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24.4.2026 व्यक्ति खाली तो बैठ नहीं सकता। चाहे वह अच्छा कर्म करे, चाहे बुरा करे, कुछ तो करेगा ही। यदि वह अच्छा कर्म करेगा, तो ही बुराई से बच पाएगा। यदि अच्छा नहीं करेगा, तो बुरा कर्म करेगा। क्योंकि वह खाली तो बैठ नहीं सकता। *"यदि बुरा कर्म करेगा, तो ईश्वर की ओर से उसे दंड मिलेगा। यदि दंड से बचना हो, तो इसी में बुद्धिमत्ता है, कि व्यक्ति अच्छा कर्म करे।"* अब कौन सा कर्म अच्छा है, और कौन सा बुरा? इस बात का निर्णय करने के लिए प्रमाण और तर्क की आवश्यकता होती है। *"प्रमाण और तर्क को जानने के लिए महर्षि गौतम जी का बनाया हुआ न्याय दर्शन पढ़ना चाहिए।"* *"वेदों के आधार पर महर्षि गौतम जी ने न्याय दर्शन की रचना की, और उसमें विस्तार से बताया कि प्रमाण और तर्क क्या होता है, और वह कैसे काम करता है। यदि आप भी प्रमाण और तर्क के विषय में ठीक प्रकार से जानना चाहते हों, तो न्याय दर्शन का अध्ययन अवश्य करें।"* यदि न्याय दर्शन कठिन लगे, तो इसी पद्धति पर *"महर्षि दयानंद सरस्वती जी की लिखी हुई एक पुस्तक है जिसका नाम है सत्यार्थ प्रकाश। उसको पढ़ें। तो भी आपको प्रमाण और तर्क की बहुत अच्छी जानकारी हो सकती है।"* इस प्रकार से प्रमाण और तर्क से जानकारी करके ही कोई भी कर्म करें। *"यज्ञ करना दान देना सेवा करना ईश्वर की उपासना करना वेद प्रचार करना इत्यादि शुभ कर्म कहलाते हैं। इन शुभ कर्मों का आचरण करें। अन्यथा बुरे कर्मों से बचना तथा अच्छे कर्मों को कर पाना बहुत कठिन है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
❤️जीवन की सीख - यदि आप प्रमाणों और तर्क के विस्तृत आधार पर चिंतन करेंगे , तो ही आप कोई शुभ कर्म कर पाएंगे। ಫನ अज का २४ अप्रैल स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय httpslldarshanyogorg यदि आप प्रमाणों और तर्क के विस्तृत आधार पर चिंतन करेंगे , तो ही आप कोई शुभ कर्म कर पाएंगे। ಫನ अज का २४ अप्रैल स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय httpslldarshanyogorg - ShareChat