sn vyas
#राधे #राधे राधे #राधे कृष्ण
' कोटि तीरथ जेहि भूमि पर,
सीस नवावत आय। '
इस संसार में जितने भी पवित्र और महान तीर्थ स्थल हैं (जैसे काशी, प्रयाग, बद्रीनाथ आदि), वे सब मोक्ष और पुण्य देने वाले माने जाते हैं। लेकिन इस दोहे में कहा गया है कि वे करोड़ों तीर्थ भी स्वयं को धन्य करने और भक्ति का वरदान पाने के लिए इस ब्रजभूमि पर आकर अपना शीश झुकाते हैं। जिस भूमि के कँकड़-पत्थर और धूलि में स्वयं साक्षात ब्रह्म लोट लगाते हों, उस ब्रजभूमि की महिमा के आगे समस्त तीर्थों का वैभव भी छोटा पड़ जाता है।
' सो ब्रज पर श्री लाड़ली,
राजत सहज सुभाय।। '
ऐसे परम पावन और त्रिलोक-वंदनीय ब्रजमंडल पर किसी राजा या तानाशाह की तरह बलपूर्वक शासन नहीं चलता, बल्कि वहाँ की एकमात्र स्वामिनी और महारानी हमारी 'श्री लाड़ली जी' (राधा रानी) हैं। वे इस पूरे ब्रज पर किसी राजसी अहंकार से नहीं, बल्कि अपने अत्यंत 'सहज सुभाय' (सरल, करुणामयी और वात्सल्यपूर्ण स्वभाव) से राज करती हैं। उनका यह एकछत्र राज किसी भय पर नहीं, बल्कि केवल और केवल प्रेम और आत्मीयता पर टिका है।
जय श्रीकृष्ण....
सदा मन गोकुल में रहीए...
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