Rajen drasingh
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"23 जुलाई स्वराज की अलख जगाकर जन-जन में राष्ट्रभक्ति का संचार करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत नमन" का अर्थ है:यह कथन लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को उनकी जयंती (23 जुलाई, 1856) पर दी गई एक भावभीनी श्रद्धांजलि है。इसका विस्तृत विश्लेषण निम्नलिखित है:23 जुलाई: यह महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक (Lokmanya Tilak) की जन्मतिथि है。स्वराज की अलख जगाकर: तिलक जी ने ही सबसे पहले भारत में 'स्वराज' (स्वशासन) की मांग को बुलंद किया था。 उनका प्रसिद्ध नारा था: "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा।"जन-जन में राष्ट्रभक्ति का संचार: उन्होंने केवल राजनीतिक मंचों से ही नहीं, बल्कि मराठी में 'केसरी' और अंग्रेजी में 'मराठा' समाचार पत्रों के माध्यम से तथा गणेशोत्सव और शिवाजी उत्सव जैसे सार्वजनिक आयोजनों द्वारा आम जनता में देशप्रेम और एकता की भावना जगाई。शत्-शत नमन: इन महान कार्यों और देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें सौ-सौ (शत-शत) बार प्रणाम या नमन किया गया है।तिलक जी 'लाल-बाल-पाल' (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल) की प्रसिद्ध तिकड़ी के प्रमुख सदस्य थे。 ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा उन्हें "भारतीय अशांति का जनक" (Father of the Indian unrest) भी कहा गया था。 उनके योगदान के बारे में अधिक जानने के लिए आप Britannica और Wikipedia के लेखों को देख सकते हैं。 #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📰 आपके निकट नौकरियाँ #🔴 क्राइम अपडेट #📹शॉर्ट अपडेट्स वीडियो 🎥
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