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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - दिखावे की दुनिया में इंसान ಈ अपनी असली पहचान खो रहा है या मूल संग ब्याज पर चढ़कर उम्रभर उधार में दबता जा रहा है फिक्र नहीं क्या उसे आने वाले कल की जो शौक शौक में तबाह होता जा रहा हे खेल रहा अभी आग से खेल समझ पता नहीं उसे उसकी आग में तप रहा है डर है मुझे तो कहीं जल ना जाए वक्त की उड़ान में बल निकल ना जाए जिस दिन अंदेशा होगा उसे अपने बिगड़े या खुद बिगाड़े हुए वक्त का तब क्या उतरेगा नशा फिर उसका शान शौकत के पीछे किये खर्च का मैं तो चाहती हूं आज ही वो संभल जाए लगी है जो चोट अभी घाव बन ना जाए स्वाती छीपा दिखावे की दुनिया में इंसान ಈ अपनी असली पहचान खो रहा है या मूल संग ब्याज पर चढ़कर उम्रभर उधार में दबता जा रहा है फिक्र नहीं क्या उसे आने वाले कल की जो शौक शौक में तबाह होता जा रहा हे खेल रहा अभी आग से खेल समझ पता नहीं उसे उसकी आग में तप रहा है डर है मुझे तो कहीं जल ना जाए वक्त की उड़ान में बल निकल ना जाए जिस दिन अंदेशा होगा उसे अपने बिगड़े या खुद बिगाड़े हुए वक्त का तब क्या उतरेगा नशा फिर उसका शान शौकत के पीछे किये खर्च का मैं तो चाहती हूं आज ही वो संभल जाए लगी है जो चोट अभी घाव बन ना जाए स्वाती छीपा - ShareChat