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#📒 मेरी डायरी #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #😒दर्द भरी शायरी🌸 #☝ मेरे विचार
📒 मेरी डायरी - अब उसी रहगुज़र से मुझे गुज़रना नहीं है। वो जो मिले थे, उन राहों पर अब मुझे उन पर चलना नहीं है बहुत सताया है इस मोहब्बत ने मुझे, अब उससे मुझे कोई गिला नहीं है। सवाल कर मुझे पता नहीं क्या मिला उसको , अब मुझे ये भी पता नहीं है गुम-सा हूँ अब भी उसी की यादों में मुझे पता है ये कि ये भी उसको पता नहीं है। ठेस लगी और चूर हो गया हूँ और न जाने कितना दर्द है नसीब में पता नहीं है अब उसी रहगुज़र से मुझे गुज़रना नहीं है। वो जो मिले थे, उन राहों पर अब मुझे उन पर चलना नहीं है बहुत सताया है इस मोहब्बत ने मुझे, अब उससे मुझे कोई गिला नहीं है। सवाल कर मुझे पता नहीं क्या मिला उसको , अब मुझे ये भी पता नहीं है गुम-सा हूँ अब भी उसी की यादों में मुझे पता है ये कि ये भी उसको पता नहीं है। ठेस लगी और चूर हो गया हूँ और न जाने कितना दर्द है नसीब में पता नहीं है - ShareChat
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📒 मेरी डायरी - अगर किसी की आँख में चमकु तो मोहब्बत हूँ मैं। अगर किसी की धड़कन में धड़़कु तो हूँ मैं। বৃব্ধ যান अगर किसी के छूने से मुस्कुरा जाऊ तो छुई-्मुई सी हूँ मैं। अगर किसी को अपना बनाऊ तो हूँ मैं। उसकी ज़िन्दगी अगर किसी की आँख में चमकु तो मोहब्बत हूँ मैं। अगर किसी की धड़कन में धड़़कु तो हूँ मैं। বৃব্ধ যান अगर किसी के छूने से मुस्कुरा जाऊ तो छुई-्मुई सी हूँ मैं। अगर किसी को अपना बनाऊ तो हूँ मैं। उसकी ज़िन्दगी - ShareChat
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📒 मेरी डायरी - एक ज़माने से छोड़ आए अपने घर की गलियों को हम अब हम परदेस में रहने लगे हैं याद फिर भी है हर बात अपने शहर की मजबूरी है मगर क्या करें बड़ी अब कभी जाते भी हैं तो सिर्फ दो- लिए या चार दिन के बहुत याद आता है मुझको मेरे शहर की वो गलियों का सफर ना-समझ थे तो ही अच्छा था इस समझदारी ने तो हमारा शहर ही छुड़वा दिया हमसे ।। एक ज़माने से छोड़ आए अपने घर की गलियों को हम अब हम परदेस में रहने लगे हैं याद फिर भी है हर बात अपने शहर की मजबूरी है मगर क्या करें बड़ी अब कभी जाते भी हैं तो सिर्फ दो- लिए या चार दिन के बहुत याद आता है मुझको मेरे शहर की वो गलियों का सफर ना-समझ थे तो ही अच्छा था इस समझदारी ने तो हमारा शहर ही छुड़वा दिया हमसे ।। - ShareChat
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📒 मेरी डायरी - ShareChat লিনি-ননান ज़िंदगी बीत जाती है, और जब वो बनकर तैयार होता है... तो उसमें जीने की उम्र ही कम रह जाती है। ईटनईट जोड़ते हुए, हम अपने ही अरमानों को टालते जाते हैं, "आज नहीं... कल सही ' कहते ्कहते साल गुज़र जाते हैं। छत तो मिल जाती है सिर पर, पर सुकून कहीं रास्तों में छूट जाता है, और जिस घर के लिए जीते हैं पूरी उम्र... उसी में जीने का वक़्त कम पड़ जाता है। 74 < 0 ShareChat লিনি-ননান ज़िंदगी बीत जाती है, और जब वो बनकर तैयार होता है... तो उसमें जीने की उम्र ही कम रह जाती है। ईटनईट जोड़ते हुए, हम अपने ही अरमानों को टालते जाते हैं, "आज नहीं... कल सही ' कहते ्कहते साल गुज़र जाते हैं। छत तो मिल जाती है सिर पर, पर सुकून कहीं रास्तों में छूट जाता है, और जिस घर के लिए जीते हैं पूरी उम्र... उसी में जीने का वक़्त कम पड़ जाता है। 74 < 0 - ShareChat
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📒 मेरी डायरी - खुद कादिल नाराज हे हमसे॰ ೨೦೦ उसे गिला हेकि ज़िन्दगी कम जी हे हमने.. ओर समझीते ज्यादा जीएं हैॅ...!!! खुद कादिल नाराज हे हमसे॰ ೨೦೦ उसे गिला हेकि ज़िन्दगी कम जी हे हमने.. ओर समझीते ज्यादा जीएं हैॅ...!!! - ShareChat
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📒 मेरी डायरी - का हिस्सा मत बनिए जहां Hs उस आपकी मौजूदगी बोझ बन जाए, Amelm. में अकेले रहिए अपनी छोटी सी दुनिया मगर बेमिसाल रहिए...| Anshika का हिस्सा मत बनिए जहां Hs उस आपकी मौजूदगी बोझ बन जाए, Amelm. में अकेले रहिए अपनी छोटी सी दुनिया मगर बेमिसाल रहिए...| Anshika - ShareChat
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📒 मेरी डायरी - हालात किसी को गलत समझने से पहले एकबार उसकी हालत जानने की कौशिश जरूरकरें क्योंकि गलतफहमी से अच्छैे से अच्छे रिश्ने ट्रूट जाते हैं॰॰४४ हालात किसी को गलत समझने से पहले एकबार उसकी हालत जानने की कौशिश जरूरकरें क्योंकि गलतफहमी से अच्छैे से अच्छे रिश्ने ट्रूट जाते हैं॰॰४४ - ShareChat
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📒 मेरी डायरी - अभी भी कभी॰कभी मैं एक छोटे बच्चे की तरह रूठ जाती हूँ किसी ज़िद्दी बच्चे की तरह ज़िद पर अड़ जाती हूँ मुझे खुद पता नहीं क्यों मैं इस तरह करती हूँ लगता है कभी सोचकर मैंने ऐसी ज़िद क्यों करी। ? अब भी मैं নামানী ৯ मुझमें ठीक से हुशियार नहीं हो पाई हूँ रो लेती हूँ कभी॰कभी खामोश हो जाती हूँ। एक ज़िद्दी बच्चे की तरह मैं अक्सर ज़िद पर अड़ जाती हूँ । अभी भी कभी॰कभी मैं एक छोटे बच्चे की तरह रूठ जाती हूँ किसी ज़िद्दी बच्चे की तरह ज़िद पर अड़ जाती हूँ मुझे खुद पता नहीं क्यों मैं इस तरह करती हूँ लगता है कभी सोचकर मैंने ऐसी ज़िद क्यों करी। ? अब भी मैं নামানী ৯ मुझमें ठीक से हुशियार नहीं हो पाई हूँ रो लेती हूँ कभी॰कभी खामोश हो जाती हूँ। एक ज़िद्दी बच्चे की तरह मैं अक्सर ज़िद पर अड़ जाती हूँ । - ShareChat
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📒 मेरी डायरी - s दिया है मैंने लोगों के पीछे चलना क्योंकि मैंने जिसको जितना सम्मान दिया उसने उतना ही मुझे गिरा हुआ समझा। s दिया है मैंने लोगों के पीछे चलना क्योंकि मैंने जिसको जितना सम्मान दिया उसने उतना ही मुझे गिरा हुआ समझा। - ShareChat
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📒 मेरी डायरी - मोहब्बत ही न वफ़ा ही "না * कुछ भी रास न आया मुझको उसकी मोहब्बत में , ना मुकम्मल हुई न कभी अधूरी रही मेरी प्रेम कहानी, ना रोने से ना हँसने मुस्कुराने से कुछ भी रास न आया मुझको उसकी मोहब्बत ।।"_* मोहब्बत ही न वफ़ा ही "না * कुछ भी रास न आया मुझको उसकी मोहब्बत में , ना मुकम्मल हुई न कभी अधूरी रही मेरी प्रेम कहानी, ना रोने से ना हँसने मुस्कुराने से कुछ भी रास न आया मुझको उसकी मोहब्बत ।।"_* - ShareChat