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स्वायम्भुव मन्वन्तर में प्रजापति मरीचि की पत्नी ऊर्णा के गर्भ से छः पुत्र उत्पन्न हुए थे। वे सभी देवता थे। वे यह देखकर कि ब्रह्माजी अपनी पुत्री से समागम करने के लिये उद्यत हैं, हँसने लगे। इस परिहासरूप अपराध के कारण उन्हें ब्रह्माजी ने शाप दे दिया और वे असुर-योनि में हिरण्यकशिपु के पुत्र रूप से उत्पन्न हुए। अब योगमाया ने उन्हें वहाँ से लाकर देवकी के गर्भ में रख दिया और उनको उत्पन्न होते ही कंस ने मार डाला। इनके छः नाम हैं - स्मर, उद्गीथ, परिष्वंग, पतंग, क्षुद्रभृत् और घृणि। श्रीमद्भागवत-महापुराण/१०/८५/४७-५१ श्रीमद्भागवत-महापुराण/10/85/47-51 #PuranikYatra #MBAPanditJi #ब्रह्मवैवर्त_पुराण_कथा #shivmahapuran #shiv #shiva #शिवमहापुराण #bhavishypuran #vedpuran #puranam #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #श्रीमद्भागवत #श्राद्धकर्म #श्राद्धविधि #श्राद्धपक्ष #shradhpaksh #shradh #naradpuran #naradapuran #naradpurankatha #शिवमहापुराणकथा #shivmahapurankatha #ब्रह्मवैवर्तपुराण #hindu #sanatan #brahmvaivartpuran #MBAPanditJi #PuranikYatra
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