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एकदंत संकष्टी चतुर्थी #पूजन विधि
पूजन विधि - व्रत विधि की कृपा भगवान गणेश प्राप्त करने हेतु ' संकष्टी का व्रत निम्न चतुर्थी चाहिए- प्रकार करना सर्वप्रथम व्रत करने ৯ নিন वाले को বনুর্থী सुबह स्नान आदि से Aq होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इस दिन व्रतधारी लाल रंग के वस्त्र धारण करे तो विशेष लाभ होता है। श्रीगणेश की पूजा करते भगवान गणेश समय व्रती को अपना मुँह पूर्व अथवा उत्तर बैठकर दिशा की ओर रखना चाहिए। तत्पश्चात् स्वच्छ आसन पर 9TTqTT गणेश का पूजन करे। इसके बाद फल, फूल, रौली, मौली, अक्षत, पंचामृत आदि से भगवान गणेश को स्नान करा कर विधिवत प्रकार से पूजा ्अर्चना करनी चाहिए। गणेश पूजन के दौरान धूप दीप आदि से श्रीगणेश की आराधना होनी चाहिए। भगवान गणेश को तिल से बनी वस्तुओं , तिल गुड़ के लड्डू तथा मोदक चाहिए। 'ऊँ सिद्ध बुद्धि सहित महागणपति आपको नमस्कार का भोग लगाना है , इस वाक्य के साथ नैवेद्य के रूप में मोदक व ऋतु फल आदि अर्पित करना चाहिए। सायं काल में व्रतधारी संकष्टी गणेश चतुर्थी की कथा पढ़े अथवा सुने और सुनाएँ। तत्पश्चात् गणेशजी की आरती करें । विधिवत तरीके से गणेश पूजा करने के बाद गणेश मंत्र ' ऊँ गणेशाय नमः' अथवा 'ऊँ गं गणपतये नमः की एक माला, यानी १०८ बार गणेश मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। इस दिन व्रत करने वाले को अपनी सामर्थ्य के अनुसार ग़रीबों को दान आदि देना चाहिए। तिल-गुड़ के लड्डू, कंबल या कपड़े आदि का दान करें ।[१] व्रत विधि की कृपा भगवान गणेश प्राप्त करने हेतु ' संकष्टी का व्रत निम्न चतुर्थी चाहिए- प्रकार करना सर्वप्रथम व्रत करने ৯ নিন वाले को বনুর্থী सुबह स्नान आदि से Aq होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इस दिन व्रतधारी लाल रंग के वस्त्र धारण करे तो विशेष लाभ होता है। श्रीगणेश की पूजा करते भगवान गणेश समय व्रती को अपना मुँह पूर्व अथवा उत्तर बैठकर दिशा की ओर रखना चाहिए। तत्पश्चात् स्वच्छ आसन पर 9TTqTT गणेश का पूजन करे। इसके बाद फल, फूल, रौली, मौली, अक्षत, पंचामृत आदि से भगवान गणेश को स्नान करा कर विधिवत प्रकार से पूजा ्अर्चना करनी चाहिए। गणेश पूजन के दौरान धूप दीप आदि से श्रीगणेश की आराधना होनी चाहिए। भगवान गणेश को तिल से बनी वस्तुओं , तिल गुड़ के लड्डू तथा मोदक चाहिए। 'ऊँ सिद्ध बुद्धि सहित महागणपति आपको नमस्कार का भोग लगाना है , इस वाक्य के साथ नैवेद्य के रूप में मोदक व ऋतु फल आदि अर्पित करना चाहिए। सायं काल में व्रतधारी संकष्टी गणेश चतुर्थी की कथा पढ़े अथवा सुने और सुनाएँ। तत्पश्चात् गणेशजी की आरती करें । विधिवत तरीके से गणेश पूजा करने के बाद गणेश मंत्र ' ऊँ गणेशाय नमः' अथवा 'ऊँ गं गणपतये नमः की एक माला, यानी १०८ बार गणेश मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। इस दिन व्रत करने वाले को अपनी सामर्थ्य के अनुसार ग़रीबों को दान आदि देना चाहिए। तिल-गुड़ के लड्डू, कंबल या कपड़े आदि का दान करें ।[१] - ShareChat