कहते हैं। *"बुरा देखना बुरा सुनना और शरीर से बुरे काम करना, यह सब पाप है।"* परंतु वेद आदि शास्त्र कहते हैं कि *"पाप केवल इतना ही नहीं है। बल्कि इन सब का मूल कारण है बुरा सोचना। जैसे बुरा देखना पाप है, बुरा सुनना बुरा बोलना बुरे काम करना भी पाप है। ऐसे ही इन सब का मूल कारण "बुरा सोचना" भी पाप है।"* *"जो व्यक्ति जैसा सोचता है, वह वैसा ही देखता सुनता बोलता और वैसे ही काम करता है।"* इसका अर्थ हुआ कि *"सब पापों का मूल कारण "बुरा सोचना" ही है।"* यदि आप बुरे कामों या पापों से बचना चाहते हों, तो इसका उपाय यही है, कि *"अपने चिंतन को ठीक करें। अपने सोचने को ठीक करें।बुरा न सोचें, बल्कि अच्छा सोचें। अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी सबके लिए अच्छा सोचें।"* "यदि आप इस प्रकार से अपने चिंतन को ठीक करके अच्छा देखेंगे अच्छा सुनेंगे अच्छा बोलेंगे और शरीर से भी अच्छे काम करेंगे। तो इन सब अच्छे कर्मों को करके आप बहुत सा पुण्य कमाएंगे।"* *"और यदि आप पुण्य कर्मों का आचरण करेंगे, तो निश्चित रूप से ईश्वर आपको सुख देगा। आपका यह जन्म भी सुखदायक होगा और अगला भी।"* *"अतः अच्छा सोचें, अच्छा बोलें। अच्छा देखें अच्छा सुनें और शरीर से भी अच्छे काम ही करें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏कर्म क्या है❓ - बुरा देखना, बुरा सुनना, बुरा बोलना, बुरे काम करना, पाप केवल इतना ही नहीं है बल्कि इन सब का मूल कारण और इन सबसे बड़ा पाप बुरा सोचना है। feate अज का २२ फरवरी स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:lldarshanyog org बुरा देखना, बुरा सुनना, बुरा बोलना, बुरे काम करना, पाप केवल इतना ही नहीं है बल्कि इन सब का मूल कारण और इन सबसे बड़ा पाप बुरा सोचना है। feate अज का २२ फरवरी स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:lldarshanyog org - ShareChat
21.2.2026 झूठ और सच सदा से चलते आए हैं। आज भी चल रहे हैं और भविष्य में भी चलेंगे। न कभी झूठ समाप्त होगा, और न कभी सच। संसार में देखा यही जाता है, कि *"झूठ बहुत तेजी से चलता है। सच धीमे चलता है। परंतु लंबे समय के बाद भी झूठ रास्ते में खो जाता है, वह लक्ष्य पर नहीं पहुंचता।" "सत्य भले ही धीरे चलता है, लेकिन अंतिम लक्ष्य तक पहुंचता है।" इसीलिए वेद आदि शास्त्रों में कहा है, कि "सत्य की ही विजय होती है।"* *"अतः सत्य मार्ग पर चलें, झूठ पर नहीं। क्योंकि झूठ आपको अंतिम लक्ष्य तक अर्थात सुख तक नहीं पहुंचा पाएगा।" "हम सब का अंतिम लक्ष्य है सुख प्राप्त करना।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - SHORTCUT आज का व्सुाविचाव २1 फरवरी झूठ भले ही कितना भी तेज चलता हो, लक्ष्य पर केवल सत्य ही पहुंचेगा , झूठ कभी नहीं | अर्थात अंतिम्त विजय सत्य की ही होगी, झूठ की कभी नहीं | रवामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक , दर्शन योग महाविद्यालय https: IIdarshanyog.org  SHORTCUT आज का व्सुाविचाव २1 फरवरी झूठ भले ही कितना भी तेज चलता हो, लक्ष्य पर केवल सत्य ही पहुंचेगा , झूठ कभी नहीं | अर्थात अंतिम्त विजय सत्य की ही होगी, झूठ की कभी नहीं | रवामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक , दर्शन योग महाविद्यालय https: IIdarshanyog.org - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ऋषि दयानन्द जैसे अद्वितीय महापुरुष की उपेक्षा कर देना ही आधुनिक समाज के पतन का मुख्य कारण है ऋषि दयानन्द जैसे अद्वितीय महापुरुष की उपेक्षा कर देना ही आधुनिक समाज के पतन का मुख्य कारण है - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - बुराई कैसी भी हो, उसका अंतिम संस्कार ৪ !! अच्छाई ही करती बुराई कैसी भी हो, उसका अंतिम संस्कार ৪ !! अच्छाई ही करती - ShareChat
20.2.2026 यदि आप किसी कारण से भयभीत हों, और शांति प्राप्त करना चाहते हों, तो आपको दो चीजों की आवश्यकता पड़ेगी। *"एक तो पूर्ण पुरुषार्थ और दूसरी प्रार्थना।"* जो व्यक्ति अपने कार्य की सिद्धि के लिए पूर्ण पुरुषार्थ करता है, तो प्रायः उसका कार्य सिद्ध हो जाता है। *"यदि कभी कोई कमी रह भी जाती है, और उसे यह भय सताने लगता है कि मेरा यह कार्य पूरा होगा या नहीं?"* तब वह पहले पूर्ण पुरुषार्थ करता है और जब उसके कार्य पूरा होने में कुछ कमी रह जाती है, तब वह उस कार्य की सिद्धि के लिए ईश्वर से और समाज के समर्थ एवं बुद्धिमान लोगों से प्रार्थना करता है। *"तब ईश्वर तथा समाज के समर्थ एवं बुद्धिमान लोग उसके पुरुषार्थ को देखते हैं, कि "यह व्यक्ति पूरा पुरुषार्थ कर रहा है, फिर भी इसका कार्य सिद्ध नहीं हो पा रहा, तो इसकी सहायता करनी चाहिए।"* *"तब ईश्वर और समाज के बुद्धिमान एवं समर्थ लोग उसकी सहायता कर देते हैं, और उसका कार्य सिद्ध हो जाता है। तब उसका भय दूर हो जाता है, और उसे शांति मिलती है।"* ईश्वर तथा समाज के बुद्धिमान लोगों का नियम याद रहे, कि *"ईश्वर और समाज के समर्थ एवं बुद्धिमान लोग आलसी या निष्क्रिय लोगों की सहायता नहीं करते, पुरुषार्थी व्यक्ति की ही सहायता करते हैं।"* *"आपका भी यदि कोई काम अटका हुआ हो, तो आप भी उस कार्य की सिद्धि के लिए पहले पूर्ण पुरुषार्थ करें। यदि वह कार्य पूरा न हो पाए, फिर ईश्वर तथा समाज के समर्थ एवं बुद्धिमान लोगों से प्रार्थना करें। तो आपका कार्य भी सिद्ध हो जाएगा। आपका भय दूर हो जाएगा तथा आपको भी शांति मिलेगी।"* नोट -- *"यह भी ध्यान रहे, कि आप जो कार्य करना चाहते हैं, उसको करने का शक्ति सामर्थ्य और साधन भी आपके पास उसी के अनुसार होने चाहिएं। यदि आपके पास साधन ₹10 के हैं, और आप कल्पना करें मैं ₹200 का काम कर लूं, तो आप का कार्य सिद्ध नहीं हो पाएगा। इसलिए ऐसी कल्पनाएं नहीं करनी चाहिएं, अन्यथा आप असफल होंगे।" "यदि ₹10 का काम करने की क्षमता हो, और आप 10 12 13 रुपए का काम करने की योजना बनाएं, तो आपका कार्य सिद्ध हो जाएगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - यदि शभय' से छूट कर 'शांति' प्राप्त करना चाहते हों तो दोनों के बीच का 'प्रार्थना'| पुल है ईश्वर से या किसी सामर्थ्यवान व्यक्ति से पुरुषार्थ पूर्वक प्रार्थना करें, वह आपकी सहायता करेगा , जिससे भय दूर हो जाएगा। आपका तथा आपको शांति मिलेगी। ಫನ अज का २० फरवरी  स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:lldarshanyog org यदि शभय' से छूट कर 'शांति' प्राप्त करना चाहते हों तो दोनों के बीच का 'प्रार्थना'| पुल है ईश्वर से या किसी सामर्थ्यवान व्यक्ति से पुरुषार्थ पूर्वक प्रार्थना करें, वह आपकी सहायता करेगा , जिससे भय दूर हो जाएगा। आपका तथा आपको शांति मिलेगी। ಫನ अज का २० फरवरी  स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https:lldarshanyog org - ShareChat