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#📝कविता / शायरी/ चारोळी #✍🏽 माझ्या लेखणीतून #🌹प्रेमरंग #🥰Romantic लव्ह स्टेटस 💝 #😘खर प्रेम
📝कविता / शायरी/ चारोळी - मजबूरिया और अप्नोकी दूरिया कोई मजबूरी ही होगी जनाब, ச்சிப  ಖತ' जाता अपना मकान छोड़कर के सहारे रहना पड़ता है। टूसरों अपनों का अपनापन भूलकर रहना पडता है। ग़ैर को अपना बनाता बढ़ता है। कोई मजबूरी ही होगी , जनाब! कि अपना ही घर छोड़कर दूर कहीं जाना पड़ता है! दिपक पाटील . मजबूरिया और अप्नोकी दूरिया कोई मजबूरी ही होगी जनाब, ச்சிப  ಖತ' जाता अपना मकान छोड़कर के सहारे रहना पड़ता है। टूसरों अपनों का अपनापन भूलकर रहना पडता है। ग़ैर को अपना बनाता बढ़ता है। कोई मजबूरी ही होगी , जनाब! कि अपना ही घर छोड़कर दूर कहीं जाना पड़ता है! दिपक पाटील . - ShareChat