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*🔱 शनिवार विशेष – दशरथकृत शनि स्तोत्र 🔱*
#शुभ शनिवार #जय शनिदेव
`– 📙पद्म पुराणोक्त , 📓शनि महात्म्य`
`🪶 शनि की ☆साढ़ेसाती , ☆ढैया एवं ☆शनि-महादशा शांति हेतु परम् कल्याणकारी –`
`आज शनिदेव का दिन है । महाराज दशरथ द्वारा रचित इस स्तोत्र के पाठ से शनि देव प्रसन्न होकर अभय प्रदान करते हैं ।`
`लीजिए प्रस्तुत है दशरथकृत शनि स्तोत्र – सम्पूर्ण श्लोकार्थ सहित💐`
*ध्यानम् –*
*नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् ।*
*छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ॥*
`अर्थात – काजल के समान नीली आभा वाले , सूर्यपुत्र , यमराज के बड़े भाई , छाया तथा सूर्य से उत्पन्न शनैश्चर देव को मैं प्रणाम करता हूँ ।`
*स्तोत्रम् –*
*नमः कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च ।*
*नमः कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नमः ॥१॥*
`अर्थात – काले-नीले , शिव के नीले कंठ समान , प्रलयाग्नि स्वरूप औऱ मृत्यु के देवता को नमस्कार ।`
*नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च ।*
*नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते ॥२॥*
`अर्थात – मांसरहित शरीर , लंबी दाढ़ी व जटा , विशाल नेत्र एवं सूखे-उदर वाले को प्रणाम ।`
*नमः पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णे च वै नमः ।*
*नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते ॥३॥*
`अर्थात – विशाल शरीर , मोटे रोम , लंबे-दुर्बल तथा कालसमान दांत वाले देव को नमस्कार ।`
*नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नमः ।*
*नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने ॥४॥*
`अर्थात – गुफा जैसे गहरे नेत्र , देखने में कठिन , घोर-रौद्र-भयंकर औऱ खप्परधारी को प्रणाम ।`
*नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुखाय नमोऽस्तु ते ।*
*सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च ॥५॥*
`अर्थात – सब/सभी/समस्त का भक्षण करने वाले , बलपूर्वक खाने वाले , सूर्यपुत्र एवं अभय देने वाले को नमस्कार ।`
*अधोदृष्टे नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते ।*
*नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तु ते ॥६॥*
`अर्थात – नीचे देखने वाले , संहारक , धीमी गति तथा तलवार के समान तेजवाले को नमस्कार ।`
*तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च ।*
*नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नमः ॥७॥*
`अर्थात – तप से दग्ध शरीर , सदा योग में लीन , नित्य भूखे औऱ अतृप्त देव को प्रणाम ।`
*ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे ।*
*तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ॥८॥*
`अर्थात – ज्ञाननेत्र वाले , कश्यप वंश के सूर्यपुत्र को नमस्कार । प्रसन्न हों तो राज्य दें , रुष्ट हों तो तुरंत हरण कर लें ।`
*देवासुरमनुष्याश्च सिद्धविद्याधरोरगाः ।*
*त्वया विलोकिताः सर्वे नाशं यान्ति समूलतः ॥९॥*
`अर्थात – देव , असुर , मनुष्य , सिद्ध , विद्याधर , नाग – आपकी दृष्टि से सभी समूल नष्ट हो जाते हैं ।`
*प्रसादं कुरु मे सौरे वारदो भव भास्करे ।*
*एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबलः ॥१०॥*
`अर्थात – हे सूर्यपुत्र ! मुझ पर कृपा करो एवं वर दो । इस स्तुति से महाबली शनि देव प्रसन्न हुए ।`
*दशरथं तदा प्राह प्रीयतोऽहं तवोपरि ।*
*वृणु कामं यथेष्टं त्वं वरं वरद मे मतः ॥११॥*
`अर्थात - तब शनि देव बोले ~ दशरथ ! मैं तुमसे प्रसन्न हूँ । मनचाहा वर मांगो ।`
*ततो दशरथः प्राह मम राष्ट्रे न वै प्रभो ।*
*भवेद्भयं क्वचित्सौरे कुपिते त्वयि कर्हिचित् ॥१२॥*
`अर्थात – दशरथ जी बोले ~ प्रभु ! आपके क्रोधित होने पर भी मेरे राज्य में कभी भय न हो ।`
*एवं तदा वरं लब्ध्वा दशरथः सुसंयतः ।*
*जगाम स्वगृहं हृष्टो ह्यर्चयामास तं ग्रहम् ॥*
`अर्थात – वर पाकर संयमी दशरथ जी प्रसन्न मन से घर गए तथा शनि देव की पूजा की ।`
*योऽर्चयेत्स्तवेनानेन तुष्टो ददाति सोऽभयम् ।*
*पीडां न कुरुते कश्चित्तस्य राष्ट्रे न संशयः ॥१४॥*
`अर्थात – जो इस स्तोत्र से पूजा करे , शनि देव प्रसन्न होकर उसे अभय देते हैं । उसके जीवन में कोई पीड़ा नहीं होती ।`
*🎯 फलश्रुति –*
`इस स्तोत्र के नित्यप्रतिदिन नियमित पाठ करने से ☆साढ़ेसाती , ☆ढैया , ☆महादशा , ☆रोग , ☆दरिद्रता औऱ ☆शत्रुबाधा दूर होती है । ☆घर-राज्य की रक्षा एवं ☆आयु-आरोग्य की वृद्धि होती है ।`
`😊 सबसे बड़ा उपाय – सत्य का पालन तथा परोपकार में मितव्ययिता नहीं करें ।`
*ॐ शं शनैश्चराय नमः🙏🏻*
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