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#🖋ग़ज़ल #📖 कविता और कोट्स✒️
🖋ग़ज़ल - धूप गुलाबी या बारिश का मौसम जन्नत के हो तुम नज़ारे, मेरी नज़र से ख़ुद को तो देखो लगते हो चांद से प्यारे। दूर गगन में चांद खिला है तुम छत पर कब आओगे , नींद हमारी, ख़्वाब तुम्हारे हैं एक-्दूजे के सहारे. . CLASSYPOETRY VIHAL BAIRAஎ धूप गुलाबी या बारिश का मौसम जन्नत के हो तुम नज़ारे, मेरी नज़र से ख़ुद को तो देखो लगते हो चांद से प्यारे। दूर गगन में चांद खिला है तुम छत पर कब आओगे , नींद हमारी, ख़्वाब तुम्हारे हैं एक-्दूजे के सहारे. . CLASSYPOETRY VIHAL BAIRAஎ - ShareChat