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रुचिक नामक एक जिज्ञासु तपस्वी बचपन से हिमालय की एक रहस्यमयी गुफा में छिपे शिव के दर्शन करना चाहता था, वर्षों की कठिन तपस्या के बाद शिव के संकेत पर उसने हिमालय की सातवीं चोटी की दुर्गम यात्रा शुरू की, बाधाओं को पार कर जब वह दिव्य प्रकाश के द्वार पर पहुँचा तो एक आकाशवाणी हुई कि भीतर प्रवेश के लिए उसे अपना 'अहम्' (ego) त्यागना होगा..!! रुचिक ने स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया और जैसे ही उसका 'मैं' मिटा वो द्वार स्वतः खुल गया, भीतर उसे किसी मूर्ति के बजाय एक अनंत शांति और विराट प्रकाश का अनुभव हुआ और तब उसे बोध हुआ कि शिव किसी बाहरी स्थान पर नहीं बल्कि स्वयं के भीतर के मौन और अंतर्मन में वास करते हैं..!! उसका निष्कर्ष था :~ शिव स्वयं जिज्ञासा का उत्तर हैं..!! #⚓जय भोलेनाथ⚓ #⚓जय महाकाल⚓ #⚓हर हर महादेव⚓ #👁️ ठनठनिया-जंक्शन 👁️ #⚓ SELFISH-AGENDA ⚓
⚓जय भोलेनाथ⚓ - पर्वत चोटी ढूँढता, भटका नगर-्नगर। शिव तो बैठे शांत बन, अंतर्मन के घर।I पर्वत चोटी ढूँढता, भटका नगर-्नगर। शिव तो बैठे शांत बन, अंतर्मन के घर।I - ShareChat