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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - क्षण में क्षितिज का आभास होने लगा कण में विरिक्त भाव अनंत बनने लगा दूरियों का हर एक भरम अब टूटने लगा मन का परिंदा खुले गगन में उड़ने लगा धरा की धूल भी अब आसमानी लगने लगी सांसों की लय जेसे कोई राग मधुर गढ़ने लगी खोजता था जिस असीम को मैं बाहर सदा वह असीम भीतर ही मेरे आकार लेने लगा एक पल में सिमट आई सदियों की साधना मौन का संगीत हर सुर में जबसे बहने लगा सीमाएं टूटकर अब बेबाक हो गईं हे अंधेरी रात भोर का उजास बनने लगा स्वाती छीपा क्षण में क्षितिज का आभास होने लगा कण में विरिक्त भाव अनंत बनने लगा दूरियों का हर एक भरम अब टूटने लगा मन का परिंदा खुले गगन में उड़ने लगा धरा की धूल भी अब आसमानी लगने लगी सांसों की लय जेसे कोई राग मधुर गढ़ने लगी खोजता था जिस असीम को मैं बाहर सदा वह असीम भीतर ही मेरे आकार लेने लगा एक पल में सिमट आई सदियों की साधना मौन का संगीत हर सुर में जबसे बहने लगा सीमाएं टूटकर अब बेबाक हो गईं हे अंधेरी रात भोर का उजास बनने लगा स्वाती छीपा - ShareChat