ShareChat
click to see wallet page
search
#📒 मेरी डायरी #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #😒दर्द भरी शायरी🌸 #☝ मेरे विचार
📒 मेरी डायरी - एक ज़माने से छोड़ आए अपने घर की गलियों को हम अब हम परदेस में रहने लगे हैं याद फिर भी है हर बात अपने शहर की मजबूरी है मगर क्या करें बड़ी अब कभी जाते भी हैं तो सिर्फ दो- लिए या चार दिन के बहुत याद आता है मुझको मेरे शहर की वो गलियों का सफर ना-समझ थे तो ही अच्छा था इस समझदारी ने तो हमारा शहर ही छुड़वा दिया हमसे ।। एक ज़माने से छोड़ आए अपने घर की गलियों को हम अब हम परदेस में रहने लगे हैं याद फिर भी है हर बात अपने शहर की मजबूरी है मगर क्या करें बड़ी अब कभी जाते भी हैं तो सिर्फ दो- लिए या चार दिन के बहुत याद आता है मुझको मेरे शहर की वो गलियों का सफर ना-समझ थे तो ही अच्छा था इस समझदारी ने तो हमारा शहर ही छुड़वा दिया हमसे ।। - ShareChat