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#सुविचार,,🌹 सत्य वचन 🌹
सुविचार,,🌹 सत्य वचन 🌹 - सभापति का पलायन और गांधी का मौन 4 जैसे ही गांधीजी ने अराजकतावाद और ब्रिटिश दमन पर बोलना शुरू किया, मंच पर खलबली मच गई। एनी बेसेंट it, Stop it!" বি্লান লী| তান্স তীঘf "Stop जोर-जोर से रहिए आवाज़ें आईं- " बोलते बोलते रहिए!" तनाव इतना बढ़ गया कि सभा की अध्यक्षता कर रहे दरभंगा के महाराजा अपनी छोड़कर उठ गए और वहां से चले कुर्सी गए। सभापति के जाने का अर्थ था सभा की समाप्ति। गांधीजी को अपना भाषण अधूरा छोड़ना पडा, लेकिन उस आधे भाषण ने ही देश को बता दिया था कि अब भारत को नेतृत्व  मिल चुका है। एक नया और बेबाक मशहूर लेखक लुई फिशर ने इस भाषण को गांधी के जीवन का टर्निंग पॉइंट माना है। गांधीजी को समझे बिना १९ वीं सदी के उस भारत को समझना असंभव है जो अपनी पहचान की तलाश में था। वह भाषण केवल एक वक्तव्य नहीं था, बल्कि वह घोषणा थी कि अब भारत की आजादी की लड़ाई महलों से निकलकर खेतों और खलिहानों तक वाली है। पहुँचने सभापति का पलायन और गांधी का मौन 4 जैसे ही गांधीजी ने अराजकतावाद और ब्रिटिश दमन पर बोलना शुरू किया, मंच पर खलबली मच गई। एनी बेसेंट it, Stop it!" বি্লান লী| তান্স তীঘf "Stop जोर-जोर से रहिए आवाज़ें आईं- " बोलते बोलते रहिए!" तनाव इतना बढ़ गया कि सभा की अध्यक्षता कर रहे दरभंगा के महाराजा अपनी छोड़कर उठ गए और वहां से चले कुर्सी गए। सभापति के जाने का अर्थ था सभा की समाप्ति। गांधीजी को अपना भाषण अधूरा छोड़ना पडा, लेकिन उस आधे भाषण ने ही देश को बता दिया था कि अब भारत को नेतृत्व  मिल चुका है। एक नया और बेबाक मशहूर लेखक लुई फिशर ने इस भाषण को गांधी के जीवन का टर्निंग पॉइंट माना है। गांधीजी को समझे बिना १९ वीं सदी के उस भारत को समझना असंभव है जो अपनी पहचान की तलाश में था। वह भाषण केवल एक वक्तव्य नहीं था, बल्कि वह घोषणा थी कि अब भारत की आजादी की लड़ाई महलों से निकलकर खेतों और खलिहानों तक वाली है। पहुँचने - ShareChat